US Public School System: क्या अमेरिका के सरकारी स्कूलों में सब फ्री है? भारतीय बच्चों को एडमिशन मिल सकता है?


नई दिल्ली (US Public School System). विकसित देशों की शिक्षा व्यवस्था की बात करने पर दिमाग में अमेरिका के पब्लिक स्कूलों (सरकारी स्कूलों) का नाम जरूर आता है. अमेरिका में पब्लिक स्कूल का मतलब मुफ्त और सरकार की तरफ से वित्तपोषित (Taxpayer-Funded) शिक्षा है. वहां किंडरगार्टन से लेकर 12वीं (K-12) तक की पढ़ाई के लिए कोई ट्यूशन फीस नहीं देनी पड़ती. क्या आप जानते हैं कि अमेरिकी सरकारी स्कूलों में बच्चों को ऐसी कौन सी सुविधाएं मिलती हैं, जो कई देशों के महंगे प्राइवेट स्कूलों में भी नहीं हैं?

अमेरिका के स्कूलों में बच्चों को सिर्फ किताबी ज्ञान नहीं दिया जाता है. वहां उनके ओवरऑल पर्सनालिटी डेवलपमेंट पर ध्यान देते हैं. स्कूल की पीली बसों से लेकर क्लासरूम में मिलने वाले हाई-टेक गैजेट्स तक, सब बच्चे की सहूलियत को ध्यान में रखकर तैयार किया जाता है. अमेरिका के लोकल टैक्स और राज्य सरकार के फंड से चलने वाले सरकारी स्कूल बच्चों को सेफ, मॉडर्न और समान माहौल देने का काम करते हैं. जानिए अमेरिका के सरकारी स्कूलों में बच्चों को क्या-क्या मुख्य सुविधाएं मिलती हैं.

अमेरिका के सरकारी स्कूलों में मिलने वाली 6 सबसे खास सुविधाएं

जहां भारत के ज्यादातर सरकारी स्कूलों में बच्चे सुविधाओं के अभाव में पढ़ाई करते हैं, वहीं अमेरिका के सरकारी स्कूल काफी समृद्ध हैं. जानिए वहां बच्चों को क्या सुविधाएं दी जाती हैं.

1. फ्री बस ट्रांसपोर्टेशन

अमेरिका के पब्लिक स्कूलों की सबसे बड़ी पहचान उनकी आइकॉनिक ‘पीली स्कूल बसें’ हैं. स्कूल डिस्ट्रिक्ट के दायरे में रहने वाले हर स्टूडेंट को घर के पास से स्कूल तक लाने और छोड़ने की बस सुविधा बिल्कुल मुफ्त या बेहद मामूली चार्ज पर मिलती है. ये बसें बेहद सुरक्षित होती हैं और इनके सड़क पर रुकते ही बाकी गाड़ियों को रुकना अनिवार्य होता है.

2. न्यूट्रिशियस मील प्रोग्राम (फ्री/सब्सिडी वाला खाना)

नेशनल स्कूल लंच प्रोग्राम (NSLP) के तहत सभी स्टूडेंट्स को स्कूल में ही ब्रेकफास्ट और लंच दिया जाता है. कम इनकम वाले परिवारों के बच्चों को यह खाना मुफ्त या भारी डिस्काउंट पर मिलता है. स्कूल लंच मील में दूध, फल, सब्जियां और बैलेंस डाइट का खास ध्यान रखा जाता है. वहां सुनिश्चित किया जाता है कि कोई भी बच्चा भूखे पेट न पढ़ाई करे.

3. टेक्नोलॉजी और फ्री डिवाइस

आज-कल अमेरिका के ज्यादातर पब्लिक स्कूलों में ‘1:1 टेक्नोलॉजी’ नियम लागू है. इसका मतलब है कि हर बच्चे को पढ़ाई के लिए स्कूल की तरफ से एक क्रोमबुक (Chromebook), लैपटॉप या आईपैड दिया जाता है. टेक्स्टबुक से लेकर असाइनमेंट और होमवर्क तक सब कुछ डिजिटल पोर्टल पर ही सबमिट होता है. नए दौर के हिसाब से बच्चों को टेक्नोलॉजी कंपैटिबल बनाना जरूरी है.

4. स्पेशल एजुकेशन और थेरेपी (IEP सपोर्ट)

अगर किसी बच्चे को सीखने में परेशानी है या वह शारीरिक/मानसिक रूप से दिव्यांग है तो अमेरिकी कानून (IDEA) के तहत उसे ‘इंडिविजुअलाइज्ड एजुकेशन प्रोग्राम’ (IEP) मिलता है. इसमें बच्चे के लिए अलग से स्पेशल एजुकेटर, स्पीच थेरेपिस्ट और ऑक्यूपेशनल थेरेपिस्ट की सुविधा स्कूल परिसर में ही बिना किसी अतिरिक्त खर्च के दी जाती है.

5. वर्ल्ड क्लास स्पोर्ट्स और एक्स्ट्रा-करिकुलर एक्टिविटीज

अमेरिका के सरकारी स्कूलों में पढ़ाई के साथ-साथ खेलों पर भी बहुत फोकस किया जाता है. वहां के पब्लिक स्कूल में फुटबॉल फील्ड, बास्केटबॉल कोर्ट, स्विमिंग पूल और रनिंग ट्रैक होते हैं. इसके अलावा म्यूजिक बैंड, ड्रामा क्लब, रोबोटिक्स और कोडिंग जैसी एक्टिविटीज में बच्चों को अपनी प्रतिभा निखारने का पूरा मौका मिलता है.

6. मेंटल हेल्थ और करियर काउंसलिंग

अमेरिका के हर पब्लिक स्कूल में क्वॉलिफाइड ‘स्कूल काउंसलर’ और ‘सर्टिफाइड नर्स’ तैनात होते हैं. अगर बच्चा किसी तनाव, बुलिंग या मानसिक परेशानी से गुजर रहा है तो काउंसलर उसकी मदद करते हैं. साथ ही, हाईस्कूल के स्टूडेंट्स को कॉलेज सिलेक्शन और करियर गाइडेंस के लिए भी प्रॉपर काउंसलिंग दी जाती है.

अमेरिका के सरकारी स्कूल में एडमिशन कैसे मिलता है?

अमेरिका के सरकारी स्कूल में एडमिशनन बच्चे के वीजा और इमिग्रेशन स्टेटस पर निर्भर करता है:

  • अगर माता-पिता H-1B, L-1 या किसी अन्य वैध वर्क/स्टडी वीजा पर अमेरिका में रह रहे हैं तो उनके बच्चों (जैसे H-4 या L-2 वीजा धारक) को किंडरगार्टन से 12वीं कक्षा तक (K-12) मुफ्त पढ़ाई का अधिकार मिलता है.
  • अगर कोई स्टूडेंट केवल स्कूल की पढ़ाई करने के उद्देश्य से भारत से सीधे अमेरिका जाना चाहता है तो अमरीकी इमिग्रेशन नियमों के तहत उसे F-1 वीजा पर केवल 9वीं से 12वीं कक्षा (हाई स्कूल) में ही दाखिला मिल सकता है. इसकी समय सीमा अधिकतम 1 वर्ष होती है और इसके लिए स्कूल डिस्ट्रिक्ट की पूरी ट्यूशन फीस (लगभग 10,000 से 15,000 डॉलर) भी देनी पड़ती है.
  • भारतीय स्टूडेंट्स कल्चरल एक्सचेंज प्रोग्राम (J-1 वीजा) के तहत भी एक साल के लिए अमेरिका के पब्लिक स्कूल में पढ़ाई कर सकते हैं.



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