Last Updated:
NASA Moon Mission Crisis: SpaceX का Starship लॉन्च तकनीकी खराबी के कारण आखिरी मिनट में टाल दिया गया. एलन मस्क ने हाइड्रोलिक सिस्टम में गड़बड़ी को इसकी वजह बताया. इस देरी ने NASA की चिंता बढ़ा दी है क्योंकि आर्टेमिस मून मिशन काफी हद तक Starship पर निर्भर है. 2028 तक चांद पर इंसानों की वापसी का अमेरिकी सपना अब इस रॉकेट की सफलता से जुड़ा है. चीन भी 2030 तक मून मिशन की तैयारी कर रहा है. ऐसे में Starship की हर देरी अमेरिका के लिए बड़ा झटका मानी जा रही है. SpaceX का संभावित IPO भी इस टेस्ट पर टिका हुआ है.
SpaceX का Starship लॉन्च आखिरी मिनट में टला. (फोटो AFP)
NASA Moon Mission Crisis: एलन मस्क का ड्रीम प्रोजेक्ट Starship एक बार फिर लॉन्च पैड पर अटक गया. दुनिया की सबसे ताकतवर मानी जाने वाली रॉकेट प्रणाली उड़ान भरने से कुछ मिनट पहले ही तकनीकी गड़बड़ी का शिकार हो गई. SpaceX इंजीनियरों ने काउंटडाउन कई बार रोका, लेकिन आखिरकार लॉन्च टालना पड़ा. यह सिर्फ एक रॉकेट टेस्ट की देरी नहीं है. इसके पीछे अमेरिका के मून मिशन, NASA की Artemis योजना और SpaceX के भविष्य का बड़ा दांव जुड़ा हुआ है. जिस Starship को चांद और मंगल मिशन का भविष्य बताया जा रहा था, वही अब बार-बार की तकनीकी दिक्कतों से सवालों के घेरे में है. दिलचस्प बात यह है कि ठीक एक दिन पहले SpaceX ने दुनिया के सबसे बड़े IPO में से एक की तैयारी शुरू की थी. ऐसे में यह देरी निवेशकों से लेकर वैज्ञानिकों तक सभी के लिए चिंता का विषय बन गई है. NASA के लिए भी यह झटका इसलिए बड़ा है क्योंकि Artemis मिशन में चांद पर अंतरिक्ष यात्रियों को उतारने की जिम्मेदारी इसी Starship पर टिकी हुई है. अगर परीक्षण लगातार टलते रहे, तो अमेरिका का मून मिशन चीन से पिछड़ सकता है.
SpaceX ने इस टेस्ट को Starship का 12वां और सबसे अहम उड़ान परीक्षण बताया था. तीसरी पीढ़ी के इस विशाल रॉकेट की ऊंचाई 124 मीटर से ज्यादा है. इसे पहले के मॉडल से अधिक शक्तिशाली और एडवांस माना जा रहा है. लॉन्च से पहले सबकुछ सामान्य दिख रहा था, लेकिन काउंटडाउन के दौरान हाइड्रोलिक सिस्टम में खराबी सामने आई. खुद एलन मस्क ने X पर बताया कि टॉवर आर्म को पकड़ने वाला हाइड्रोलिक पिन पीछे नहीं हटा, जिससे लॉन्च रोकना पड़ा. SpaceX अब अगले दिन फिर लॉन्च की कोशिश करेगा. इस मिशन में Super Heavy Booster को समुद्र में उतारने और ऊपरी स्टेज से 20 मॉक सैटेलाइट्स छोड़ने की योजना है. दो खास Starlink सैटेलाइट्स में कैमरे भी लगाए गए हैं ताकि हीट शील्ड की जांच हो सके. मिशन सफल रहता तो Starship करीब 65 मिनट बाद हिंद महासागर में उतरता. लेकिन अब इस देरी ने NASA और अमेरिकी अंतरिक्ष कार्यक्रम की धड़कनें बढ़ा दी हैं.
NASA का Artemis मिशन काफी हद तक Starship पर निर्भर है. (फाइल फोटो)
Starship लॉन्च में तकनीकी खराबी
- Starship सिर्फ एक रॉकेट नहीं बल्कि अमेरिका की स्पेस पॉलिसी का बड़ा हथियार बन चुका है. NASA ने Artemis प्रोग्राम के तहत चांद पर इंसानों की वापसी के लिए SpaceX को चुना है. लक्ष्य है कि 2028 तक अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री फिर चांद पर उतरें. लेकिन इसके लिए Starship का पूरी तरह सफल होना जरूरी है. सबसे बड़ी चुनौती ऑर्बिट में फ्यूल भरने की तकनीक को साबित करना है. बिना इसके डीप स्पेस मिशन संभव नहीं माने जा रहे.
