US aircraft carrier locations: ईरान जंग के बीच यूएसएस गेराल्ड तो लौटा, अभी भी चक्रव्यूह बनाकर बैठे 3 न्यूक्लियर वॉरशिप


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ईरान के खिलाफ जंग के बीच अमेरिका ने अपने सबसे बड़े सुपरकैरियर ‘यूएसएस गेराल्ड आर. फोर्ड’ को वतन वापस बुला लिया है. हालांकि, इस वापसी से ईरान पर मंडरा रहा खतरा टला नहीं है. पेंटागन ने ईरान की रीढ़ तोड़ने के लिए समुद्र में 20 से अधिक लड़ाकू जहाजों का जो चक्रव्यूह रचा है, उसमें अमेरिकी नेवी के तीन अन्य महाविनाशक न्यूक्लियर वॉरशिप अभी भी पूरी तरह मुस्तैद हैं.

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अमेर‍िका के अभी भी तीन एयरक्रॉफ्ट कैर‍ियर समंदर में चक्रव्‍यूह बनाकर बेठे हुए हैं.

ईरान जंग के बीच बड़ी हलचल है. अमेर‍िका एक ओर ईरान को धमका रहा है, दूसरी ओर उसने अपना सुपरकैरियर यूएसएस गेराल्ड आर. फोर्ड वापस बुला ल‍िया है. लेकिन ईरान की घेराबंदी रत्ती भर भी कम नहीं हुई है. ‘द वॉर जोन’ के ताजा वीकली कैरियर ट्रैकर और ओपन-सोर्स इंटेलिजेंस रिपोर्ट के मुताबिक, अभी भी अमेर‍िका के 3 न्यूक्लियर वॉरशिप अभी भी चक्रव्यूह बनाकर मिड‍िल ईस्‍ट में बैठे हैं.

पेंटागन ने ईरान को चारों तरफ से घेरने के लिए 20 से अधिक युद्धपोतों का जो चक्रव्यूह रचा है, उसमें अभी भी अमेरिकी नेवी की रीढ़ माने जाने वाले तीन अन्य न्‍यूक्‍ल‍ियर एयरक्रॉफ्ट कैर‍ियर पूरी तरह एक्टिव मोड में हैं. लेकिन बाकी के तीन न्यूक्लियर वॉरशिप इस समय कहां तैनात हैं?

  1. यूएसएस जॉर्ज वाशिंगटन – लोकेशन: वेस्टपैक
    यह अमेरिकी नेवी का इकलौता ऐसा एयरक्रॉफ्ट कैर‍ियर है जो परमानेंट तौर पर विदेशों में तैनात रहता है. पिछले हफ्ते इसके मेंटेनेंस में होने की अफवाहें थीं, लेकिन जॉर्ज वाशिंगटन के प्रवक्ता ने ‘TWZ’ को पुष्टि की है कि जहाज पूरी तरह ऑपरेशनल है और अपनी जरूरी मरम्मत और परीक्षण पूरे कर चुका है. यह इस समय जापान के योकोसुका के पास वेस्टपैक यानी पश्चिमी प्रशांत क्षेत्र में अपनी अगली बड़ी गश्त के लिए पूरी तरह तैयार खड़ा है.
  2. यूएसएस ड्वाइट डी. आइजनहावर- लोकेशन: नॉरफॉक वर्जीनिया
    आइजनहावर अपनी भविष्य की तैनाती से पहले ट्रेनिंग और युद्धाभ्यास के अंतिम चरणों को पूरा कर चुका है. यह जहाज शॉर्ट नोटिस पर मिडिल ईस्ट में अमेरिकी बेड़े को जॉइन करने के लिए बिल्कुल तैयार स्थिति में है.
  3. यूएसएस थियोडोर रूजवेल्ट- लोकेशन: सैन डिएगो कैलिफोर्निया
    सैन डिएगो पोर्ट पर अपनी युद्धक तैयारियों और रिफ्रेशर ट्रेनिंग को पूरा करने के बाद रूजवेल्ट भी पूरी तरह तैयार है. यह प्रशांत महासागर के रास्ते किसी भी समय मिडिल ईस्ट या हिंद-प्रशांत क्षेत्र में अमेरिकी हितों की रक्षा के लिए कूच कर सकता है.

मिडिल ईस्ट में 20 से अधिक युद्धपोतों की नाकेबंदी

‘द वॉर जोन’ की र‍िपोर्ट के मुताबिक, पेंटागन की इस रणनीति का सबसे खतरनाक हिस्सा यह है कि इस समय अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अधिकार क्षेत्र में दो कैरियर स्ट्राइक ग्रुप और एक एम्फीबियस रेडी ग्रुप पहले से ही मौजूद हैं.
  • 20 से ज्यादा खतरनाक वॉरशिप: ईरान की आर्थिक और सैन्य रीढ़ तोड़ने के लिए मिडिल ईस्ट के समुद्र में अमेरिका के 20 से अधिक अत्याधुनिक युद्धपोत लगातार गश्त कर रहे हैं और वहां कड़ी सैन्य नाकेबंदी लागू किए हुए हैं.
  • यूएसएस बॉक्सर की मौजूदगी: इन 20 जहाजों के अलावा, यूएसएस बॉक्सर के नेतृत्व में एक और एम्फीबियस रेडी ग्रुप हिंद महासागर में बिल्कुल करीब ही मौजूद है. हालांकि यह वर्तमान में इंडो-पैसिफिक कमांड के तहत काम कर रहा है, लेकिन सैन्य विश्लेषकों का कहना है कि ईरान के साथ तनाव बढ़ते ही यह ग्रुप चंद घंटों के भीतर सेंटकॉम के युद्ध क्षेत्र में प्रवेश कर सकता है.

सेंटकॉम का बड़ा दावा
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) द्वारा जारी ताजा प्रेस रिलीज के अनुसार, इस कड़े समुद्री चक्रव्यूह के चलते अमेरिकी सेना ने अब तक ईरान की नाकेबंदी तोड़ने की कोशिश कर रहे 81 कमर्शियल जहाजों के रास्तों को बदला है, जबकि नाकेबंदी का उल्लंघन करने का प्रयास कर रहे 4 जहाजों को पूरी तरह से निष्क्रिय कर दिया है.

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Gyanendra Mishra

Mr. Gyanendra Kumar Mishra is associated with hindi.news18.com. working on home page. He has 20 yrs of rich experience in journalism. He Started his career with Amar Ujala then worked for ‘Hindustan Times Group…और पढ़ें



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