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Chitrakoot news: गर्मियों के मौसम में चित्रकूट के पाठा क्षेत्र में मिलने वाला करौंदा इन दिनों लोगों की पहली पसंद बना हुआ है. खट्टे-मीठे स्वाद वाला यह छोटा सा फल न केवल स्वाद बढ़ाता है, बल्कि सेहत के लिए भी बेहद फायदेमंद माना जाता है. विटामिन-सी से भरपूर करौंदा पाचन तंत्र को मजबूत करने में मदद करता है, वहीं ग्रामीण लोग इसे अचार, चटनी और मुरब्बा बनाकर इस्तेमाल करते हैं. खास बात यह है कि जंगलों और गांवों में आसानी से मिलने वाला करौंदा ग्रामीणों के लिए अतिरिक्त कमाई का जरिया भी बनता जा रहा है.
पाठा क्षेत्र गर्मियों के मौसम में सिर्फ भीषण गर्मी ही नहीं बल्कि कई तरह के औषधीय फल भी अपने साथ लेकर आता है. इन्हीं में से एक है करौंदा जो इन दिनों जंगलों से लेकर गांवों के घरों तक आसानी से देखने को मिल रहा है.

खट्टे-मीठे स्वाद वाला यह फल न केवल लोगों की पसंद बना हुआ है, बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी बेहद फायदेमंद माना जाता है. पाठा क्षेत्र के लोग इसका सेवन करने के साथ-साथ बाजारों में बेचकर अच्छी कमाई भी कर लेते हैं.

आप को बता दे कि चित्रकूट के पाठा क्षेत्र के जंगलों और ग्रामीण इलाकों के घरों में करौंदा बड़ी मात्रा में पाया जाता है. खास बात यह है कि यह पौधा कम पानी में भी आसानी से उग जाता है, इसलिए पथरीली और सूखे वाली जमीन में भी इसकी पैदावार अच्छी होती है,गर्मियों के मौसम में ग्रामीण महिलाएं और बच्चे जंगलों से करौंदा तोड़कर बाजारों में बेचते भी नजर आते हैं. स्थानीय लोग इसका प्रयोग अचार, चटनी, मुरब्बा, जूस और सब्जी बनाने में करते हैं.
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मानिकपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के डॉक्टर पवन कुमार ने लोकल 18 को जानकारी में बताया कि करौंदा स्वास्थ्य के लिए बेहद लाभकारी फल है. उन्होंने कहा कि पहले के समय में गांवों के लोग नियमित रूप से इसका सेवन करते थे और घरों में इसकी चटनी, अचार व सब्जी बनाई जाती थी,लेकिन समय के साथ लोगों में जागरूकता कम होने लगी है, जिसके कारण इसका उपयोग घट गया है.

उन्होंने बताया कि करौंदा में भरपूर मात्रा में विटामिन-सी पाया जाता है, जो शरीर को कई बीमारियों से बचाने में मदद करता है.उनका कहना है कि करौदा पाचन तंत्र को भी मजबूत बनाता है.

वहीं पाठा के रहने वाले अनीस ने लोकल 18 को जानकारी में बताया कि मैं खुद अपने घर में करौंदा का पेड़ लगाया हूं. यह फल गर्मियों में बड़ी मात्रा में आता है. गांवों में लोग इसका इस्तेमाल चटनी और सब्जी बनाने में करते हैं, उन्होंने कहा कि करौंदा जंगलों से लेकर गांव के लगभग हर घर में देखने को मिल जाता है. कई ग्रामीण इसे जंगलों से तोड़कर बाजारों में बेचते हैं, जिससे उन्हें अतिरिक्त आमदनी भी हो जाती है.