- चीन ने भी 2030 तक चांद पर इंसान भेजने का लक्ष्य तय कर रखा है. यही वजह है कि अमेरिका पर दबाव बढ़ता जा रहा है. पूर्व NASA अधिकारी जी. स्कॉट हबर्ड ने कहा कि इस टेस्ट पर बहुत कुछ दांव पर लगा है. सिर्फ सरकारी एजेंसियां ही नहीं, बल्कि निजी निवेशक भी SpaceX की हर गतिविधि पर नजर रख रहे हैं. अगर Starship लगातार देरी और विस्फोटों का शिकार होता रहा, तो अमेरिका की स्पेस लीडरशिप को बड़ा झटका लग सकता है.
क्यों अहम है Starship का यह टेस्ट?
यह पहली बार है जब Starship का नया जनरेशन मॉडल उड़ान भरने वाला था. SpaceX ने इसमें कई डिजाइन बदलाव किए हैं. कंपनी का दावा है कि नया मॉडल ज्यादा सुरक्षित और लंबी दूरी के मिशनों के लिए तैयार है. मिशन के दौरान 20 मॉक सैटेलाइट्स तैनात किए जाने थे ताकि भविष्य के कमर्शियल मिशनों की तैयारी हो सके.
SpaceX के IPO पर भी असर?
SpaceX ने हाल ही में अमेरिकी रेगुलेटर्स के पास IPO से जुड़े दस्तावेज जमा किए हैं. विश्लेषकों का मानना है कि यह इतिहास के सबसे बड़े IPO में से एक हो सकता है. ऐसे में हर टेस्ट फ्लाइट अब निवेशकों के भरोसे से भी जुड़ गई है. अगर Starship सफल होता है, तो कंपनी की वैल्यू और तेजी से बढ़ सकती है. लेकिन लगातार तकनीकी दिक्कतें निवेशकों को डरा भी सकती हैं.
NASA क्यों है सबसे ज्यादा परेशान?
NASA ने आर्टेमिस मून मिशन में SpaceX को सबसे अहम पार्टनर बनाया है. Starship को Lunar Lander के तौर पर इस्तेमाल किया जाना है. अगर इसके परीक्षण समय पर पूरे नहीं होते, तो पूरा मिशन शेड्यूल पीछे खिसक सकता है. यही वजह है कि अमेरिकी स्पेस एजेंसी इस लॉन्च को बेहद करीब से मॉनिटर कर रही है.
Starship लॉन्च आखिर टला क्यों?
लॉन्च से ठीक पहले हाइड्रोलिक सिस्टम में खराबी आ गई थी. एलन मस्क के मुताबिक टॉवर आर्म को पकड़ने वाला हाइड्रोलिक पिन पीछे नहीं हट पाया. सुरक्षा कारणों से SpaceX ने लॉन्च रोक दिया. कंपनी अब अगली विंडो में दोबारा लॉन्च की तैयारी कर रही है.
NASA के Moon Mission पर इसका क्या असर पड़ सकता है?
NASA का Artemis मिशन काफी हद तक Starship पर निर्भर है. अगर इसके टेस्ट लगातार देरी का शिकार होते हैं, तो 2028 तक इंसानों को चांद पर भेजने की योजना प्रभावित हो सकती है. इससे अमेरिका की चीन के साथ स्पेस रेस में स्थिति कमजोर पड़ सकती है.
क्या SpaceX का IPO भी खतरे में आ सकता है?
सीधे तौर पर नहीं, लेकिन Starship की सफलता SpaceX की मार्केट वैल्यू से जुड़ी है. निवेशक कंपनी की तकनीकी क्षमता और मिशन सफलता दर को ध्यान से देख रहे हैं. लगातार फेल टेस्ट या देरी IPO के उत्साह को प्रभावित कर सकते हैं.
About the Author

सुमित कुमार News18 हिंदी में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं. वे पिछले 4 साल से यहां सेंट्रल डेस्क टीम से जुड़े हुए हैं. उनके पास जर्नलिज्म में मास्टर डिग्री है. News18 हिंदी में काम करने से पहले, उन्ह…और पढ़ें





