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America Iran Jung: ईरान के साथ जारी युद्ध के बीच अमेरिका के भीतर दबाव बढ़ता दिख रहा है. अमेरिकी सेना के टॉप कमांडर ने व्हाइट हाउस को मौजूदा बमबारी अभियान रोकने की सलाह दी है. दूसरी ओर एक सर्वे में अधिकांश अमेरिकी इस युद्ध को उम्मीद से ज्यादा मुश्किल मान रहे हैं और इसे खत्म करने के पक्ष में हैं.
ईरान से लड़कर फंसा अमेरिका.
Iran-US War News: ईरान और अमेरिका का महीनों से चल रहा युद्ध अब सिर्फ पश्चिम एशिया का संघर्ष नहीं रह गया है. इसके असर अमेरिका के अंदर भी साफ दिखाई देने लगे हैं. एक तरफ अमेरिकी सेना के सबसे वरिष्ठ कमांडरों में शामिल एडमिरल ब्रैड कूपर ने ईरान पर हमले बंद करने का सुझाव दिया, तो दूसरी ओर अमेरिकी जनता का बड़ा वर्ग भी इस युद्ध से परेशान नजर आ रहा है. इसी बीच पेंटागन सैनिकों के हताहतों के आंकड़ों में बदलाव और नई श्रेणी जोड़ने को लेकर घिर गया है. सबसे बड़ी बात यह कि लगातार अमेरिका के हथियारों की संख्यागिर रही है. थाड और पैट्रियट जैसी मिसाइलें कम हो रही हैं.
जनरल ने युद्ध से पीछे हटने को कहा
जुलाई की शुरुआत में अमेरिका ने 13 दिनों तक लगातार ईरान पर हमला किया. शनिवार को अमेरिका ने अचानक अपना हमला रोक दिया. पहले खबर आई थी कि ट्रंप के कहने पर हमला रोका गया है. लेकिन अब अमेरिकी मीडिया एक्सियोस की रिपोर्ट से कुछ और ही पता चल रहा है. रिपोर्ट के मुताबिक, सेंटकॉम (CENTCOM) प्रमुख एडमिरल ब्रैड कूपर ने पेंटागन और व्हाइट हाउस को बताया कि दो सप्ताह की लगातार कार्रवाई के बाद ईरान के ज्यादातर तय सैन्य लक्ष्य पहले ही निशाना बनाए जा चुके हैं. उनका आकलन था कि अगर अमेरिका दोबारा बड़े पैमाने पर युद्ध शुरू नहीं करना चाहता, तो हर रोज हवाई हमले करने से कोई खास सैन्य लाभ नहीं मिलने वाला. बताया गया है कि इस सलाह का असर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस फैसले पर भी पड़ा, जिसमें उन्होंने होर्मुज क्षेत्र में हमलों को रोकने का आदेश दिया. इसी दौरान जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के चेयरमैन जनरल डैन केन ने भी निजी तौर पर प्रशासन को आगाह किया कि एयर डिफेंस इंटरसेप्टर की कमी भविष्य में अमेरिकी सैनिकों और सहयोगी देशों की सुरक्षा को प्रभावित कर सकती है.
अमेरिकी जनता भी युद्ध से थकी
युद्ध के पांचवें महीने में आए CBS News/YouGov सर्वे ने भी ट्रंप प्रशासन की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. सर्वे में शामिल तीन-चौथाई से ज्यादा लोगों का मानना है कि यह युद्ध अमेरिका की उम्मीद से कहीं ज्यादा कठिन साबित हुआ है. सर्वे में जिन लोगों से सवाल किया गया उनमें से करीब दो-तिहाई ने कहा कि अब अमेरिका को यह संघर्ष खत्म कर देना चाहिए, जबकि सिर्फ एक-तिहाई लोगों ने युद्ध जारी रखने का समर्थन किया. युद्ध का असर आम अमेरिकी नागरिकों पर भी दिखाई दे रहा है. होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव के कारण तेल की कीमतों में तेजी आई है और अमेरिका में पेट्रोल की कीमतें भी बढ़ गई हैं.
पेंटागन के आंकड़ों पर उठे सवाल?
इसी बीच अमेरिकी रक्षा विभाग पेंटागन भी पारदर्शिता को लेकर सवालों में घिर गया है. उसके डिफेंस कैजुअल्टी एनालिसिस सिस्टम (DCAS) में पहले सैनिकों के हताहतों की संख्या कम दिखाई दी, लेकिन बाद में रिकॉर्ड अपडेट करते हुए 140 से ज्यादा अतिरिक्त घायल सैनिकों को लिस्ट में जोड़ दिया गया. इसके साथ ही ‘ओवरसीज ऑपरेशंस’ नाम से एक नई कैटेगरी भी जोड़ दी गई, जिसने नए सवाल खड़े कर दिए. इन बदलावों के बाद अमेरिकी सीनेट की सशस्त्र सेवा समिति के डेमोक्रेट सांसदों ने रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ से स्पष्टीकरण मांगा.
पेंटागन ने कहा कि आंकड़ों में बदलाव वेबसाइट पर आई अस्थायी तकनीकी गड़बड़ी की वजह से हुआ, हालांकि नई कैटेगरी और रिकॉर्ड में हुए बदलावों को लेकर उठे कई सवालों का विस्तृत जवाब अब तक सार्वजनिक नहीं किया गया है. इन घटनाओं ने ईरान युद्ध को लेकर अमेरिका के अंदर तीन बड़े मोर्चों पर दबाव की तस्वीर सामने रख दी है.
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Yogendra Mishra holds a degree in Journalism from the University of Allahabad. He has been actively associated with the media industry since 2017 and brings extensive experience across various domains of journa…
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