वॉशिंगटन : फीफा वर्ल्ड कप 2026 के शुरू हो गया है, जंग के बीच अमेरिका ने भी इसकी मेजबानी की जिम्मेदारी ली है. यही फैसला ट्रंप को भारी पड़ गया. हाल ही में रिपोर्ट्स आ रही हैं कि ईरान ने वर्ल्ड कप को दहलाने की धमकी भेजी है. ईरान से जुड़े एक खतरनाक हैकर ग्रुप ने दावा किया है कि उसने अमेरिकी खुफिया एजेंसी FBI के जासूसी ड्रोन्स के पूरे सिस्टम को हैक कर लिया है. हैकर्स ने वर्ल्ड कप को निशाना बनाने की सीधी धमकी देते हुए कहा है कि ‘सुरक्षा बढ़ा लो, क्योंकि हमारे निशाने पर कई टीमें हैं और ये ड्रोन कभी भी तुम्हारी टीम की बस में लैंड कर सकते हैं’.
FIFA World Cup 2026 के मेजबान अमेरिका को ईरानी हैकर्स ने डराया
अमेरिका, मैक्सिको और कनाडा की मेजबानी में गुरुवार यानी 11 जून से इतिहास का सबसे बड़ा फीफा वर्ल्ड कप (FIFA World Cup 2026) शुरू हो चुका है. खेल के इस महाकुंभ के शुरू होते ही इस पर काले साए मंडराने लगे हैं. जिहादी और साइबर ग्रुप्स पर नजर रखने वाली मशहूर संस्था ‘SITE इंटेलिजेंस ग्रुप’ की रिपोर्ट के मुताबिक, फिलिस्तीन समर्थक और ईरान से जुड़े हैकर ग्रुप ‘हंडाला’ ने एक खौफनाक बयान जारी किया है.
हैकर्स का दावा है कि उन्होंने आतंकवाद विरोधी अभियानों के लिए तैनात किए गए FBI के हाई-टेक ‘फर्स्ट-पर्सन व्यू’ (FPV) ड्रोन्स को पूरी तरह से हैक कर लिया है और पिछले कई महीनों से अमेरिकी एजेंसी की हर तस्वीर, डेटा और सस्पेक्ट्स की लिस्ट जैसी सेंसेटिव डेटा को कब्जे में ले लिया है.
फीफा वर्ल्ड कप 2026 में अमेरिकी टीम पर अटैक की धमकी
आज जब अमेरिकी मेन्स नेशनल टीम (USMNT) पराग्वे के खिलाफ अपने वर्ल्ड कप मैच की शुरुआत करने जा रही है. तभी हैकर ग्रुप ‘हंडाला’ ने खुलेआम धमकी देते हुए कहा है, ‘बेहतर होगा कि तुम लोग वर्ल्ड कप की सुरक्षा को और मजबूत कर लो, क्योंकि इसमें हिस्सा ले रही कुछ टीमें हमें बिल्कुल पसंद नहीं हैं. ये मत भूलो कि FPV ड्रोन्स हर जगह हैं; तुम्हें कभी पता नहीं चलेगा कि कब कोई ड्रोन सीधे तुम्हारी टीम की बस के अंदर पहुंच जाए’.
हैकर्स के मुताबिक, इन ड्रोन्स में फेशियल रिकग्निशन यानी चेहरा पहचानने की तकनीक और लाइसेंस प्लेट स्कैनिंग जैसे बेहद एडवांस फीचर्स लोडेड हैं, जिन्हें अमेरिका ने आतंकवाद से निपटने के लिए तैनात किया था. हालांकि, ‘साइट इंटेलिजेंस’ ने हैकर्स द्वारा जारी किए गए कुछ वीडियो और फुटेज को फर्जी बताया है और कहा है कि वे पुराने अमेरिकी पुलिस के वीडियो हैं, लेकिन फिर भी इस धमकी ने सुरक्षा एजेंसियों के हाथ-पांव फुला दिए हैं.
काश पटेल का ईमेल हैक करने वाला ‘हंडाला ग्रुप’
ये कोई मामूली हैकर ग्रुप नहीं है, बल्कि ये वही शैतानी दिमाग है जिसने मार्च 2026 में FBI डायरेक्टर काश पटेल का पर्सनल ईमेल अकाउंट तक हैक कर लिया था और उनकी निजी तस्वीरें और 2010 से 2019 के बीच के कई सीक्रेट दस्तावेज ऑनलाइन लीक कर दिए थे.
अमेरिकी स्टेट डिपार्टमेंट यानी विदेश मंत्रालय ने इस ग्रुप के सदस्यों की पहचान बताने वाले को 10 मिलियन डॉलर यानी करीब 83 करोड़ रुपये के इनाम का ऐलान कर रखा है. अमेरिकी न्याय विभाग ने पहले ही चेतावनी दी थी कि फरवरी 2026 में तेहरान पर हुए अमेरिकी-इजरायली हमलों के बाद ईरान समर्थित साइबर हमलावर अमेरिका को बड़ा नुकसान पहुंचाने की फिराक में हैं, और अब वर्ल्ड कप को हथियार बनाया जा रहा है.
फीफा वर्ल्ड कप 2026 पर बवाल और सिक्योरिटी ब्रीच का ग्रहण
इस बार वर्ल्ड कप शुरू होने के साथ ही विवादों और सिक्योरिटी ब्रीच की अफवाहों से घिर गया है. जहां एक तरफ कई देशों के फैंस और पत्रकारों को अमेरिकी वीजा मिलने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा है. यहां तक कि अफ्रीका के नंबर वन अंपायर उमर अर्टन को आतंकवादियों से संबंध होने के झूठे आरोप में मियामी एयरपोर्ट से ही वापस डिपोर्ट कर दिया गया. वहीं दूसरी तरफ, गुरुवार को मैक्सिको सिटी में हुए ओपनिंग मैच के दौरान स्टेडियम के बाहर मजदूरों और लापता नागरिकों के हक के लिए भयंकर हिंसा भड़क उठी, जिसके बाद पुलिस को आंसू गैस के गोले दागने पड़े.
इतना ही नहीं, अमेरिका के साथ जारी युद्ध की वजह से ईरान की फुटबॉल टीम को अपना ट्रेनिंग कैंप एरिजोना से हटाकर मैक्सिको के तिजुआना शिफ्ट करना पड़ा. गुरुवार को जब ईरानी टीम मीडिया के सामने आई तो उनके 26 में से सिर्फ 12 खिलाड़ी ही मैदान पर दिखे और उनके स्टार स्ट्राइकर मेहदी तारेमी भी गायब थे. ईरान के राजदूत ने साफ कर दिया है कि अमेरिकी पाबंदियों के कारण ईरानी टीम को मैच वाले दिन ही अमेरिका में एंट्री मिलेगी और मैच खत्म होते ही तुरंत देश छोड़ना होगा. खेल का ये मैदान अब पूरी तरह से जियोपॉलिटिक्स और साइबर वॉर का अखाड़ा बन चुका है.




