कभी हरी तो कभी गुलाबी दिखने लगती है भारत की यह झील, आखिर क्या है इसके पीछे का विज्ञान?


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भारत में एक ऐसी अनोखी झील मौजूद है, जिसका रंग हमेशा एक जैसा नहीं रहता. कभी इसका पानी हरा दिखाई देता है, तो कभी इसमें गुलाबी रंग की झलक नजर आने लगती है. महाराष्ट्र के बुलढाणा जिले में स्थित लोणार झील (Lonar Lake) अपने बदलते रंग और अनोखी बनावट की वजह से दुनियाभर के वैज्ञानिकों और पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र है. आइए जानते हैं कि आखिर इस झील का रंग क्यों बदलता है और इसके पीछे कौन-सा वैज्ञानिक कारण छिपा है.

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गुलाबी दिखने लगती है भारत की यह झील.

महाराष्ट्र के बुलढाणा जिले में स्थित लोणार झील सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि दुनिया की सबसे अनोखी झीलों में गिनी जाती है. माना जाता है कि करीब 50,000 से 52,000 साल पहले एक विशाल उल्कापिंड (Meteorite) पृथ्वी से टकराया था, जिससे यह गोलाकार क्रेटर बना. बाद में इसमें पानी भर गया और यह झील बन गई. इसका व्यास लगभग 1.8 किलोमीटर है. वैज्ञानिकों के लिए यह झील इसलिए भी खास है क्योंकि यह बेसाल्ट (Basalt) चट्टानों पर बने दुनिया के कुछ चुनिंदा प्रभाव क्रेटरों (Impact Craters) में शामिल है. लेकिन इसकी सबसे दिलचस्प बात यह है कि समय-समय पर इसका रंग बदलता रहता है.

लोणार झील का रंग बदलने के पीछे कई प्राकृतिक और वैज्ञानिक कारण हैं. इस झील का पानी सामान्य मीठे पानी की झीलों जैसा नहीं है. इसमें खारापन (Salinity) और क्षारीयता (Alkalinity) दोनों काफी अधिक हैं. जब मौसम, तापमान और पानी की रासायनिक संरचना में बदलाव आता है, तो झील में मौजूद सूक्ष्म जीव (Microorganisms) और शैवाल (Algae) तेजी से बढ़ने लगते हैं. यही सूक्ष्म जीव पानी के रंग को प्रभावित करते हैं.

गुलाबी रंग क्यों दिखाई देता है?
साल 2020 में लोणार झील का पानी अचानक गुलाबी हो गया था, जिसने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा. वैज्ञानिकों के अनुसार, गर्म मौसम में पानी का स्तर कम होने और खारापन बढ़ने से कुछ विशेष प्रकार के हेलोफिलिक सूक्ष्मजीव (Halophilic Microorganisms) और ड्यूनालिएला (Dunaliella) जैसी सूक्ष्म शैवाल सक्रिय हो जाती हैं. ये जीव प्राकृतिक लाल और गुलाबी रंग के पिगमेंट बनाते हैं, जिसकी वजह से झील का पानी गुलाबी दिखाई देने लगता है. यह एक प्राकृतिक प्रक्रिया है और मौसम बदलने पर पानी फिर अपने सामान्य रंग में लौट सकता है.

कभी हरा क्यों दिखता है पानी?
जब झील में सामान्य मात्रा में शैवाल और अन्य जलीय जीव मौजूद रहते हैं, तब पानी हरे रंग का दिखाई देता है. बारिश के मौसम में झील में पानी बढ़ने और खारापन कम होने के कारण गुलाबी रंग पैदा करने वाले सूक्ष्मजीवों की संख्या घट जाती है. ऐसे में हरे रंग के शैवाल अधिक दिखाई देते हैं और झील का रंग फिर हरा नजर आने लगता है.

वैज्ञानिकों के लिए क्यों है खास?
लोणार झील का अध्ययन भारत के साथ-साथ कई अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक संस्थान भी करते रहे हैं. इसकी अनोखी रासायनिक संरचना, खारे और क्षारीय पानी का मिश्रण तथा उल्कापिंड से बने क्रेटर की वजह से यह पृथ्वी और दूसरे ग्रहों के भूगर्भीय अध्ययन में भी महत्वपूर्ण मानी जाती है. वैज्ञानिकों का मानना है कि यहां की परिस्थितियां कुछ हद तक मंगल ग्रह और चंद्रमा के कुछ हिस्सों से मिलती-जुलती हैं, इसलिए यह रिसर्च के लिहाज से भी बेहद खास है.

प्रकृति का अनोखा करिश्मा
लोणार झील इस बात का बेहतरीन उदाहरण है कि प्रकृति कितनी अद्भुत हो सकती है. मौसम, पानी की रासायनिक संरचना और सूक्ष्म जीवों की गतिविधियों के कारण इसका रंग समय-समय पर बदलता रहता है. यही अनोखी विशेषता इसे भारत के सबसे रहस्यमय और वैज्ञानिक दृष्टि से महत्वपूर्ण प्राकृतिक स्थलों में शामिल करती है.

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Vividha SinghSub Editor

विविधा सिंह इस समय News18 हिंदी के डिजिटल मीडिया में सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं. वह लाइफस्टाइल बीट में हेल्थ, फूड, ट्रैवल, फैशन और टिप्स एंड ट्रिक्स जैसी स्टोरीज कवर करती हैं. कंटेंट लिखने और उसे आसान व …और पढ़ें



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