बिहार के युवा ने बनाया ‘Zero Gravity’, झूला, अंतरिक्ष जैसा रोमांच देने का दावा


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Zero Gravity swing Bihar: बिहार के नालंदा जिले का कन्हैयागंज गांव एक बार फिर अपने अनोखे नवाचार के कारण चर्चा में है. ‘झूला नगरी’ के नाम से मशहूर इस गांव के युवा कारीगरों ने स्वदेशी तकनीक से राज्य का पहला ‘Zero Gravity’ झूला तैयार कर नया कीर्तिमान स्थापित किया है. इससे पहले स्विंग स्टार और टोरनेडो जैसे आकर्षक झूले बना चुके पिंटू विश्वकर्मा और उनकी टीम ने करीब तीन महीने की मेहनत के बाद इस रोमांचक राइड का सफल ट्रायल भी कर लिया है. गांव में तैयार हुआ यह आधुनिक झूला न केवल स्थानीय प्रतिभा का उदाहरण है, बल्कि यह दिखाता है कि छोटे गांवों से भी बड़े इनोवेशन निकल सकते हैं.

स्विंग स्टार, टोरनेडो और अब Zero Gravity… बिहारी युवा एक से बढ़कर एक झूला बनाकर कमाल कर रहा है. यह तीसरी दफा है, जब प्रदेश का पहला ऑटोमैटिक झूला बनाकर तैयार किया है. यह कोई बड़े शहरों में कार्य नहीं हो रहा है, बल्कि गांव में ही बनता जा रहा है.

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यह गांव है- नालंदा जिले का कन्हैयागंज. इस गांव को ‘झूला नगरी’ कहा जाता है. यहां के करीब 200 परिवार झूला के व्यवसाय से जुड़े हुए हैं और सुबह उठते ही झूला के कारखानों से दिन शुरू होकर रात भी इसी में गुजरता है. इस गांव का यह बहुत पुराना व्यवसाय है.

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जैसे जैसे देश दुनिया आधुनिकता की ओर बढ़ रहा है, उस हिसाब से कन्हैयागंज गांव मॉडर्न होता जा रहा है. यहां अब तरह तरह के झूले बनने लगे हैं. झूला व्यवसाय से जुड़े पिंटू विश्वकर्मा लगातार इस क्षेत्र में कुछ न कुछ नया लाने की कोशिश में लगे हुए हैं.

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उनका मानना है कि जब हमारे प्रधानमंत्री स्वदेशी अपनाने को कहते हैं तो हम भी उन्हीं की बताई राहों पर चलकर ऐसा कार्य कर रहे हैं. इस बार हमारे यहां राज्य का पहला ‘Zero Gravity’ झुला बनाकर सफल ट्रायल कर लिया गया है और 3 दिन में इसकी आपूर्ति भी की जानी है.

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जीरो ग्रैविटी की खासियत के बारे में पिंटू विश्वकर्मा का कहना है कि यह ऐसा झूला है. जिसका आनंद लेने के बाद आपको शायद अंतरिक्ष का अनुभव प्राप्त होगा. बहुत ही रोमांचकारी अनुभव होता है. एक बार चढ़ कर आनंद लिए तो आपको कभी यह मन में दुख नहीं रहेगा कि हमने अंतरिक्ष का सफर नहीं किया. कुछ उसी प्रकार का ख्याल आता है.

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यह बिल्कुल स्वदेशी तरीके से तैयार किया गया है. हां, भारत में अन्य जगहों पर इस झूला का निर्माण हो चुका होगा, लेकिन बिहार का यह झुला पहला है, जिसे हमने और हमारी पूरी टीम ने तैयार किया है. वो बताते हैं कि मार्केट में इस झूले की कीमत 15 लाख रुपए तक है, लेकिन हम इसको और कम कीमत में ग्राहकों तक उपलब्ध करवाएंगे. 3 महीने की कोशिश के बाद संभव हो पाया है.

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पिंटू विश्वकर्मा ने सरकार से यह आग्रह किया है कि जिस प्रकार से हम लोग दिन-रात कारोबार बढ़ाने में जुटे हुए हैं और जितनी मेहनत करते हैं उस हिसाब से प्लेटफार्म भी मिलना चाहिए. अकेले कहां तक सफर पूरा कर पाएंगे. हमने इससे पहले दो और यूनीक झूला (स्विंग स्टार और टोरनेडो) बनाकर तैयार किया, लेकिन उस हिसाब से हमलोग को फिर मार्केट नहीं मिल पाया. यदि मार्केट मिले तो कुछ न कुछ फायदा हमलोगों को होगा और हमारा कारोबार भी अच्छा चलेगा.

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