पहाड़ों पर चढ़ते ही कान क्यों बंद हो जाते हैं? घूमने जाएं तो जरूर बैग में रखें ये चीजें, ट्रेकिंग में मिलेगी राहत


पहाड़ों की यात्रा अपने आप में एक शानदार अनुभव होती है. ठंडी हवा, खूबसूरत घाटियां और बादलों के बीच सफर हर किसी को पसंद आता है. लेकिन कई लोगों के साथ एक अजीब समस्या भी होती है. जैसे-जैसे गाड़ी ऊंचाई की ओर बढ़ती है, कान बंद होने लगते हैं, आवाजें धीमी सुनाई देने लगती हैं या कानों में दबाव महसूस होता है. कई बार ऐसा लगता है जैसे किसी ने कान के अंदर रुई भर दी हो.

अच्छी बात यह है कि ज्यादातर मामलों में यह कोई गंभीर समस्या नहीं होती. इसका संबंध हमारे कान की बनावट और बदलते वायुदाब (Air Pressure) से होता है. यही वजह है कि पहाड़ों के अलावा हवाई जहाज के टेकऑफ और लैंडिंग के दौरान भी कई लोगों को ऐसी ही परेशानी महसूस होती है.

कान बंद होने के पीछे क्या है वैज्ञानिक कारण?
हमारे कान के बीच वाले हिस्से (Middle Ear) में हवा भरी रहती है. इस हिस्से का दबाव बाहर के वातावरण के बराबर बनाए रखने का काम यूस्टेशियन ट्यूब (Eustachian Tube) करती है. यह एक पतली नली होती है, जो कान को गले के पिछले हिस्से से जोड़ती है.

जब आप पहाड़ पर तेजी से ऊपर चढ़ते हैं, तो वातावरण का वायुदाब तेजी से कम होने लगता है. लेकिन कान के अंदर का दबाव तुरंत नहीं बदलता. बाहर और अंदर के दबाव में अंतर आने पर कान के पर्दे (Eardrum) पर खिंचाव पड़ता है. इसी कारण कान बंद होने, हल्का दर्द, आवाज कम सुनाई देने या “पॉप” जैसी आवाज महसूस होने लगती है.

कुछ लोगों को ज्यादा परेशानी क्यों होती है?
अगर किसी व्यक्ति को सर्दी, एलर्जी, साइनस इंफेक्शन या नाक बंद रहने की समस्या है, तो यूस्टेशियन ट्यूब ठीक से काम नहीं कर पाती. ऐसे में कान के अंदर और बाहर का दबाव जल्दी बराबर नहीं हो पाता और परेशानी ज्यादा महसूस हो सकती है. छोटे बच्चों में यह समस्या अपेक्षाकृत अधिक होती है, क्योंकि उनकी यूस्टेशियन ट्यूब वयस्कों की तुलना में छोटी और संकरी होती है.

क्या यह खतरनाक है?
अधिकांश मामलों में नहीं. जैसे ही शरीर बाहरी दबाव के अनुसार खुद को ढाल लेता है, कान सामान्य हो जाते हैं. हालांकि अगर तेज दर्द, चक्कर, कान से खून आना, सुनाई देना लगातार कम होना या कई घंटों तक परेशानी बनी रहे, तो ईएनटी विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी है.

यात्रा के दौरान राहत पाने के आसान तरीके
अगर म तो बार-बार निगलने (Swallowing), जम्हाई लेने (Yawning) या च्युइंग गम चबाने से राहत मिल सकती है. ये क्रियाएं यूस्टेशियन ट्यूब को खोलने में मदद करती हैं, जिससे कान के अंदर और बाहर का दबाव बराबर होने लगता है. आप धीरे-धीरे मुंह बंद करके नाक को हल्के से दबाएं और बहुत हल्के दबाव से सांस बाहर निकालने की कोशिश करें. इसे Valsalva Maneuver कहा जाता है. हालांकि इसे बहुत जोर से नहीं करना चाहिए. अगर आपको सर्दी या नाक बंद है, तो लंबी पहाड़ी यात्रा से पहले डॉक्टर की सलाह लेना बेहतर रहता है.



Source link

Latest articles

spot_imgspot_img

Related articles

Leave a reply

Please enter your comment!
Please enter your name here

spot_imgspot_img