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Iran America Economic Warfare: अमेरिका, सेना के दम पर ईरान को नहीं हरा पाया और बैकफुट पर आ गया. अब डोनाल्ड ट्रंप ने आर्थिक युद्ध के लिए कमर कस ली है. ट्रंप ने हाल में ईरान और उसका सपोर्ट करने वाले देशों को आर्थिक संकट झेलने के लिए तैयार रहने को कहा है. इस पर ईरान के सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव मोहसिन रेजाई ने भी अमेरिका और उसका साथ देने वाले देशों को चेतावनी दी है.
ईरान और अमेरिका के बीच आर्थिक युद्ध.
ईरान और अमेरिका युद्ध को 8 महीने से ज्यादा हो गए हैं. इसका असर पूरी दुनिया पर देखने को मिल रहा है. ईरान डटकर अमेरिका का सामना कर रहा है. हार नहीं मानी है. अमेरिका, ईरान को सैन्य युद्ध के आधार पर हरा नहीं पाया है. इतना ही नहीं, अमेरिका को अपने युद्धपोत यूएसएस अब्राहम लिंकन को भी वापस बुलाना पड़ा है. सैन्य स्तर पर अमेरिका, ईरान को हरा नहीं पाया. अब आर्थिक युद्ध करने की और बढ़ गया है. इस आर्थिक युद्ध को लेकर ईरान के सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव मोहसिन रेजाई ने अमेरिका और उसका साथ देने वाले देशों को चेतावनी दी है.
मोहसिन रेजाई ने चेतावनी दी है कि जो भी देश ईरान के खिलाफ अमेरिका की आर्थिक लड़ाई में शामिल होगा, उसे ईरान अपना ‘दुश्मन’ मानेगा. मोहसिन रेजाई ने ये बयान अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की धमकी के बाद दिया है. डोनाल्ड ट्रंप ने हाल में कहा था ईरान का साथ देने वाले देशों को अबतक का सबसे कठोर आर्थिक युद्ध का सामना करना पड़ेगा. ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ’ पर लिखा था, “यह सबेस खतरनाक लेवेल का आर्थिक युद्ध और अलगाव होगा.”
क्या होता है आर्थिक युद्ध (Economic Warfare)
अब देशों के बीच सैन्य युद्ध के अलावा आसान तरीका आर्थिक रूप से क्षति पहुंचाना है. जब दो या दो से ज्याद देश आपस में बिना बंदूक, मिसाइल या टैंक चलाए एक-दूसरे की अर्थव्यवस्था पर हमला करते हैं, तो इसे आर्थिक युद्ध कहते हैं. इसका सीधा मकसद विरोधी देश की वित्तीय व्यवस्था को कमजोर करना, उसकी मुद्रा (currency) की वैल्यू गिराना और उसे दुनिया से अलग-थलग कर देना होता है ताकि वह घुटने टेकने पर मजबूर हो जाए. उदाहरण के तौर पर हाल में जैसे यूक्रेन ने रूस की सबसे बड़ी ऑनलाइन मार्केटिंग कंपनी वाइल्डबेरी के गोदामों और ऑफिस पर हमले किए, जिससे उसकी अर्थव्यवस्था कमजोर हो जाए.
आर्थिक युद्ध के प्रमुख हथियार
आर्थिक युद्ध में सैन्य हथियारों की जगह वित्तीय साधनों का उपयोग किया जाता है:
- आर्थिक प्रतिबंध: विरोधी देश के साथ व्यापार, आयात और निर्यात पर पूरी तरह या आंशिक रूप से रोक लगा देना.
- संपत्ति फ्रीज करना (Asset Freezing): विदेशी बैंकों में जमा उस देश के सरकारी और व्यक्तिगत पैसों को ब्लॉक कर देना.
- वित्तीय प्रणाली से बाहर करना: अंतरराष्ट्रीय बैंकिंग नेटवर्क जैसे SWIFT से उस देश को बाहर करना, जिससे वह वैश्विक लेनदेन न कर सके.
- टैरिफ और सीमा शुल्क: उस देश से आने वाले सामानों पर इतना भारी टैक्स लगा देना कि उसकी बिक्री ही बंद हो जाए. जैसे अमेरिका ने बीते साल कई देशों पर लगाया.
- सेकेंडरी प्रतिबंध (Secondary Sanctions): जो देश या कंपनी पीड़ित देश के साथ व्यापार करेगी, उस पर भी प्रतिबंध लगाने की धमकी देना. जैसे डोनाल्ड ट्रंप ने बिना नाम लिए ईरान का साथ देने वाले देशों को धमकी दी.
ईरान और अमेरिका के बीच आर्थिक युद्ध
अमेरिका, ईरान को सैन्य रूप से पीछे धकेलने में असफल रहा है. अब अमेरिका आर्थिक घेराबंदी की रणनीति अपना रहा हैः
- ट्रंप की चेतावनी: अमेरिकी रणनीति का मुख्य हिस्सा ईरान के तेल और गैस व्यापार को पूरी तरह शून्य पर लाना और उसे वैश्विक बैंकिंग प्रणाली से काट देना है.
- सेकेंडरी प्रतिबंधों का डर: अमेरिका का यह रुख मुख्य रूप से भारत, चीन और रूस जैसे देशों को प्रभावित करता है जो ईरान से एनर्जी रिसोर्सेज यानी तेल और गैस खरीदते हैं.
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रमेश कुमार, सितंबर 2021 से बतौर सीनियर सब एडिटर न्यूज18 हिंदी डिजिटल से जुड़े हैं. एक्सप्लेनर/नॉलेज डेस्क पर काम कर रहे हैं. समय-समय पर विधानसभा-लोकसभा चुनाव पर …
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