एक जहाज के लिए निकल पड़ा था पूरा ब्रिटिश बेड़ा, आखिर कितना खतरनाक था ‘बिस्मार्क’?


24 मई 1941, उत्तरी अटलांटिक का समुद्र युद्ध की आग में जल रहा था. जर्मनी का विशाल युद्धपोत बिस्मार्क ब्रिटिश नौसेना के सामने खड़ा था. कुछ ही घंटों में इस जहाज ने ऐसा कारनामा कर दिखाया, जिसने पूरी दुनिया को हैरान कर दिया. “डेनमार्क स्ट्रेट” की लड़ाई में बिस्मार्क ने ब्रिटिश नौसेना के गौरव माने जाने वाले युद्धपोत “HMS Hood” को समुद्र की गहराइयों में पहुंचा दिया. इतना ही नहीं, उसने ब्रिटेन के नए और आधुनिक युद्धपोत “Prince of Wales” को भी युद्धक्षेत्र छोड़ने पर मजबूर कर दिया था. इसके बाद बिस्मार्क का नाम दुनिया के सबसे चर्चित और सबसे खतरनाक युद्धपोतों में शामिल हो गया.

आकार में विशाल, रफ्तार में जबरदस्त
उस दौर में दुनिया की बड़ी नौसैनिक शक्तियां युद्धपोतों के आकार पर कई अंतरराष्ट्रीय समझौतों के जरिए सीमाएं लगाने की कोशिश कर रही थीं. लेकिन बिस्मार्क उन सीमाओं से बड़ा था. उसका मानक वजन लगभग 41,700 टन था, जो उस समय के अधिकांश आधुनिक युद्धपोतों से अधिक था.

केवल बाद में बने अमेरिकी “आयोवा श्रेणी” और जापान के विशाल “यामाटो श्रेणी” के युद्धपोत ही उससे बड़े साबित हुए. आकार के मामले में बिस्मार्क अपने समय के सबसे प्रभावशाली युद्धपोतों में गिना जाता था.

रफ्तार भी उसकी बड़ी ताकत थी. वह लगभग 56 किमी प्रति घंटा की गति से लगातार चल सकता था. उस समय के अधिकांश युद्धपोतों के मुकाबले यह बेहद प्रभावशाली प्रदर्शन माना जाता था. फ्रांस के रिचलियू और इटली के विट्टोरियो वेनेटो जैसे कुछ युद्धपोत ही उसकी गति की बराबरी कर पाते थे.

Source: US Naval Institute / www.usni.org

इतनी आसानी से नहीं हार मानता था बिस्मार्क
बिस्मार्क की सबसे बड़ी ताकत केवल उसका आकार या उसकी रफ्तार नहीं थी, बल्कि उसकी मजबूत सुरक्षा व्यवस्था भी थी. उसके ढांचे को कई हिस्सों में बांटा गया था, जिससे उसे गंभीर नुकसान पहुंचाने के बाद भी डुबोना आसान नहीं था.

बाद में जब ब्रिटिश नौसेना ने उसे घेर लिया, तब भी उसे खत्म करने के लिए भारी गोलाबारी और टॉरपीडो हमलों की जरूरत पड़ी. यही वजह थी कि उसे अपने समय के सबसे सुरक्षित युद्धपोतों में गिना जाता था.

हथियारों की ताकत पर अलग तस्वीर
हालांकि बिस्मार्क की पहचान एक बेहद शक्तिशाली युद्धपोत की थी, लेकिन केवल तोपों की संख्या और एक साथ दागे जाने वाले गोले के वजन के आधार पर देखें तो कुछ अन्य देशों के युद्धपोत उससे आगे थे.

