फरीदाबाद: डिलीवरी का दिन हर गर्भवती महिला के लिए खास होता है. उस दिन सिर्फ एक नया बच्चा नहीं आता, बल्कि महिला खुद भी मां बनने का सफर शुरू करती है. इसी दौरान मन में सवाल उठते हैं क्या नॉर्मल डिलीवरी बेहतर है या ऑपरेशन से बच्चे का जन्म लेना ज्यादा ठीक है? दोनों तरीकों के अपने फायदे-नुकसान हैं और असली फैसला हमेशा महिला की हालत देखकर ही होना चाहिए.
क्या है नॉर्मल और सिजेरियन डिलीवरी
Local18 से बातचीत में डॉ. सीमा मनुजा जो सर्वोदय अस्पताल, फरीदाबाद में डायरेक्टर-गायनेकोलॉजी हैं उन्होंने बताया नॉर्मल डिलीवरी एकदम सरल तरीका है इसमें बिना सर्जरी के बच्चा जन्म लेता है. वहीं सिजेरियन डिलीवरी एक ऑपरेशन है डॉक्टर पेट और गर्भाशय में कट लगाकर बच्चे को बाहर निकालते हैं. लोग इसे आम तौर पर बड़ा ऑपरेशन भी कहते हैं.
सिजेरियन डिलीवरी के केस बढ़े
डॉ. सीमा ने बताया आजकल सिजेरियन डिलीवरी के केस काफी बढ़ गए हैं. पहले गांव में महिलाओं के कई बच्चे होते थे और ज्यादातर डिलीवरी नॉर्मल ही होती थीं लेकिन तब मां और बच्चे की मौतें भी ज्यादा होती थीं. अब हालात बदल गए हैं. एक-एक प्रेगनेंसी काफी कीमती मानी जाती है और हर परिवार रिस्क से बचना चाहता है. अच्छे मेडिकल सिस्टम, मॉनिटरिंग, और सुरक्षित डिलीवरी की वजह से ऑपरेशन के मामले बढ़ते जा रहे हैं. डॉ. सीमा ने बताया दुनिया में करीब 21% बच्चों का जन्म सिजेरियन से होता है और माना जा रहा है कि 2030 तक ये संख्या 30% तक जा सकती है.
तीन बार के बाद सिजेरियन में खतरा
डॉ. सीमा ने साफ बताया बार-बार ऑपरेशन होने से खतरा बढ़ जाता है. तीन बार तक सिजेरियन मैनेज किया जा सकता है, लेकिन इसके बाद मां की सेहत पर दिक्कतें बढ़ने लगती हैं. हर ऑपरेशन के बाद शरीर में चिपकन एडहेशन और चिकित्सा जटिलताएं बढ़ जाती हैं. तीसरी सिजेरियन के बाद मैं आम तौर पर नसबंदी की सलाह देती हूं, ताकि आगे कोई रिस्क न हो.
क्यों पड़ती है सिजेरियन की जरूरत
डॉ. सीमा ने बताया सिजेरियन की जरूरत खास हालात में ही पड़ती है. जैसे अगर बच्चा उल्टी या आड़ी स्थिति में हो प्लेसेंटा नीचे हो या नॉर्मल डिलीवरी मुमकिन न हो. कभी-कभी इमरजेंसी में भी ऑपरेशन करना पड़ता है अगर बच्चे की धड़कन कम हो या मां ज़्यादा ब्लीडिंग कर रही हो. ऐसे समय पर ऑपरेशन ही मां और बच्चे को बचाने का तरीका होता है.
डॉ. सीमा ने उम्र के असर की भी बात की अगर महिला की उम्र बहुत कम या बहुत ज्यादा है, तो कॉम्प्लिकेशन का खतरा बढ़ जाता है. बड़ी उम्र में अक्सर ब्लड प्रेशर, शुगर, और हार्मोन के मसले सामने आते हैं इनसे सिजेरियन की संभावना बढ़ जाती है. वहीं कम उम्र में भी शरीर पूरी तरह तैयार नहीं होता जिससे दिक्कतें हो सकती हैं.
सिजेरियन में रिकवर होने में थोड़ा ज्यादा समय लगता है
डॉ. सीमा ने बताया रिकवरी के मामले में नॉर्मल डिलीवरी के बाद महिला जल्दी ठीक हो जाती है. सिजेरियन में रिकवर होने में थोड़ा ज्यादा समय लगता है कम से कम 6 से 8 हफ्ते आराम करना जरूरी है. नॉर्मल डिलीवरी में भी 40 दिन आराम करने की सलाह दी जाती है. इसका मतलब ये नहीं कि ऑपरेशन के बाद महिला सामान्य जिंदगी नहीं जी सकती बस थोड़ी ज्यादा सावधानी और समय चाहिए.
डॉ. सीमा ने ये भी साफ बताया सिजेरियन के बाद मां अपने बच्चे को स्तनपान करा सकती है. शुरुआत में थोड़ी दिक्कत हो सकती है लेकिन एक-दो दिन में सब सामान्य हो जाता है. खान-पान की बात करें, तो नॉर्मल डिलीवरी में कोई खास परहेज नहीं होता. सिजेरियन में पहले कुछ घंटे खाली पेट रखा जाता है फिर लिक्विड डाइट उसके बाद हल्का खाना और करीब 48 घंटे बाद सामान्य भोजन दिया जाता है.
नॉर्मल डिलीवरी जल्दी रिकवर होने वाला तरीका
डॉ. सीमा ने बताया हर अस्पताल में ऑपरेशन के मामले अलग होते हैं. छोटे क्लिनिक में सिजेरियन का रेट 15 से 20% तक रहता है जो ठीक है. बड़े अस्पतालों या टर्सरी केयर सेंटर में ये 30-40% तक भी पहुंच सकता है, क्योंकि वहां हाई-रिस्क केस ज्यादा आते हैं. नॉर्मल डिलीवरी जल्दी रिकवर होने वाला तरीका है. सिजेरियन डिलीवरी जरूरत पड़ने पर सुरक्षित विकल्प है. सबसे जरूरी बात हर महिला अपनी स्थिति के हिसाब से डॉक्टर की सलाह पर ही फैसला ले क्योंकि मां और बच्चे की सुरक्षा सबसे पहले है.





