गर्मी में एसी जैसी ठंडक देगा ये नया पर्पल फैब्रिक, सफेद सूती कपड़ों से ज्यादा असरदार, नहीं आएगा जरा भी पसीना


मेटल-ऑर्गेनिक फ्रेमवर्क सूरज से मिलने वाली हरी रोशनी को एब्जॉर्ब करता है. इससे कपड़े को उसका पर्पल रंग मिलता है. वहीं जिंक ऑक्साइड नैनोपार्टिकल्स सूरज की रोशनी को रिफ्लेक्ट करने का काम करते हैं. ये पार्टिकल्स गर्मी को शरीर से दूर धकेल देते हैं.

टेस्टिंग के दौरान इस मटेरियल ने कमाल का परफॉरमेंस दिया. इसने सूरज की लगभग 88 प्रतिशत रोशनी को रिफ्लेक्ट कर दिया. यह बाहर की गर्मी में नॉर्मल पर्पल कॉटन के मुकाबले 11 डिग्री फारेनहाइट तक ज्यादा कूल रहा. सबसे खास बात यह रही कि यह सफेद कॉटन से भी 7.6 डिग्री ज्यादा ठंडा था.

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आउटडोर वर्कर्स की जान बचा सकता है यह इनोवेशन

आजकल दुनिया भर में जानलेवा गर्मी आम बात हो गई है. ऐसे में यह रिसर्च एक बड़ी उम्मीद जगाती है. एडिलेड यूनिवर्सिटी के मैटेरियल्स इंजीनियर और इस स्टडी के को-ऑथर जुन मा ने इसके बारे में विस्तार से बताया है. जुन मा ने कहा, ‘हमें हमेशा से कूलिंग परफॉरमेंस और कपड़ों के लुक्स में से किसी एक को चुनना पड़ता था.’

उन्होंने आगे कहा, ‘हमारी रिसर्च दिखाती है कि हम दोनों चीजें एक साथ पा सकते हैं. हम एक ऐसा फैब्रिक बना सकते हैं जो पर्पल दिखता है. लेकिन साथ ही यह सूरज की ज्यादातर एनर्जी को रिफ्लेक्ट भी करता है और गर्मी को बहुत तेजी से बाहर निकालता है.’

इस टीम ने अपनी रिसर्च को मशहूर जर्नल ‘स्मॉल’ में पब्लिश किया है. यह फैब्रिक उन लोगों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है जो दिन भर धूप में काम करते हैं.

चिलचिलाती गर्मी में भी शरीर को ठंडा रखेगा ये जादुई फैब्रिक. (फोटो : एडिलेड यूनिवर्सिटी)

गर्मी में हल्के रंग के कपड़े ही क्यों पहने जाते हैं और पर्पल कलर में ऐसा क्या खास है?

आमतौर पर हल्के रंग के कपड़े कूल रहने के लिए बेहतर ऑप्शन माने जाते हैं. सफेद या बिना रंग वाले मटेरियल गर्मी को मात देने में सबसे आगे होते हैं. वहीं डार्क काले कपड़े सबसे ज्यादा गर्मी खींचते हैं. यही नियम बिल्डिंग और कंस्ट्रक्शन मटेरियल पर भी लागू होता है. इस रिसर्च के लिए पर्पल कलर को चुनना एक बेहद अनोखा फैसला था.

पर्पल कलर डार्क जरूर होता है लेकिन यह सोलर स्पेक्ट्रम के एक बड़े हिस्से को कवर करता है. यह सूरज की हरी रोशनी को बहुत मजबूती से एब्जॉर्ब करता है.

हालांकि सिर्फ रंग ही सब कुछ नहीं होता. कपड़ों का मटेरियल और फिटिंग भी बहुत मायने रखती है. कॉटन या लिनन जैसे ढीले कपड़े शरीर में हवा पास होने देते हैं. इसलिए कपड़े जितने हवादार होंगे आपको उतनी ही कम गर्मी लगेगी. नार्थ अफ्रीका के रेगिस्तान में लोग काले कपड़े पहनते हैं क्योंकि उनका पहनावा ढीला होता है. टाइट कपड़ों में पसीना सूख नहीं पाता है और घुटन महसूस होती है.

