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गर्मी के मौसम में तरबूज लोगों की पहली पसंद माना जाता है, लेकिन मऊ का देसी तरबूज अपनी खास मिठास और स्वाद की वजह से अलग पहचान बना चुका है. नदी किनारे उगाया जाने वाला यह तरबूज न सिर्फ शरीर को ठंडक देता है, बल्कि पानी की कमी दूर करने और ताजगी बनाए रखने में भी मदद करता है. यही वजह है कि इसकी मांग उत्तर प्रदेश से लेकर बड़े शहरों और विदेशों तक बनी रहती है.
गर्मियों का सीजन आते ही लोग तरबूज और खरबूजा खाना खूब पसंद करते हैं, लेकिन इन दिनों मऊ का तरबूज लोगों के बीच खास पहचान बना रहा है. माना जाता है कि यहां का तरबूज खाते ही शरीर को ठंडक महसूस होती है और यह शरीर में खून बढ़ाने में भी मददगार माना जाता है. यही वजह है कि लोग इस तरबूज को बड़े चाव से खाते हैं. इसकी मिठास और स्वाद लोगों को इतना पसंद आता है कि सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि विदेशों में जाने वाले लोग भी इसे अपने साथ लेकर जाते हैं.

इस खास तरबूज की खेती के लिए जनवरी से फरवरी के बीच बीजों की बुवाई की जाती है. इसके बाद फसल धीरे-धीरे तैयार होती है और अप्रैल के अंतिम दिनों से लेकर मई की शुरुआत में बाजार में आना शुरू हो जाती है. इस तरबूज को तैयार होने में काफी समय और मेहनत लगती है, इसलिए किसान इसकी खेती में विशेष ध्यान रखते हैं. तरबूज की अच्छी पैदावार और मिठास के लिए बलुई दोमट मिट्टी सबसे उपयुक्त मानी जाती है. ऐसी मिट्टी में उगाए गए तरबूज में ज्यादा मिठास आती है, जिसकी वजह से इसका स्वाद लोगों को बेहद पसंद आता है.

मऊ में उगाए जाने वाले इस खास तरबूज की मांग सिर्फ उत्तर प्रदेश तक ही सीमित नहीं है, बल्कि दिल्ली, मुंबई और कोलकाता जैसे बड़े शहरों तक भी इसकी सप्लाई की जाती है. इतना ही नहीं, यहां आने वाले कई लोग इस तरबूज को अपने साथ विदेश तक लेकर जाते हैं. लोगों का मानना है कि मऊ के तरबूज जैसी मिठास प्रदेश में दूसरी जगह आसानी से नहीं मिलती. यही वजह है कि इसकी डिमांड लगातार बढ़ती जा रही है. खास बात यह भी है कि खेतों से निकलने के बाद यह तरबूज कई दिनों तक खराब नहीं होता, इसलिए लोग इसे आसानी से लंबी दूरी तक लेकर जा सकते हैं.
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अगर मऊ में मिलने वाले तरबूज की कीमत की बात करें, तो यह खेतों से काफी सस्ते दामों में आसानी से मिल जाता है. जहां बाजारों में इसकी कीमत ज्यादा होती है, वहीं सीधे खेतों से खरीदने पर यह करीब 20 रुपये प्रति किलो तक मिल जाता है. यही तरबूज बाद में बाजारों में अधिक दामों पर बेचा जाता है. मऊ में बड़े पैमाने पर तरबूज की खेती होने की वजह से यहां इसकी कीमत अपेक्षाकृत कम रहती है. यही कारण है कि लोग ट्रैक्टर-ट्रॉली और अन्य वाहनों से यहां पहुंचकर बड़ी मात्रा में तरबूज खरीदकर दूसरे जिलों और शहरों तक ले जाते हैं.

तरबूज बाहर से हरे रंग का दिखाई देता है, लेकिन काटने पर अंदर से इसका गूदा गहरे लाल रंग का होता है. यही लाल रंग वाला तरबूज अपने बेहद मीठे स्वाद के लिए जाना जाता है. गर्मियों में लोग इसे बड़े चाव से खाना पसंद करते हैं. तरबूज खाने का सबसे अच्छा तरीका यह माना जाता है कि बाजार से लाने के बाद इसे कुछ देर तक ठंडे पानी में रखा जाए. इसके बाद इसे छोटे-छोटे टुकड़ों में काटकर छिलके अलग कर दिए जाएं और फिर इसका सेवन किया जाए. इसकी मिठास शरीर को अंदर से ताजगी देने का काम करती है और यह शरीर में खून बढ़ाने में भी मददगार माना जाता है. यही वजह है कि गर्मी के मौसम में तरबूज लोगों की पहली पसंद बना रहता है.

अगर मऊ जनपद के सबसे फेमस तरबूज की बात करें, तो भातकोल बाजार का तरबूज सबसे ज्यादा मशहूर माना जाता है. यहां नदी किनारे बड़े पैमाने पर तरबूज की खेती की जाती है, जिससे फल में खास मिठास आती है. किसान खेतों से ताजा तरबूज सीधे बाजार में लेकर आते हैं, इसलिए यहां मिलने वाला तरबूज पूरी तरह ताजा और स्वादिष्ट माना जाता है. लोगों का कहना है कि भातकोल बाजार के तरबूज जैसी मिठास पूरे मऊ जिले में कहीं और नहीं मिलती. यही वजह है कि इस बाजार के तरबूज की मांग दूर-दूर तक रहती है और लोग खास तौर पर यहां से तरबूज खरीदने पहुंचते हैं.

गर्मी के मौसम में तरबूज को शरीर में पानी की कमी दूर करने और खून बढ़ाने के लिए बेहद फायदेमंद माना जाता है. यही वजह है कि लोग गर्मियों में इसका सेवन सबसे ज्यादा करते हैं. तरबूज शरीर को ठंडक पहुंचाने के साथ ताजगी बनाए रखने में भी मदद करता है. मऊ में खास तौर पर नदी किनारे तरबूज की खेती की जाती है, जिससे इसमें प्राकृतिक मिठास अधिक आती है. यही खास स्वाद और मिठास लोगों को बेहद पसंद आती है, जिसके कारण यहां का तरबूज दूर-दूर तक भेजा जाता है और इसकी मांग लगातार बनी रहती है.

अगर तरबूज को छोटे-छोटे टुकड़ों में काटकर ऊपर से हल्का काला नमक छिड़क कर खाया जाए, तो इसका स्वाद और भी बढ़ जाता है. गर्मियों में लोग इसे बड़े चाव से खाते हैं, क्योंकि यह शरीर को ठंडक और ताजगी देने का काम करता है. तरबूज में पानी की मात्रा काफी अधिक होती है, इसलिए इसे शरीर में पानी की कमी दूर करने और खून बढ़ाने के लिए फायदेमंद माना जाता है. खास बात यह है कि मऊ जनपद का तरबूज अपनी जबरदस्त मिठास और देसी स्वाद की वजह से काफी मशहूर है. यही कारण है कि इसकी मांग सिर्फ आसपास के इलाकों में ही नहीं, बल्कि दूर-दराज और विदेशों तक भी बनी रहती है.





