प्रेग्नेंसी में ज्यादा मीठा खाना गर्भ में पल रहे बच्चे के लिए खतरनाक ! ब्रेन डेवलपमेंट पर पड़ता है बुरा असर


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Pregnancy Diet and Child’s Health: गर्भावस्था के दौरान चीनी का ज्यादा सेवन गर्भ में पल रहे शिशु के लिए खतरनाक होता है. इससे बच्चे के ब्रेन डेवलपमेंट पर बुरा असर पड़ता है. एक्सपर्ट्स की मानें तो हाई ब्लड शुगर के कारण शरीर में सूजन बढ़ती है, जिससे ब्रेन को नुकसान होता है. इससे भविष्य में बच्चे को कई परेशानियों का खतरा बढ़ जाता है.

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प्रेग्नेंसी में ज्यादा मीठा खाना नुकसानदायक होता है.

Excess Sugar Harm Fetal Brain: प्रेग्नेंसी के दौरान खानपान का विशेष ध्यान रखने की जरूरत होती है. कई महिलाओं को गर्भावस्था में मीठा खाने का ज्यादा मन करता है और वे इसकी वजह से खूब मीठा खाती हैं. कई बार इसे प्रेग्नेंसी की कॉमन क्रेविंग माना जाता है, लेकिन ऐसा करना न सिर्फ गर्भवती महिलाओं के लिए नुकसानदायक है, बल्कि गर्भ में पल रहे बच्चे के लिए भी खतरनाक है. कई रिसर्च में यह पता चला है कि गर्भावस्था के दौरान शुगर का ज्यादा सेवन न केवल मां के स्वास्थ्य को बिगाड़ता है, बल्कि बच्चे के कॉग्निटिव फंक्शन को भी बिगाड़ सकता है. सोडा और शुगरी ड्रिंक्स को सबसे ज्यादा खतरनाक माना गया है.

अमेरिका के क्लीवलैंड क्लीनिक की रिपोर्ट के मुताबिक एक रिसर्च में पता चला है कि जिन महिलाओं ने गर्भावस्था में शुगरी ड्रिंक्स या डाइट सोडा का ज्यादा सेवन किया, उनके बच्चों में वर्बल मेमोरी यानी शब्दों को याद रखने की क्षमता और बिना बोले अधिकतर समस्याओं को सुलझाने की स्किल काफी कमजोर पाई गई. यह दर्शाता है कि चीनी की अधिकता बच्चे के न्यूरोलॉजिकल विकास की गति को धीमा कर देती है, जिसका असर शुरुआती कुछ सालों में साफ दिखने लगता है. भविष्य में ऐसे बच्चों में ब्रेन से जुड़ी समस्याएं पैदा होने का खतरा भी बढ़ जाता है. इसलिए प्रेग्नेंसी के दौरान शुगर इनटेक को लेकर बेहद सावधानी की जरूरत होती है.
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यही असर उन छोटे बच्चों में भी देखा गया, जिन्हें पैदा होने के शुरुआत 2 साल में ज्यादा मीठा खिलाया गया. एक्सपर्ट्स साफ कहते हैं कि 2 साल से कम उम्र के बच्चों के खाने में एडेड शुगर की बिल्कुल मात्रा नहीं होनी चाहिए. 2 साल से ऊपर के बच्चों के लिए भी यह सीमा प्रतिदिन मात्र 25 ग्राम यानी 6 चम्मच तक सीमित होनी चाहिए. जबकि एक कोल्ड ड्रिंक की बोतल में इससे कहीं ज्यादा चीनी होती है. इसलिए बच्चों को पैकेज्ड जूस और कोल्ड ड्रिंक्स बिल्कुल नहीं देनी चाहिए.

अक्सर माता-पिता अनजाने में बच्चों को योगर्ट, ग्रेनोला बार या पैकेज्ड फ्रूट जूस देकर उन्हें शुगर की भारी डोज दे देते हैं. एक कप फ्रूट जूस में उतनी ही चीनी हो सकती है, जितनी सोडा की एक कैन में. भले ही जूस प्राकृतिक फलों से बना हो, लेकिन फाइबर न होने के कारण इसमें चीनी कंडेंस हो जाती है, जो शरीर के ग्लूकोज स्तर को तुरंत बिगाड़ देती है. अच्छी बात यह है कि ताजे फलों में पाई जाने वाली नेचुरल शुगर का ब्रेन पर कोई नकारात्मक असर नहीं पाया गया. जो बच्चे ताजा फल खाते हैं, उनमें विजुअल मोटर स्किल्स और वर्बल इंटेलिजेंस बेहतर देखी गई. फलों में मौजूद फाइबर ब्लड शुगर के स्पाइक को रोकता है, जिससे ऊर्जा का स्तर बना रहता है और वजन भी कंट्रोल रहता है.

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अमित उपाध्याय

अमित उपाध्याय News18 Hindi की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें



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