न जेब में न तिजोरी में, फिर भी मिलियन्स में है कीमत, NFT का वो गणित जो रातों-रात बना रहा करोड़पति


नई दिल्ली. इंटरनेट की दुनिया में पिछले कुछ सालों में एक शब्द ने सबसे ज्यादा चर्चा बटोरी है और वह है एनएफटी यानी NFT. कई लोगों के लिए यह अब भी एक रहस्य जैसा है कि आखिर कोई इंसान एक डिजिटल फोटो, वीडियो या कार्टून जैसी चीज के लिए करोड़ों रुपये क्यों खर्च कर देता है, जबकि उसे इंटरनेट से फ्री में डाउनलोड भी किया जा सकता है. लेकिन असल खेल उस फोटो का नहीं बल्कि उसके “ओरिजिनल मालिकाना हक” का होता है. यही वजह है कि NFT को डिजिटल दुनिया का नया “स्टेटस सिंबल” और “डिजिटल प्रॉपर्टी” कहा जाने लगा है.

क्रिप्टो और ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी के बढ़ते इस्तेमाल के साथ NFT मार्केट ने दुनिया भर में बड़ी तेजी पकड़ी. कई कलाकार, गेम डेवलपर और निवेशक इससे करोड़ों रुपये कमा चुके हैं. कुछ लोगों ने डिजिटल आर्ट बेचकर रातों रात दौलत बनाई तो कुछ ने सस्ते में खरीदे गए NFT को बाद में कई गुना कीमत पर बेच दिया. हालांकि यह बाजार जितना तेजी से ऊपर गया, उतना ही जोखिम भरा भी माना जाता है. ऐसे में यह समझना जरूरी है कि NFT आखिर होता क्या है और इसका पूरा गणित कैसे काम करता है.

क्या है NFT

NFT का फुल फॉर्म है Non-Fungible Token. आसान भाषा में समझें तो यह किसी डिजिटल चीज का “ओरिजिनल ओनरशिप सर्टिफिकेट” होता है. Non-Fungible का मतलब ऐसी चीज जिससे दूसरी चीज को बदला नहीं जा सकता. जैसे असली मोनालिसा पेंटिंग या कोहिनूर हीरा. उनकी कॉपी हो सकती है लेकिन असली सिर्फ एक ही माना जाएगा.

इसी तरह इंटरनेट पर मौजूद किसी फोटो, वीडियो, गाने, गेमिंग आइटम या डिजिटल आर्ट पर जब ब्लॉकचेन के जरिए मालिकाना हक दर्ज कर दिया जाता है, तो वह NFT बन जाता है. यानी लोग असली “डिजिटल मालिकाना हक” खरीदते हैं, सिर्फ फोटो नहीं.

ब्लॉकचेन पर टिका है पूरा सिस्टम

NFT का पूरा सिस्टम ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी पर चलता है. ज्यादातर NFT इथीरियम (Ethereum) ब्लॉकचेन पर बनाए जाते हैं. ब्लॉकचेन एक तरह का डिजिटल बहीखाता होता है जिसमें हर ट्रांजैक्शन हमेशा के लिए रिकॉर्ड हो जाती है और उसे बदला नहीं जा सकता.

जब कोई व्यक्ति NFT खरीदता है, तो ब्लॉकचेन पर यह दर्ज हो जाता है कि अब उस डिजिटल आइटम का मालिक कौन है. यही रिकॉर्ड उसकी असली पहचान बन जाता है.

फोटो डाउनलोड हो सकती है, मालिकाना हक नहीं

बहुत लोग पूछते हैं कि अगर कोई NFT वाली फोटो सेव कर सकता है तो फिर करोड़ों रुपये देने का फायदा क्या है. इसका जवाब “ओरिजिनल ओनरशिप” में छिपा है. ठीक वैसे ही जैसे दुनिया में लाखों लोग मोनालिसा की फोटो डाउनलोड कर सकते हैं, लेकिन असली पेंटिंग का मालिक सिर्फ एक ही होता है.

NFT खरीदने वाला व्यक्ति उस डिजिटल एसेट का प्रमाणित मालिक माना जाता है. यही चीज उसे खास और महंगा बनाती है.

