अरुणाचल, ज़ेमिथांग में वादियों का लुत्फ़ अब ब्रिज पर, सेना ने 31 दिनों में तैयार किया बॉर्डर ब्रू कैफे


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अरुणाचल, ज़ेमिथांग में ब्रिज से वादियों का लुत्फ़, सेना ने बनाया बॉर्डर कैफे

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भारतीय सेना ने अरुणाचल प्रदेश के ज़ेमिथांग में ऑपरेशन सद्भावना के तहत ‘बॉर्डर ब्रू कैफे’ का उद्घाटन किया. यह कैफे पुराने बेली ब्रिज पर बना है और स्थानीय मोनपा आदिवासी समुदाय के कल्याण के लिए है.

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ज़ेमिथांग (अरुणाचल प्रदेश): भारतीय सेना ने ऑपरेशन सद्भावना के तहत दूर-दराज़ के बॉर्डर इलाके में समुदाय के विकास और पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए एक खास कैफे का उद्घाटन किया है. इसका नाम ‘बॉर्डर ब्रू कैफे’ है. यह कैफे स्थानीय मोनपा आदिवासी समुदाय के कल्याण और सशक्तिकरण के लिए बनाया गया है.

इस कैफे की सबसे खास बात यह है कि इसे पुराने और बंद हो चुके बेली ब्रिज (Bailey Bridge) पर बनाया गया है, जो न्यामजांग चू नदी के ऊपर है. यह तरीका बहुत नया और अनोखा है, जो पुरानी संरचना को नए इस्तेमाल में लाता है. पूरे पूर्वोत्तर भारत में ऐसा कैफे पहली बार बना है. यह जगह अब पर्यटकों और यात्रियों के लिए एक आकर्षक और यादगार ठिकाना बनने वाली है, जहां पहाड़ों के खूबसूरत नज़ारे देखते हुए चाय-कॉफी पी जा सकेगी.

इस कैफे को बनाने का मकसद स्थानीय लोगों को रोज़गार और कमाई के अच्छे मौके देना है. कैफे को स्थानीय मोनपा महिलाएं चलाएंगी. यहां स्थानीय संस्कृति, परंपराएं और मेहमाननवाजी को दिखाया जाएगा, जिससे इलाके में पर्यटन बढ़ेगा और लोगों की आर्थिक हालत सुधरेगी.

भारतीय सेना ने इस प्रोजेक्ट को बहुत तेज़ी से पूरा किया. सिर्फ 31 दिनों में कैफे तैयार हो गया, जो सेना की बेहतरीन योजना, टीमवर्क और मेहनत को दिखाता है. यह काम ऑपरेशन सद्भावना के मुख्य उद्देश्य को पूरा करता है. इस ऑपरेशन के जरिए सेना बॉर्डर इलाकों में लोगों के साथ अच्छे संबंध बनाती है, विकास में मदद करती है और सामाजिक-आर्थिक तरक्की लाती है.

उद्घाटन समारोह में स्थानीय लोग, बड़े अधिकारी और सेना के जवान बड़ी संख्या में शामिल हुए. सभी ने इस पहल की तारीफ की और कहा कि यह ज़ेमिथांग और पूरे इलाके के लिए एक गर्व का पल है. अब यह कैफे पर्यटन और स्थानीय विकास का नया केंद्र बनेगा. यह पहल दिखाती है कि सेना न सिर्फ सुरक्षा देती है, बल्कि लोगों की ज़िंदगी बेहतर बनाने में भी साथ खड़ी है.

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Mohit Chauhan

Mohit Chauhan is an Editorial Researcher with over eight years of experience in digital and television journalism, specializing in Defence, Weapons, International Relations, and Strategic Military Affairs. He c…और पढ़ें



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