बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, अगले सप्ताह बाजार की सबसे बड़ी चिंता कच्चे तेल की कीमतें हो सकती हैं। अमेरिका और ईरान के बीच फिर से बढ़े तनाव के बाद इस सप्ताह तेल की कीमतों में लगभग 8 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई। होर्मुज जलडमरूमध्य के जरिए तेल आपूर्ति अभी भी बाधित होने से वैश्विक ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है।
ऊर्जा बाजार में बढ़ते जोखिमों को देखते हुए प्रमुख वैश्विक वित्तीय संस्थान सिटी ने भी अपने अनुमानों में संशोधन किए हैं। संस्था ने तीसरी तिमाही के लिए ब्रेंट क्रूड का औसत मूल्य अनुमान 80 डॉलर प्रति बैरल से बढ़ाकर 86 डॉलर प्रति बैरल कर दिया है, जिसका कारण होर्मुज जलडमरूमध्य के सामान्य संचालन में अपेक्षा से अधिक समय लगने की आशंका है।
विश्लेषकों का कहना है कि तेल की ऊंची कीमतें भारत जैसे आयात-निर्भर देशों के लिए चिंता का विषय हैं, जिससे महंगाई पर दबाव बढ़ सकता है, कंपनियों की लागत में वृद्धि हो सकती है और चालू खाते के घाटे पर भी असर पड़ सकता है। इसलिए निवेशकों की नजर पश्चिम एशिया की स्थिति और तेल आपूर्ति बहाल होने से जुड़े संकेतों पर बनी रहेगी।