कलाकारों के लिए कैसे बदल गया खेल

NFT ने डिजिटल कलाकारों के लिए कमाई का नया रास्ता खोल दिया. पहले इंटरनेट पर कोई भी आर्ट आसानी से कॉपी हो जाती थी और कलाकार को ज्यादा फायदा नहीं मिलता था. लेकिन NFT में “स्मार्ट कॉन्ट्रैक्ट” नाम की तकनीक होती है.

इसमें कलाकार यह सेट कर सकता है कि जब भी उसका NFT भविष्य में दोबारा बिके, तो हर बार उसे कुछ प्रतिशत रॉयल्टी मिले. यानी कलाकार को लाइफटाइम कमाई का मौका मिलता है.

करोड़ों में बिक चुके हैं डिजिटल आर्ट

NFT की दुनिया में कई ऐसे सौदे हुए जिन्होंने पूरी दुनिया को चौंका दिया. डिजिटल आर्टिस्ट बीपल (Beeple) ने अपनी एक डिजिटल आर्ट करीब 500 करोड़ रुपये से ज्यादा में बेची थी. वहीं ट्विटर के पूर्व सीईओ जैक डॉर्सी (Jack Dorsey) ने अपना पहला ट्वीट NFT के रूप में करीब 21 करोड़ रुपये में बेचा था. Bored Ape Yacht Club जैसे NFT कलेक्शन इतने लोकप्रिय हुए कि कई सेलिब्रिटीज ने इन्हें करोड़ों रुपये में खरीदा.

लोग कैसे कमा रहे हैं पैसा

NFT से कमाई मुख्य रूप से दो तरीके से होती है. पहला तरीका कलाकारों के लिए है, जहां वे अपनी डिजिटल कला को NFT बनाकर OpenSea और Rarible जैसे प्लेटफॉर्म पर बेचते हैं.

दूसरा तरीका निवेशकों का है. कई लोग किसी नए NFT को कम कीमत पर खरीदते हैं और जब उसकी लोकप्रियता बढ़ती है, तो उसे ऊंची कीमत पर बेच देते हैं. यही वजह है कि कुछ लोगों ने हजारों रुपये के NFT को लाखों और करोड़ों में बेचा.

NFT खरीदने के लिए क्या चाहिए

NFT खरीदने के लिए आमतौर पर क्रिप्टोकरेंसी की जरूरत होती है. ज्यादातर प्लेटफॉर्म एथेरियम या सोलाना (Solana) जैसी क्रिप्टोकरेंसी स्वीकार करते हैं. इसके साथ MetaMask जैसे डिजिटल वॉलेट की भी जरूरत पड़ती है. NFT लिस्ट करने या खरीदने के दौरान “गैस फीस” भी देनी पड़ती है, जो नेटवर्क ट्रांजैक्शन फीस होती है.

सिर्फ आर्ट नहीं, भविष्य की टेक्नोलॉजी भी

NFT सिर्फ डिजिटल फोटो या कार्टून तक सीमित नहीं है. एक्सपर्ट्स मानते हैं कि भविष्य में मकानों के कागज, पहचान पत्र, टिकट, गेमिंग आइटम और यहां तक कि डिजिटल जमीन यानी मेटावर्स (Metaverse) की प्रॉपर्टी भी NFT के रूप में हो सकती है. कई कंपनियां पहले ही इस तकनीक पर काम कर रही हैं.

जोखिम भी बहुत बड़ा

NFT मार्केट में तेजी से पैसा बनने की कहानियां जरूर हैं, लेकिन यह बाजार बेहद जोखिम भरा भी माना जाता है. NFT की कीमत पूरी तरह डिमांड और सप्लाई पर निर्भर करती है. अगर किसी NFT की लोकप्रियता खत्म हो जाए, तो उसकी कीमत शून्य तक जा सकती है. यही वजह है कि एक्सपर्ट्स हमेशा सलाह देते हैं कि NFT या क्रिप्टो जैसे हाई रिस्क एसेट में सोच समझकर ही निवेश करना चाहिए.



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Nemish Agrawal
Nemish Agrawalhttps://tv1indianews.in
Tv Journalist • Editor • Writer Digital Creator • Photographer Travel Vlogger • Web-App Developer IT Cell • Social Worker

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