Mana Jampala| Voxa| AI Receptionist| जिस उम्र में स्कूल जाने में भी बहाने करते हैं बच्चे, 12 साल की बच्ची माना जम्पाला ने कर दिया कमाल


Mana Jampala AI Startup Voxa: प्रतिभा उम्र की मोहताज नहीं होती. यह बात 12 साल की बच्ची माना जम्पाला ने साबित कर दी है. जिस उम्र में बच्चे स्कूल जाने तक में सैकड़ों बहाने बनाते हैं और ज्यादातर समय पर अपना खेलने-कूदने में बिताते हैं, उस उम्र में कनाडा के ब्रिटिश कोलंबिया में रहने वाली माना जम्पाला ने बुलंदियां छू ली हैं. उन्होंने छोटी सी उम्र में ऐसी चीज इजाद कर ली है जो आज उन्हें बेहतर इन्टरप्रिन्योर बना रही है.

कुछ अलग करने की ललत माना में बचपन से थी लेकिन उन्हें ये नहीं पता था कि उनका कुछ बेहतर और अलग करना उनके पिता की कंपनी के लिए तो वरदान होगा ही उन्हें एक सफल उद्यमी भी बना देगा.

माना ने छोटी सी उम्र में एक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस स्टार्टअप वोक्सा (Voxa) की नींव रखी है जो छोटे व्यवसायों के लिए AI-पावर्ड वर्चुअल रिसेप्शनिस्ट का काम करता है. वोक्सा फोन कॉल्स का जवाब देता है, अपॉइंटमेंट बुक करता है, रेस्तरां में ऑर्डर लेता है, कॉल समरी तैयार करता है और इस बात का भी अच्छे से ध्यान रखता है कि कोई भी संभावित ग्राहक या कॉल छूट न जाए.

माना को ऐसे आया आइडिया
माना एक बार अपने पिता के ऑफिस गईं, जैसे सब बच्चे जाते हैं और वहां उछलते-कूदते और देखते हैं. माना जब वहां बैठी थीं और सब कुछ सुन रही थीं तो उन्होंने देखा कि उनके पिता के साथ काम कर रही छोटी टीम ग्राहकों से व्यस्त होने के कारण महत्वपूर्ण फोन कॉल्स को मिस कर रही थी. वे कभी फोन उठा रहे थे तो कभी ग्राहकों में फंसे होने के कारण कॉल्स को बिना उत्तर दिए ही छोड़ रहे थे.

इससे माना को लगा कि ऐसे तो पता नहीं कितनी महत्वपूर्ण कॉल्स बिना उत्तर दिए ही रह जाएंगी और कितने ग्राहक व अवसर इससे खो जाएंगे. माना ने इसे सामान्य समस्या मानने के बजाय हल निकालने का फैसला किया और वे इसका तोड़ निकालने में जुट गईं. बस इसी सोच से नवंबर 2025 में Voxa पैदा हुआ, जो आज तहलका मचा रहा है.

माना की टेक्नोलॉजी यात्रा इससे कुछ पहले शुरू हो चुकी थी क्योंकि मात्र 9 साल की उम्र में उन्होंने पाइथन प्रोग्रामिंग सीखना शुरू कर दिया था, लेकिन उसका रिजल्ट इतनी जल्दी आएगा, इसकी उम्मीद नहीं थी. हालांकि प्रोग्रामिंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जल्दी ही उनके जुनून का विषय बन गया. उन्होंने अंतरराष्ट्रीय कोडिंग कॉम्पिटिशन जीते और 1517 Medici Project से सपोर्ट भी प्राप्त किया, जो युवा उद्यमियों को साहसिक आइडिया के लिए ग्रांट देता है.

क्या काम करता है वॉक्सा?
बस उसी सीख का नतीजा था Voxa. आज वॉक्सा 24 घंटे काम करता है. बिजनेस मालिक उपलब्ध न हों तो भी यह अपॉइंटमेंट शेड्यूल करता है, मिस्ड कॉल्स मैनेज करता है, ऑर्डर रिकॉर्ड करता है और हर बातचीत के बाद समरी देता है. माना ने Voxa Agents फीचर भी बनाया है, जिसमें यूजर्स साधारण भाषा में बताकर कस्टमाइज्ड AI असिस्टेंट बना सकते हैं.

माना ने एआई की ली मदद
कोडिंग की हर लाइन खुद लिखने के बजाय माना ने ChatGPT और Claude जैसे AI टूल्स का इस्तेमाल कर डेवलपमेंट को तेज किया, लेकिन सिस्टम का मुख्य भाग उन्होंने खुद बनाया. उनका मानना है कि AI ने युवाओं के लिए आइडिया को असल प्रोडक्ट में बदलना पहले से कहीं आसान कर दिया है.

चुनौतियां भी आईं
युवा फाउंडर होने के कारण शुरुआत में कुछ चुनौतियां भी आईं. कुछ ग्राहक और निवेशक उनकी उम्र को देखकर हिचकिचाते थे लेकिन माना ने हार नहीं मानी.उन्होंने एक और रास्ता निकाला और ऑनलाइन आउटरीच पर फोकस किया. अपने प्रोडक्ट पर काम करके उसे लगातार अपडेट किया. आज Voxa सैकड़ों कॉल्स हैंडल कर रहा है और माना अपने पहले पेइंग कस्टमर्स साइन करने की दिशा में काम कर रही हैं.

अब वॉक्सा को बड़ा बनाने की कोशिश
भविष्य में माना Voxa को स्टार्टअप एक्सेलरेटर प्रोग्राम्स से जोड़कर आगे बढ़ाना चाहती हैं और निवेश जुटाकर कंपनी को स्केल करना चाहती हैं.

माना की कहानी साबित करती है कि उम्र नवाचार की सीमा नहीं है, खासकर AI के युग में. महज 12 साल की उम्र में जिज्ञासा, दृढ़ता और सही टेक्नोलॉजी से उन्होंने असली दुनिया की समस्या हल कर दी और आने वाली पीढ़ी के उद्यमियों को प्रेरित किया है.



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