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साइंटिस्ट्स ने लेबोरेटरी में इस अनोखे पर्पल कूलिंग फैब्रिक को आखिर कैसे तैयार किया?

दिन भर तेज धूप में रहने के बाद भी यह नया फैब्रिक 7.6 डिग्री ठंडा रहा. इसने 87.6 प्रतिशत सोलर रेडिएशन को रिफ्लेक्ट कर दिया. इन नतीजों ने पूरी टीम को चौंका दिया था. यह फैब्रिक सिर्फ ठंडा ही नहीं बल्कि पहनने में भी काफी आरामदायक साबित हुआ.

क्या बार-बार धोने और धूप में सुखाने से इस नए कूलिंग कपड़े की क्वालिटी खराब हो जाएगी?

इस फैब्रिक की खासियत सिर्फ इसकी कूलिंग क्षमता तक ही सीमित नहीं है. यह मटेरियल बहुत ज्यादा फ्लेक्सिबल और स्ट्रेच-रेसिस्टेंट है. इसमें हवा आसानी से आर-पार हो सकती है जिससे पसीना तेजी से सूख जाता है. यह पसीने को शरीर पर चिपकने नहीं देता. रिसर्च टीम ने इसे 50 बार धोकर भी टेस्ट किया. इतनी बार धुलने के बाद भी इसका रंग और कूलिंग प्रॉपर्टीज बिल्कुल वैसी ही रहीं.

इसके अलावा इसका यूवी एक्सीलरेटेड-एजिंग टेस्ट भी किया गया. यह टेस्ट लगभग 108 दिनों की तेज धूप के बराबर होता है. इस कड़े टेस्ट के बाद भी फैब्रिक की परफॉरमेंस में कोई कमी नहीं आई. यह साबित करता है कि यह कपड़ा लंबे समय तक इस्तेमाल के लिए बिल्कुल परफेक्ट है. कंस्ट्रक्शन साइट पर काम करने वाले मजदूरों या किसानों के लिए यह बहुत फायदेमंद साबित हो सकता है.

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क्या फैशन इंडस्ट्री बदलते मौसम के हिसाब से खुद को ढालने के लिए नई टेक्नोलॉजी अपना रही है?

दुनिया भर में गर्मी अब बर्दाश्त से बाहर होती जा रही है. एडिलेड यूनिवर्सिटी के केमिकल इंजीनियर और को-ऑथर यांगझे होउ ने इसके फ्यूचर के बारे में बात की. यांगझे होउ ने कहा, ‘हमारा लॉन्ग-टर्म गोल इस सोच को बदलना है कि कूलिंग फैब्रिक सिर्फ सफेद ही हो सकते हैं.’ गर्मी के इस नए लेवल के साथ फैशन इंडस्ट्री भी खुद को बदल रही है. न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक लोग अब भारी कपड़ों की जगह हल्के और हवादार कपड़े ज्यादा खरीद रहे हैं.

ऑफिस में भी अब शॉर्ट्स पहनने का कल्चर धीरे-धीरे नॉर्मल हो रहा है. यह नया पर्पल फैब्रिक भी कपड़ों को साइंस की मदद से कूल बनाने की एक कोशिश है. मार्केट में पहले से ही कई कूल-टेक क्लोथिंग ब्रांड्स मौजूद हैं. रैंगलर जैसी कंपनियों ने भी नासा के एस्ट्रोनॉट्स वाली टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करके इंस्टा-कूल शर्ट्स बनाई हैं. आने वाले समय में ऐसे फैब्रिक हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का एक अहम हिस्सा बन जाएंगे.



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Nemish Agrawal
Nemish Agrawalhttps://tv1indianews.in
Tv Journalist • Editor • Writer Digital Creator • Photographer Travel Vlogger • Web-App Developer IT Cell • Social Worker

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