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दिल्ली मेट्रो की मैजेंटा और पिंक लाइन पर चलने वाली कुछ ट्रेनें बिना ड्राइवर के संचालित होती हैं. इनमें आगे ड्राइवर केबिन नहीं होता, इसलिए यात्री सामने का पूरा ट्रैक देख सकते हैं. जानिए यह तकनीक कैसे काम करती है.
दिल्ली की मेट्रो में कोई ड्राइवर नहीं.
दिल्ली मेट्रो में सफर करने वाले ज्यादातर लोगों की नजरें सीट ढूंढने या अगले स्टेशन पर रहती हैं. लेकिन अगर आप मैजेंटा या पिंक लाइन से यात्रा करें, तो आपको एक ऐसा अनुभव मिल सकता है जो दूसरी मेट्रो लाइनों से बिल्कुल अलग है. इन लाइनों की कुछ ट्रेनों में आगे ड्राइवर का केबिन नहीं होता. इसकी वजह से पहले कोच के सामने लगे बड़े शीशे से यात्री ट्रेन के आगे का पूरा रास्ता देख सकते हैं. ऐसा महसूस होता है जैसे आप खुद ट्रेन को आगे बढ़ते हुए देख रहे हों.
यह सुविधा किसी खास आकर्षण के लिए नहीं, बल्कि आधुनिक ऑटोमेशन तकनीक का हिस्सा है. दिल्ली मेट्रो की ये ट्रेनें बिना ड्राइवर के संचालन के लिए तैयार की गई हैं और पूरी यात्रा के दौरान कंप्यूटर आधारित सिस्टम उनकी गतिविधियों को नियंत्रित करता है.
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