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Stuti Khandwala Success Story: सूरत की स्तुति खंडवाला ने 2019 में नीट, एम्स और जेईई जैसी देश की सबसे कठिन परीक्षाएं एक साथ क्रैक करके इतिहास रचा था. भारत में एमबीबीएस या बीटेक छोड़कर MIT से पढ़ाई करने वाली स्तुति आज येल यूनिवर्सिटी से MD-PhD कर रही हैं. पढ़िए उनकी सक्सेस स्टोरी.
Stuti Khandwala Success Story: स्तुति खंडवाला की पढ़ाई के लिए उनकी मां ने करियर से ब्रेक लिया था
नई दिल्ली (Stuti Khandwala Success Story). जब कोई स्टूडेंट नीट क्रैक करता है तो जश्न मनाया जाता है. कोई जेईई निकाल ले तो उसकी तारीफें होती हैं. लेकिन जरा सोचिए, उस स्टूडेंट का टैलेंट किस लेवल का होगा जिसने एक ही साल में NEET, AIIMS, JIPMER और JEE Main जैसी देश की सबसे मुश्किल परीक्षाएं एक साथ क्लियर कर दी हों! हम बात कर रहे हैं गुजरात के सूरत की रहने वाली स्तुति खंडवाला की, जिन्होंने साल 2019 में अपने शानदार रिजल्ट्स से पूरे देश को हैरान कर दिया था.
इतिहास में छप गया 2019 का रिजल्ट
साल 2019 में स्तुति खंडवाला ने जो कामयाबी हासिल की, वैसी मिसाल कम ही देखने को मिलती है. उन्होंने AIIMS में ऑल इंडिया रैंक 10, नीट यूजी में रैंक 71, JIPMER में रैंक 27 और जेईई मेन परीक्षा में 1086 रैंक हासिल की. इतना ही नहीं, उन्होंने सीबीएसई बोर्ड से 12वीं साइंस स्ट्रीम में 98.8% मार्क्स लाकर राजस्थान में टॉप भी किया था.
बेटी के लिए मां ने त्यागा करियर
स्तुति खंडवाला के पिता डॉ. शीतल खंडवाला पैथोलॉजिस्ट और मां डॉ. हेतल खंडवाला डेंटिस्ट हैं. स्तुति की तैयारी के लिए उनकी मां ने अपनी चलती हुई प्रैक्टिस छोड़ दी और 3 साल तक बेटी के साथ कोटा में रहीं. वहीं उनके पिता हर वीकेंड पर सूरत से कोटा उनसे मिलने आते थे. माता-पिता के इस त्याग और भरोसे को स्तुति ने अपनी मेहनत से सच कर दिखाया.
MIT का सफर और जबरदस्त रिसर्च का मौका
भारतीय कॉलेजों का ऑफर स्वीकार करने के बजाय स्तुति स्कॉलरशिप पर MIT गईं. वहां से 2023 में उन्होंने कंप्यूटर साइंस, इंजीनियरिंग और बायोलॉजिकल इंजीनियरिंग में ग्रेजुएशन पूरा किया. MIT में पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने कोरोना वायरस (SARS-CoV-2) के RNA स्ट्रक्चर, न्यूरल प्रोब फाइबर्स और कैंसर जेनेटिक्स जैसी एडवांस चीजों पर रिसर्च का काम किया.
अब येल से कर रही हैं MD-PhD
MIT से ग्रेजुएट होने के बाद स्तुति खंडवाला ने प्रतिष्ठित व्हाइटहेड इंस्टीट्यूट की लैब्स में CRISPR तकनीक और राइबोसोम पर रिसर्च जारी रखी. फिलहाल वह येल स्कूल ऑफ मेडिसिन से MD-PhD प्रोग्राम कर रही हैं. उनका लक्ष्य मॉलिक्यूलर टूल्स और बायोलॉजिकल रिसर्च के जरिए अल्जाइमर जैसी न्यूरो बीमारियों के इलाज खोजना है, जिससे मरीजों को बेहतर और किफायती इलाज मिल सके.
स्तुति खंडवाला की कहानी साबित करती है कि अगर सही दिशा, परिवार का साथ और मन में कुछ कर गुजरने का जुनून हो तो दुनिया का कोई भी मुकाम हासिल किया जा सकता है.
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Deepali Porwal is a seasoned bilingual journalist with 11 years of experience in the media industry. She currently works with News18 Hindi, focusing on the Education and Career desk. She is kno…
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