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गर्मी के मौसम में AC को 20 या 25 डिग्री पर चलाना बेहतर है? जानिए BEE के अनुसार कौन-सा तापमान ज्यादा बिजली बचाता है, कितना कम होता है बिजली बिल और 1.5 टन AC कितनी यूनिट बिजली खर्च करता है.

20 vs 25 डिग्री AC: तेज़ गर्मी शुरू हो चुकी है. भारत के कई हिस्सों में तापमान काफी बढ़ गया है. ऐसे में घर में कूलर या एसी चलाना लगभग जरूरी हो जाता है. इस दौरान कई घरों में एसी का इस्तेमाल किया जाता है. लोगों को लगता है कि एसी को सबसे कम तापमान पर रखने से ज्यादा ठंडक मिलती है. लेकिन बिजली बिल के हिसाब से देखें तो इससे आपका बिजली बिल हजारों रुपये तक बढ़ सकता है.

असल में जब 20 और 25 डिग्री की बात होती है, तो कई लोगों को लगता है कि सिर्फ 5 डिग्री का ही फर्क है. लेकिन 20 डिग्री पर एसी को ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है और वह बिना रुके लगातार चलता रहता है, जिससे बिजली की खपत भी काफी बढ़ जाती है.

वहीं अगर 25 डिग्री तापमान पर AC चलाया जाए, तो यह एसी के लिए आसान होता है. क्योंकि एसी का कंप्रेसर बीच-बीच में बंद होता रहता है. इससे बिजली की बचत होती है और कमरे का तापमान भी संतुलित बना रहता है.
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इसे अच्छी तरह समझने के लिए 20 और 25 डिग्री तापमान पर एसी चलाने से बिजली बिल में कितना फर्क पड़ता है, यह जानना जरूरी है. इसके बाद आप खुद तय कर सकते हैं कि आपका एसी किस तापमान पर चलाना सबसे बेहतर रहेगा.

BEE क्या कहता है? विशेषज्ञों और BEE के अनुसार, एसी का तापमान 1 डिग्री बढ़ाने पर लगभग 6% तक बिजली की बचत हो सकती है. यानी 20 डिग्री से 25 डिग्री पर जाने पर आपकी लगभग 25-30% तक बिजली की बचत हो सकती है.

20 डिग्री तापमान पर AC कितनी बिजली खर्च करता है? : मान लीजिए आप 1.5 टन का AC 20 डिग्री पर चलाते हैं. ऐसे में एसी का कंप्रेसर लगातार कमरे का तापमान 20 डिग्री तक पहुंचाने के लिए मेहनत करता रहता है.

औसतन 1.5 टन एसी की पावर रेटिंग लगभग 1500 से 1600 वॉट होती है. ऐसी स्थिति में AC हर घंटे लगभग 1.5 से 1.6 यूनिट बिजली की खपत करता है. जरूरी बात यह है कि एसी की क्षमता और रेटिंग के हिसाब से यह बिजली बिल कम या ज्यादा हो सकता है.

25 डिग्री तापमान पर एसी कितनी बिजली खर्च करता है? अगर एसी को 25 डिग्री तापमान पर चलाया जाए, तो कंप्रेसर आसानी से तापमान को बनाए रख सकता है और बीच-बीच में ब्रेक लेकर आराम करता है.

ऐसी स्थिति में 8 घंटे एसी चलाने पर बिजली की खपत लगभग 8 यूनिट तक कम हो सकती है. इससे आपका रोज़ का खर्च सीधे 120 रुपये से घटकर करीब 80 रुपये तक आ सकता है और महीने का खर्च लगभग 2400 रुपये तक रह सकता है.





