नई दिल्ली (IIT Graduates Leading US Companies). आईआईटी को सिर्फ इंजीनियरिंग कॉलेज नहीं, बल्कि काबिलियत और लीडरशिप का ब्रांड माना जाता है. ग्लोबल टेक्नीक और बिजनेस में भारतीय मूल के दिग्गजों का नाम नंबर 1 पर है. इनमें से ज्यादातर की सफलता का सफर भारत के उन्हीं टॉप कैंपस से शुरू हुआ, जहां एडमिशन पाना दुनिया की सबसे कठिन चुनौतियों में से एक है. अमेरिका की कई ट्रिलियन-डॉलर कंपनियों की कमान उन हाथों में है, जिन्होंने अपनी शुरुआती पढ़ाई और संघर्ष आईआईटी में किया था.
अमेरिका में भारतीय मेधा का डंका
दुनिया की ज्यादातर टॉप टेक कंपनियों की लीडरशिप भारतीय हाथों में है. उनमें से भी अधिकतर किसी न किसी आईआईटी से पासआउट हैं. जानिए इनके बारे में:
1. सुंदर पिचाई (सीईओ, एल्फाबेट & गूगल)
आईआईटी खड़गपुर से मेटलर्जिकल इंजीनियरिंग में बीटेक करने वाले सुंदर पिचाई आज दुनिया के सबसे प्रभावशाली व्यक्तियों में से एक हैं. 1993 में ग्रेजुएट होने के बाद उन्होंने स्टैनफोर्ड और व्हार्टन से उच्च शिक्षा हासिल की. गूगल क्रोम, ड्राइव और एंड्रॉइड जैसे प्रोडक्ट्स को सफल बनाने का श्रेय सुंदर पिचाई को ही जाता है. उनकी शांत लेकिन फोकस्ड कार्यशैली ने उन्हें गूगल की कमान संभालने के योग्य बनाया.
2. अरविंद कृष्णा (सीईओ, आईबीएम)
आईबीएम के कायाकल्प में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले अरविंद कृष्णा आईआईटी कानपुर के स्टूडेंट रहे हैं. उन्होंने 1985 में इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में डिग्री हासिल की. क्लाउड कंप्यूटिंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के क्षेत्र में उनके योगदान ने IBM को नई दिशा दी है. कृष्णा का मानना है कि IIT ने उन्हें मुश्किल समस्याओं को सरलता से हल करने का नजरिया दिया.
3. निकेश अरोड़ा (सीईओ, Palo Alto Networks)
दुनिया के सबसे अधिक वेतन पाने वाले सीईओ में से एक, निकेश अरोड़ा आईआईटी (बीएचयू) वाराणसी के 1989 बैच के पूर्व छात्र हैं. उन्होंने सॉफ्टबैंक और गूगल में टॉप पदों पर काम करने के बाद पालो ऑल्टो नेटवर्क्स को साइबर सुरक्षा की दुनिया का बेताज बादशाह बनाया है. उनकी रणनीतिक सोच और आक्रामक बिजनेस मॉडल की चर्चा पूरी सिलिकॉन वैली में होती है.
4. विनोद खोसला (को-फाउंडर, सन माइक्रोसिस्टम्स)
सिलिकॉन वैली के सबसे शक्तिशाली निवेशकों में से एक विनोद खोसला ने आईआईटी दिल्ली से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की थी. उन्होंने ‘सन माइक्रोसिस्टम्स’ की सह-स्थापना की, जिसने कंप्यूटिंग की दुनिया बदल दी. आज ‘खोसला वेंचर्स’ के माध्यम से वे नई पीढ़ी के स्टार्टअप्स और क्लीन-एनर्जी प्रोजेक्ट्स को बढ़ावा दे रहे हैं.
5. अरविंद श्रीनिवास (सीईओ, Perplexity AI)
इस लिस्ट में सबसे युवा नामों में से एक अरविंद श्रीनिवास हैं, जो आईआईटी मद्रास के पूर्व छात्र (2017 बैच) हैं. उन्होंने ‘Perplexity AI’ की स्थापना कर सर्च इंजन की दुनिया में गूगल जैसी दिग्गज कंपनियों को चुनौती दी है. उनकी सफलता दर्शाती है कि नई पीढ़ी के IITians अब केवल बड़ी कंपनियों में नौकरी नहीं कर रहे, बल्कि खुद की यूनीकॉर्न कंपनियां खड़ी कर रहे हैं.





