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Iran War US Impact: जिस सुपरपावर अमेरिका का नाम सुनते ही दुनिया थर्रा उठती थी, उसे डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों ने कागजी शेर जैसा बना दिया है. पहले तो टैरिफ की धमकियां और फिर युद्ध का शौक- यही वो चीजें हैं, जो अमेरिका की राउडी इमेज को डेंट लगा रही हैं. इस पर भी ईरान ने जिस तरह हाल में ट्रंप को धोया है, उस नुकसान की भरपाई में अमेरिका को सालों लग जाएंगे.
ट्रंप की नीतियों से बर्बाद हुई अमेरिका की इज्जत. (Image-Reuters)
How Trump Policy Impacted US Global Image: जब डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका की सत्ता दूसरी बार संभाली थी, तो उनकी बातें कुछ ऐसी थीं कि वो अपने देश को महानता के एक दूसरे दौर में पहुंचा देंगे. उन्होंने अपने पहले के राष्ट्रपतियों को भरपूर सुनाया और कहा कि अब बनेगा – ग्रेट अमेरिका. हालांकि उनके दावे और फिलहाल अमेरिका की इमेज, दोनों काफी विपरीत हो चुके हैं. सुपरपावर वाली हेकड़ी आज पूरी दुनिया के सामने धूल चाट रही है. ईरान युद्ध शुरू हुए कुछ महीने ही बीते हैं, लेकिन अमेरिका की साख, अर्थव्यवस्था और ट्रंप की लोकप्रियता को भारी नुकसान पहुंचा है.
दुनिया का सबसे ताकतवर देश अब युद्ध से बाहर निकलने के लिए छटपटा रहा है, फिर भी खुद को मजबूत दिखाने के लिए बमबारी की धमकी दे रहा है. ट्रंप की प्रोजेक्ट फ्रीडम जैसी बड़ी घोषणाएं शुरू हुईं और कुछ दिनों में ही पाकिस्तान के अनुरोध पर रुक गईं. युद्ध के बाद अमेरिका में राष्ट्रपति ट्रंप की लोकप्रियता रिकॉर्ड गिरावट पर पहुंच गई है. अमेरिका को दुनिया में सबसे बेहतर और मजबूत बनाने का वादा देकर आए ट्रंप फिलहाल तो इसे कमजोर ही बनाते हुए दिख रहे हैं.
ट्रंप की लोकप्रियता घटती ही गई
रॉयटर्स, मारक्वेट, वॉशिंगटन पोस्ट जैसे सर्वे बताते हैं कि जो ट्रंप चुनाव के वक्त इतने पॉपुलर थे, अब उनकी स्वीकार्यता की दर 34-37% तक गिर गई है, जबकि अस्वीकृति 60-62% तक पहुंच गई. ईरान युद्ध को लेकर 54-61% अमेरिकियों ने नापसंदगी जताई. आम अमेरिकी नागरिक महंगाई और बढ़ते पेट्रोल-डीजल के दामों से त्रस्त हैं. युद्ध से पहले पेट्रोल की कीमतें सामान्य थीं, अब वे 34-50% तक बढ़ चुकी हैं. इससे आम आदमी की जेब पर बोझ बढ़ा है और ट्रंप सरकार की आलोचना तेज हुई है.
डोनाल्ड ट्रंप.
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उड़ रही खिल्ली
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अमेरिका की इमेज बुरी तरह प्रभावित हुई है. दुनिया के कई देश अब अमेरिका पर हंस रहे हैं. खासतौर पर जिन देशों को डोनाल्ड ट्रंप सिर्फ डर और धमकियों के बल पर दबा रहे थे, अब वे कहीं न कहीं इस खौफ से बाहर आते जा रहे हैं. कनाडा, क्यूबा, मेक्सिको अब खुलकर उनके खिलाफ बोल रहे हैं. ग्रीनलैंड पर कब्जे वाले मामले के बाद नाटो में भी अमेरिका की पकड़ कमजोर हुई, जो ईरान युद्ध के बाद पूरी तरह से बिखर गया है. नाटो को अमेरिका अपना गुलाम मानता था, लेकिन जब से यूरोपीय देशों ने अपना स्टैंड अलग किया है, तब से अमेरिका का ये साथ भी छूट गया.
नाटो चीफ से मिलते डोनाल्ड ट्रंप.
तमाशा बन गया स्ट्रेट ऑफ होर्मुज
स्ट्रेट ऑफ हार्मुज को खोलने के लिए शुरू किया गया प्रोजेक्ट फ्रीडम ईरानी हमलों के बाद ठप पड़ गया. ट्रंप ने पहले इसे बड़ी जीत बताया लेकिन कुछ जहाज निकल पाने के बाद ही पीछे हट गए. ईरान ने ब्लॉकेड का जवाब देते हुए अमेरिकी हितों को नुकसान पहुंचाया, जिससे वैश्विक ऊर्जा संकट गहराया. अर्थव्यवस्था पर असर गहरा पड़ा और तेल की कीमतें बढ़ने से अमेरिका में मुद्रास्फीति बढ़ी, शेयर बाजार अस्थिर हुए और कई कंपनियां घाटे में चली गईं. युद्ध की कुल लागत अरबों डॉलर में पहुंच चुकी है. विशेषज्ञों का कहना है कि युद्ध ने अमेरिका की वैश्विक विश्वसनीयता को चोट पहुंचाई है.
ट्रंप की सनक से अमेरिका को क्या मिला?
पूर्व सहयोगी देश भी अब अमेरिका की नीतियों पर सवाल उठा रहे हैं. चीन जैसे देश इस स्थिति का फायदा उठाते दिख रहे हैं. ट्रंप पहले हम ईरान को पूरी तरह तबाह कर देंगे जैसी बातें करते थे, लेकिन अब पाकिस्तान और अन्य देशों का नाम लेकर युद्धविराम और बातचीत की अपील कर रहे हैं. एक तरफ वे बहुत तेज बमबारी की धमकी दे रहे हैं, दूसरी तरफ डील के लिए मिन्नतें कर रहे हैं. यह दोहरी नीति अमेरिका को और बदनाम कर रही है. आज हालत यह है कि ट्रंप प्रशासन युद्ध समाप्त करने के लिए 14 पॉइंट समझौते की बात कर रहा है, जिसमें प्रतिबंध हटाने और फंड छोड़ने जैसे प्रस्ताव शामिल हैं. ईरान ने सुपरपावर को इतना झुकाया कि अब ट्रंप डील हो रही है कहकर अपनी छवि बचाने की कोशिश कर रहे हैं. ट्रंप के लिए यह युद्ध व्यक्तिगत जीत साबित होने के बजाय अमेरिका के लिए भारी पड़ा. हेकड़ी गुम हो गई, प्रतिष्ठा धूमिल हुई और अर्थव्यवस्था लड़खड़ा गई. सवाल अब यह है कि ट्रंप की इस महान रणनीति का आखिर अमेरिका को क्या मिला सिवाय बढ़ती महंगाई, गिरती लोकप्रियता और दुनिया भर में बदनामी के?
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News18 में इंटरनेशनल डेस्क पर कार्यरत हैं. टीवी पत्रकारिता का भी अनुभव है और इससे पहले Zee Media Ltd. में कार्य किया. डिजिटल वीडियो प्रोडक्शन की जानकारी है. टीवी पत्रकारिता के दौरान कला-साहित्य के साथ-साथ अंतरर…और पढ़ें





