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राजनीति में उनकी एंट्री 2023 की शुरुआत में हुई. वे राष्ट्रपति की रेस में चौथे स्थान पर रहे, इसके बाद उन्होंने तुरंत डोनाल्ड ट्रंप को अपना समर्थन दिया. उनकी राजनीति का केंद्र सरकारी खर्चों में कटौती, ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता और शिक्षा में सुधार जैसे वादों के साथ है.
Vivek Ramaswamy (Reuters)
भारतीय मूल के उद्यमी और रिपब्लिकन नेता विवेक रामास्वामी ने पार्टी के प्राइमरी चुनाव में जीत हासिल की है. इसके बाद वे ओहियो के गवर्नर पद के लिए जीओपी के उम्मीदवार के रूप में उभरे हैं. नवंबर में होने वाले गवर्नर चुनाव में वे अब रिपब्लिकन पार्टी की तरफ गवर्नर पद के लिए उम्मीदवार होंगे. उनका मुकाबल रिपब्लिकन एम एक्टन से होगा.
प्राइमरी में अपनी जीत के बाद रामास्वामी ने कहा, “हम ओहियो में एक बार फिर उस अमेरिकी सपने को पुनर्जीवित करने जा रहे हैं. ओहियो में रहने वाले को कम लागत, बड़े वेतन और बेहतर स्कूलों के साथ करेंगे. मैं उन सभी का आभारी हूँ जिन्होंने आज के चुनाव में ऐतिहासिक अंतर से जीतने में हमारी मदद की मैं नवंबर में फिर से एक निर्णायक जीत का इंतजार कर रहा हूँ.”
हार्वर्ड से हुई थी शुरूआत
विवेक रामास्वामी की कहानी हार्वर्ड और येल जैसे बड़े संस्थानों से शुरू होती है. यहाँ से उन्होंने जीव विज्ञान और कानून की पढ़ाई की . लेकिन उनकी असली पहचान तब बनी जब 2014 में उन्होंने ‘रोइवेंट साइंसेज’ नाम की बायोटेक कंपनी खड़ी की. इस कंपनी ने उन्हें न केवल अपार दौलत दी, बल्कि एक सफल उद्यमी भी बनाया. साल 2026 तक उनकी संपत्ति 2.5 बिलियन डॉलर तक पहुँच गई. इसने आगे चलकर उनके राजनीतिक सपनों के लिए एक मजबूत नींव का काम किया.
व्यापार की दुनिया में सफल होने के बाद रामास्वामी ने समाज की वैचारिक दिशा पर सवाल उठाना शुरू किया. 2021 में उनकी किताब ‘वोक, इंक.’ ने तहलका मचा दिया. इसमें उन्होंने बड़े कॉर्पोरेशन की और किये जा रहे सामाजिक न्याय के नाम पर दिखावे की कड़ी आलोचना की. उन्होंने ‘स्ट्राइव एसेट मैनेजमेंट’ जैसी कंपनी बनाकर निवेश की दुनिया में एक वैकल्पिक रास्ता दिखाया. वहाँ राजनीति के बजाय केवल योग्यता और प्रदर्शन को महत्व दिया गया. धीरे-धीरे टीवी और पॉडकास्ट के जरिए वे राष्ट्रवादी और रूढ़िवादी आवाज बनकर उभरे.
2023 में राजनीति में एंट्री
राजनीति में उनकी एंट्री 2023 की शुरुआत में हुई. उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति पद के लिए अपनी दावेदारी ठोक दी. हालांकि शुरुआत में उन्हें एक मजबूत उम्मीदवार नहीं माना गया, लेकिन चुनावी बहसों में उनकी आक्रामक शैली लोगों को पसंद आई. ‘TRUTH’ प्लेटफॉर्म ने उन्हें कुछ दिनों में ही फेम दिला दी. हालांकि वे राष्ट्रपति की रेस में चौथे स्थान पर रहे, इसके बाद उन्होंने तुरंत डोनाल्ड ट्रंप को अपना समर्थन दिया. वे उनके सबसे भरोसेमंद साथियों में शामिल हो गए.
ट्रंप की जीत के बाद रामास्वामी को एलन मस्क के साथ मिलकर सरकारी दक्षता विभाग की कमान सौंपी गई. लेकिन यह सफर छोटा रहा, क्योंकि उनके मन में ओहियो में राजनीति करने का था. साल 2025 की शुरुआत में उन्होंने इस पद से इस्तीफा देकर ओहियो के गवर्नर पद की दौड़ में शामिल होने का फैसला किया. डोनाल्ड ट्रंप और उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के मजबूत समर्थन ने उनकी राह आसान कर दी. वे आसानी से रिपब्लिकन पार्टी के आधिकारिक उम्मीदवार बन गए.
3 नवंबर को हैं चुनाव
उनकी राजनीति का केंद्र सरकारी खर्चों में कटौती, ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता और शिक्षा में सुधार जैसे वादों के साथ है. वे अब 3 नवंबर 2026 को होने वाले आम चुनाव में अपनी आखिरी और सबसे बड़ी राजनीतिक परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं.
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