World Thyroid Day 2026: आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में थायरॉइड की समस्या तेजी से बढ़ती जा रही है. खासतौर पर महिलाओं में यह बीमारी काफी कॉमन हो चुकी है. गले के अंदर मौजूद छोटी सी थायरॉइड ग्रंथि शरीर के कई जरूरी कामों को कंट्रोल करती है. यह शरीर की ऊर्जा, मेटाबॉलिज्म, हार्मोन बैलेंस, दिल की धड़कन और वजन को संतुलित रखने में अहम भूमिका निभाती है. जब यह ग्रंथि सही मात्रा में हार्मोन नहीं बनाती, तब शरीर में कई तरह की समस्याएं शुरू होने लगती हैं. हर साल 25 मई को मनाया जाने वाला वर्ल्ड थायरॉइड डे लोगों को इस बीमारी के प्रति जागरूक करने का काम करता है.
नोएडा एक्सटेंशन के यथार्थ हॉस्पिटल के एंडोक्रोनोलॉजी, डायबिटीज एंड मेटाबॉलिक डिसऑर्डर्स डिपार्टमेंट के कंसल्टेंट डॉ. आशीष गुप्ता ने News18 को बताया थायरॉइड मुख्य रूप से दो प्रकार की समस्या है. हाइपोथायरॉइड और हाइपरथायरॉइड. हाइपोथायरॉइड में थायरॉइड ग्लैंड जरूरत से कम हार्मोन बनाती है. यह भारत में सबसे ज्यादा देखी जाने वाली थायरॉइड समस्या मानी जाती है. इस स्थिति में व्यक्ति को हर समय थकान महसूस हो सकती है, वजन तेजी से बढ़ने लगता है, ठंड ज्यादा लगती है और शरीर में सुस्ती बनी रहती है. कई लोगों में बाल झड़ने और स्किन ड्राई होने की शिकायत भी देखने को मिलती है. अक्सर लोग इन लक्षणों को सामान्य कमजोरी समझकर नजरअंदाज कर देते हैं.
डॉक्टर ने बताया कि हाइपरथायरॉइड की स्थिति तब होती है, जब थायरॉइड ग्लैंड जरूरत से ज्यादा हार्मोन बनाने लगती है. इस बीमारी में शरीर का मेटाबॉलिज्म असामान्य रूप से तेज हो जाता है. इसके कारण व्यक्ति का वजन तेजी से कम होने लगता है, दिल की धड़कन बढ़ जाती है, घबराहट महसूस होती है और ज्यादा पसीना आने लगता है. कई लोगों के हाथ कांपने लगते हैं और नींद न आने की समस्या भी होने लगती है. अगर समय रहते इसका इलाज न कराया जाए, तो यह दिल की सेहत बिगाड़ सकता है.
किन लोगों को थायरॉइड का ज्यादा खतरा?
एक्सपर्ट के अनुसार थायरॉइड की समस्या किसी को भी हो सकती है, लेकिन कुछ लोगों में इसका खतरा ज्यादा माना जाता है. महिलाओं, गर्भवती महिलाओं और परिवार में थायरॉइड की हिस्ट्री वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत होती है. डायबिटीज, ऑटोइम्यून बीमारी या हार्मोनल समस्याओं से जूझ रहे लोगों में भी इसका जोखिम बढ़ जाता है. बढ़ती उम्र, तनाव और खराब लाइफस्टाइल भी थायरॉइड की समस्या को बढ़ाने वाले कारण माने जाते हैं.
क्या थायरॉइड की दवा जिंदगीभर चलती है?
बहुत से लोग यह जानना चाहते हैं कि क्या थायरॉइड की दवा हमेशा लेनी पड़ती है. इसका जवाब व्यक्ति की स्थिति और बीमारी की गंभीरता पर निर्भर करता है. खासतौर पर हाइपोथायरॉइड के कई मरीजों को लंबे समय तक या जीवनभर दवा लेनी पड़ सकती है. हालांकि नियमित जांच, सही इलाज और संतुलित जीवनशैली अपनाकर इसे अच्छी तरह नियंत्रित किया जा सकता है. डॉक्टर की सलाह के अनुसार समय-समय पर थायरॉइड टेस्ट करवाना बेहद जरूरी होता है. अगर शरीर में लगातार थकान, वजन में अचानक बदलाव या हार्मोन से जुड़ी समस्याएं दिखाई दें, तो उन्हें नजरअंदाज करने की बजाय तुरंत जांच करानी चाहिए.
बच्चों में भी बढ़ रहे थायरॉइड के मामले
ग्रेटर नोएडा के ओमेगा-1 स्थित यथार्थ हॉस्पिटल के इंटरनल मेडिसिन एंड डायबिटोलॉजी डिपार्टमेंट के हेड डॉ. एन के सोनी ने बताया अब थायरॉइड सिर्फ बड़ों तक सीमित बीमारी नहीं रह गई है, बल्कि बच्चों और किशोरों में भी इसके मामले तेजी से बढ़ रहे हैं. कई बार माता-पिता बच्चों की सुस्ती, चिड़चिड़ापन, पढ़ाई में कमजोरी या हर समय थकान को सामान्य व्यवहार या आलस समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, जबकि इसके पीछे थायरॉइड जैसी गंभीर समस्या हो सकती है. थायरॉइड शरीर की ऊर्जा, मेटाबॉलिज्म और हार्मोन संतुलन को नियंत्रित करता है. इसके बिगड़ने पर बच्चों में वजन बढ़ना या घटना, ध्यान कम लगना, याददाश्त कमजोर होना और विकास प्रभावित होने जैसी समस्याएं देखने को मिल सकती हैं.
विशेषज्ञों के अनुसार खराब लाइफस्टाइल, जंक फूड, बढ़ता मोटापा, ज्यादा स्क्रीन टाइम, शारीरिक गतिविधियों की कमी और तनाव बच्चों में थायरॉइड के बढ़ते मामलों के बड़े कारण बन रहे हैं. समय पर पहचान और इलाज बेहद जरूरी है. अगर बच्चा अचानक ज्यादा सुस्त रहने लगे, जल्दी थक जाए या पढ़ाई में पिछड़ने लगे, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. संतुलित आहार, आयोडीन युक्त नमक, नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद और कम स्क्रीन टाइम से थायरॉइड के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है. साथ ही डॉक्टर की सलाह के अनुसार नियमित जांच भी जरूरी है.





