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Trump Class Battleship: अमेरिकी कांग्रेस के सदस्य अमेरिकी नेवी को ‘ट्रंप क्लास’ नाम के पहले न्यूक्लियर बैटलशिप का निर्माण शुरू करने से रोकना चाहते हैं. सांसदों का कहना है कि जब तक रेलगन, हाई-पावर लेजर और अन्य एडवांस हथियार पूरी तरह भरोसेमंद साबित नहीं हो जाते, तब तक इस युद्धपोत पर काम शुरू नहीं होना चाहिए.
ट्रंप क्लास बैटलशिप का डिजाइन. (फोटो- US Navy)
Trump Class Battleship: अमेरिका समंदर में ऐसा ‘परमाणु दैत्य’ उतारने की तैयारी में है, जो लेजर से दुश्मन जलाएगा, रेलगन से हमला करेगा और हाइपरसोनिक मिसाइलें दागेगा. लेकिन जहाज पानी में उतरे उससे पहले ही राजधानी वॉशिंगटन में घमासान शुरू हो गया है. अमेरिकी सांसद अब नेवी को ट्रंप क्लास बैटलशिप का निर्माण शुरू करने से रोकने की तैयारी कर रहे हैं. दरअसल अमेरिकी कांग्रेस में पेश NDAA 2027 के शुरुआती ड्राफ्ट में कहा गया है कि जब तक नेवी यह साबित नहीं करती कि जहाज में लगाए जाने वाले हथियार ‘पर्याप्त रूप से परिपक्व’ हैं, तब तक पहले जहाज के निर्माण का कॉन्ट्रैक्ट नहीं दिया जा सकता. यानी अमेरिकी सांसदों को विश्वास नहीं है कि जिन हथियारों की बात हो रही है, वह उसी तरह काम करेंगे, जैसे उम्मीद की जा रही है.
ट्रंप क्लास बैटलशिप क्या है?
करीब 35 हजार टन वजनी यह न्यूक्लियर बैटलशिप अमेरिकी नेवी का भविष्य माना जा रहा है. इसे परमाणु और पारंपरिक मिसाइलों, इलेक्ट्रोमैग्नेटिक रेलगन, 5-इंच नेवल गन, हाई-पावर लेजर हथियार और क्लोज-इन डिफेंस सिस्टम से लैस करने की योजना है. जहाज में बड़े वर्टिकल लॉन्च सिस्टम यानी VLS लगाए जाएंगे, जिनमें हाइपरसोनिक मिसाइलें भी रखी जाएंगी. ये सीधे लॉन्च की जा सकती हैं. लेकिन सबसे बड़ा पेंच रेलगन और लेजर सिस्टम पर फंसा है.
दक्षिण कोरिया की एक बैटलशिप.
रेलगन और लेजर क्यों बने सिरदर्द?
रेलगन एक बेहद एडवांस और खतरनाक हथियार सिस्टम होता है, जो बारूद या पारंपरिक विस्फोटक की जगह बिजली की ताकत से गोलियां या धातु के प्रोजेक्टाइल को बेहद तेज रफ्तार से दागता है. सीधी भाषा में ये बिजली वाली तोप होती है. ये आवाज की रफ्तार से 6-7 गुना तेज हमला कर सकती है. द वार जोन की रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिकी नेवी 2005 से 2021 तक रेलगन प्रोग्राम चला चुकी है. हालांकि शुरुआती टेस्ट सफल माने गए थे, लेकिन तकनीकी समस्याओं की वजह से पूरा प्रोग्राम बंद कर दिया गया था. अब खबर है कि फरवरी 2025 में न्यू मैक्सिको के व्हाइट सैंड्स मिसाइल रेंज में फिर टेस्टिंग हुई.
इसी तरह ‘ट्रंप क्लास’ के लिए 300 किलोवॉट लेजर लगाने की योजना है, जबकि अमेरिकी नेवी अभी तक अपने जहाजों पर इससे काफी कम क्षमता वाले लेजर ही लगा पाई है. यानी जहाज का सपना बहुत बड़ा है, लेकिन टेक्नोलॉजी अभी पूरी तरह तैयार नहीं मानी जा रही.
17 अरब डॉलर का दांव
अमेरिकी नेवी 2028 में पहला जहाज ऑर्डर करना चाहती है, जिसका नाम USS डिफायंट रखा जाना है. इसकी अनुमानित कीमत 17 अरब डॉलर बताई जा रही है. अगर सबकुछ ठीक रहा तो ये जहाज 2036 तक सेवा में आ सकता है. नेवी की योजना 2029 से 2055 के बीच ऐसे कुल 15 बैटलशिप खरीदने की है. हालांकि अमेरिकी सांसदों को डर है कि कहीं यह प्रोजेक्ट भी पहले की तरह ‘जल्दबाजी में शुरू’ होकर महंगा सिरदर्द न बन जाए.
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योगेंद्र मिश्र ने इलाहाबाद यूनिवर्सिटी से जर्नलिज्म में ग्रेजुएशन किया है. 2017 से वह मीडिया में जुड़े हुए हैं. न्यूज नेशन, टीवी 9 भारतवर्ष और नवभारत टाइम्स में अपनी सेवाएं देने के बाद अब News18 हिंदी के इंटरने…और पढ़ें





