पेपर लीक केस में टेलीग्राम ही क्यों किया गया बैन, वॉट्सऐप-फेसबुक क्यों नहीं? सरकारी वकील ने दिया जवाब


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NEET पेपर लीक में सरकार ने टेलीग्राम को तो 22 जून तक बैन कर दिया, लेकिन वॉट्सऐप और फेसबुक या अन्य मैसेजिंग ऐप्स को नहीं किया. टेलीग्राम के सीईओ पावेल दुरोव ने भारत सरकार के इस फैसले को कोर्ट में चुनौती दी. कोर्ट में जब इस मामले में बहस चली तो सरकारी वकील ने टेलीग्राम के एक खास फीचर पर ऊंगली उठाई, जो इसे वॉट्सऐप से अलग बनाती है. यह था क्लाउड आर्किटेक्चर. चलिए बताते हैं इसके बारे में पूरी डिटेल…

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पेपर लीक केस में टेलीग्राम ही क्यों किया गया बैन, वॉट्सऐप-फेसबुक क्यों नहीं?Zoom

NEET पेपर लीक में सरकार ने टेलीग्राम को तो 22 जून तक बैन कर दिया गया है.

नई दिल्ली. देश में टेलीग्राम (Telegram) पर लगे बैन को लेकर हर किसी के मन में एक ही सवाल है कि नीट पेपर लीक मामले में आखिर इसी ऐप पर ही गाज क्यों गिरी? सोशल मीडिया पर लोग पूछ रहे हैं कि जब वॉट्सऐप और फेसबुक भी धड़ल्ले से चल रहे हैं, तो टेलीग्राम ने ऐसा क्या गुनाह कर दिया? अब इस सस्पेंस से पर्दा उठ गया है. सरकारी वकील ने कोर्ट में बताया है कि टेलीग्राम को बैन करने के पीछे क्या वजह है. बताया गया कि इसके क्लाउड आर्किटेक्चर (Cloud Architecture) की वजह से इसे बैन किया गया है. वैसे बता दें कि यही इस ऐप की सबसे बड़ी खूबी भी है.

कोर्ट में सरकार की तरफ से पहुंचे वकील ने अदालत से कहा कि टेलीग्राम को बैन करने की मुख्य वजह इसका क्लाउड बेस्ड सिस्टम है. टेलीग्राम पर पेपर लीक जैसी गैर-कानूनी चीजें और गैर-कानूनी कंटेंट बहुत तेजी से फैलता है. चूंकि इसका सारा डेटा क्लाउड सर्वर पर मौजूद रहता है, इसलिए इसे रोकने या मॉडरेट करने में भारी दिक्कतें आती हैं. जब भी सरकार कंपनी से इस कंटेंट को हटाने या जांच में सहयोग करने के लिए कहती है, तो टेलीग्राम की तरफ से ढीला रवैया देखने को मिलता है. यही वजह है कि सरकार को इस पर सख्त कदम उठाना पड़ा.

क्या है टेलीग्राम का क्लाउड आर्किटेक्चर?

टेलीग्राम एक क्लाउड सर्विस है. टेलीग्राम पर जो भी नॉर्मल प्राइवेट चैट, ग्रुप चैट, चैनल्स या पब्लिक ग्रुप होते हैं उनके मैसेज, फोटो और वीडियो हमेशा के लिए टेलीग्राम के सर्वर्स (क्लाउड) पर स्टोर रहते हैं. कंपनी इसे अपनी सबसे बड़ी खूबी बताती है ताकि यूजर किसी भी नए फोन या कंप्यूटर से लॉग इन करे, तो उसे पुराना सारा डेटा तुरंत मिल जाए, बिना निजी बैकअप के. हालांकि, सुरक्षा के लिहाज से यह प्राइवेसी से समझौता है.

टेलीग्राम का दावा है कि उसका डेटा सुरक्षित है और उसकी डिक्रिप्शन कीज (Keys) अलग-अलग डेटा सेंटर्स में बंटी हुई हैं. लेकिन सच यह है कि टेलीग्राम स्टाफ या लीगल अथॉरिटी (जैसे कोर्ट या सरकार) के आदेश पर इन चैट्स को एक्सेस किया जा सकता है, क्योंकि सर्वर-साइड डिक्रिप्शन मुमकिन है.

टेलीग्राम में ‘सीक्रेट चैट्स’ का ऑप्शन जरूर है, जो एंड-टू-एंड एन्क्रिप्टेड होता है और सर्वर पर सेव नहीं होता, लेकिन आम तौर पर लोग नॉर्मल क्लाउड चैट्स का ही इस्तेमाल करते हैं. इसी क्लाउड स्टोरेज पर 2GB तक की बड़ी फाइलें आसानी से शेयर हो जाती हैं, जिसका फायदा उठाकर अपराधी पेपर लीक और पायरेटेड कंटेंट धड़ल्ले से फैलाते हैं. यही वो सबसे बड़ा अंतर है, जिसने टेलीग्राम को बैन की कगार पर खड़ा कर दिया, जबकि वॉट्सऐप अपनी प्राइवेसी-फर्स्ट पॉलिसी की वजह से बचा हुआ है.

वॉट्सऐप पर बैन क्यों नहीं?

अब बात करते हैं वॉट्सऐप की. आपके मन में आ सकता है कि वॉट्सऐप पर भी तो फेक न्यूज और गलत चीजें शेयर होती हैं, तो सरकार उसे बैन क्यों नहीं करती? दरअसल, सरकार वॉट्सऐप पर भी ट्रेसेबिलिटी (मैसेज किसने शुरू किया) और सिम लिंकिंग जैसे कड़े नियम मानने का दबाव बनाती है. लेकिन वॉट्सऐप का सिस्टम पूरी तरह अलग है.

वॉट्सऐप में एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन (E2EE) बाय-डिफॉल्ट होता है. इसका मतलब है कि जो मैसेज आपने भेजा, उसे सिर्फ पाने वाला ही पढ़ सकता है. वॉट्सऐप के खुद के सर्वर पर यह मैसेज सिर्फ कुछ समय के लिए ही रहता है और डिलीवर होते ही डिलीट हो जाता है. वॉट्सऐप का कोई अपना क्लाउड स्टोरेज नहीं होता, सारा डेटा आपके फोन के लोकल स्टोरेज में रहता है. ऐसे में वॉट्सऐप के लिए भी किसी का कंटेंट एक्सेस करना मुमकिन नहीं होता.

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Malkhan Singh

मलखान सिंह पिछले 17 वर्षों से ख़बरों और कॉन्टेंट की दुनिया में हैं. प्रिंट मीडिया से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई नामी संस्थानों का नाम प्रोफाइल में जुड़ा है. लगभग 4 साल से News18Hindi के साथ काम कर रहे …और पढ़ें



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Nemish Agrawal
Nemish Agrawalhttps://tv1indianews.in
Tv Journalist • Editor • Writer Digital Creator • Photographer Travel Vlogger • Web-App Developer IT Cell • Social Worker

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