बिस्मार्क के पास आठ 15-इंच की मुख्य तोपें थीं. इन तोपों से वह एक बार में लगभग 6,400 किलोग्राम स्टील और विस्फोटक दुश्मन की ओर भेज सकता था. लेकिन कुछ अमेरिकी, जापानी और ब्रिटिश युद्धपोत इससे भी अधिक वजन की गोलाबारी करने में सक्षम थे. जापान के विशाल यामाटो और मुसाशी युद्धपोतों के पास 18-इंच की नौ विशाल तोपें थीं, जिनकी एक साथ की गई गोलाबारी बिस्मार्क से दोगुने से भी अधिक वजन की थी.

द्वितीय विश्व युद्ध में शामिल कई युद्धपोत ऐसे थे जो बिस्मार्क से भारी गोले दाग सकते थे. इसके बावजूद युद्ध के मैदान में बिस्मार्क ने जो प्रभाव छोड़ा, उसने उसे एक अलग पहचान दिलाई.

अमेरिकी युद्धपोतों से तुलना
अमेरिका के नॉर्थ कैरोलाइना और साउथ डकोटा श्रेणी के युद्धपोत आकार में बिस्मार्क से छोटे थे, लेकिन उनकी मारक क्षमता अधिक मानी जाती थी. सिद्धांत रूप से देखा जाए तो आमने-सामने की लड़ाई में वे बिस्मार्क को चुनौती दे सकते थे. हालांकि जर्मन नौसेना के फायर कंट्रोल सिस्टम और ऑप्टिकल उपकरणों की गुणवत्ता भी दुनिया में सर्वश्रेष्ठ मानी जाती थी. इसलिए केवल आंकड़ों के आधार पर किसी एक युद्धपोत को निर्णायक रूप से बेहतर बताना आसान नहीं था.

जब Prince of Wales पर बरसी बिस्मार्क की आग
डेनमार्क स्ट्रेट की लड़ाई के दौरान बिस्मार्क ने Prince of Wales पर कई सटीक प्रहार किए. उसके 15-इंच के चार गोले ब्रिटिश युद्धपोत से टकराए. एक गोला जहाज के नीचे पानी में लगा और उससे कुछ जलभराव हुआ. दो अन्य गोले जहाज के ऊपरी हिस्सों में लगे, जिससे वहां मौजूद उपकरण नष्ट हो गए और कई नौसैनिक हताहत हुए. चौथा गोला जहाज के एक हिस्से से टकराने के बाद विस्फोट हुआ और आसपास के क्षेत्रों में भारी नुकसान पहुंचा गया.

हालांकि इन हमलों के बावजूद “Prince of Wales” की मुख्य तोपें चलती रहीं और उसने लड़ाई जारी रखी. इसी दौरान जर्मन भारी क्रूजर “Prinz Eugen” के गोले भी Prince of Wales को लगे, जिससे जहाज को अतिरिक्त नुकसान पहुंचा. लगातार गिरते गोलों की बौछार और दोनों जर्मन जहाजों की गोलाबारी ने ब्रिटिश युद्धपोत की कार्रवाई को प्रभावित किया. आखिरकार परिस्थितियां ऐसी बन गईं कि Prince of Wales को युद्धक्षेत्र से हटना पड़ा.

फिर भी पीछा करता रहा ब्रिटिश युद्धपोत
हालांकि Prince of Wales को नुकसान पहुंचा था, लेकिन उसकी मुख्य तोपें और इंजन सुरक्षित थे. कुछ समय बाद उसने फिर दिशा बदली और जर्मन बेड़े का पीछा कर रहे ब्रिटिश जहाजों के साथ शामिल हो गया. बिस्मार्क की गोलाबारी से हुए नुकसान की मरम्मत करने के बाद Prince of Wales ने खुद को फिर से संचालन योग्य घोषित किया और जर्मन युद्धपोत का पीछा जारी रखा.

लेकिन तब तक बिस्मार्क दुनिया भर में अपनी ताकत का प्रदर्शन कर चुका था. HMS Hood का विनाश और Prince of Wales को पीछे हटने पर मजबूर करने की घटना ने उसे द्वितीय विश्व युद्ध के सबसे चर्चित और सबसे डरावने युद्धपोतों में शामिल कर दिया था.



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