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Maharajganj Tourist Places: उत्तर प्रदेश का महराजगंज जिला अपनी खास भौगोलिक स्थिति और भारत-नेपाल सीमा से सटे होने के कारण प्रकृति प्रेमियों के लिए पसंदीदा ठिकाना बनता जा रहा है. विशेष रूप से निचलौल से झूलनीपुर बॉर्डर तक का क्षेत्र अपनी वन संपदा, नेपाल की पहाड़ियों के अद्‍भुत दृश्यों और हरियाली के कारण पर्यटकों को तेजी से आकर्षित कर रहा है. साफ मौसम और बारिश के बाद यहां से नेपाल की खूबसूरत वादियां बिल्कुल साफ दिखाई देती हैं, जो इसकी सुंदरता में चार चांद लगा देती हैं. जानिए इस सीमावर्ती क्षेत्र में बहने वाली गंडक नदी और दर्जनिया मगरमच्छ संरक्षण केंद्र जैसी कौन सी खास जगहें हैं, जो पर्यटकों को शांत और खुशनुमा माहौल का अहसास करा रही हैं.

महराजगंज: उत्तर प्रदेश का महराजगंज जिला अपनी अनोखी भौगोलिक स्थिति के लिए जाना जाता है. पड़ोसी देश नेपाल के साथ सटे इस जिले के भारत-नेपाल सीमा क्षेत्र में कई ऐसे खूबसूरत इलाके हैं, जो अपनी प्राकृतिक सुंदरता से लोगों को मंत्रमुग्ध कर लेते हैं. महराजगंज जिले के निचलौल से होकर जब हम झूलनीपुर बॉर्डर की तरफ बढ़ते हैं, तो इसके आसपास फैली वन संपदा, नेपाल के पहाड़ों से निकलकर आने वाली नदियां और चारों तरफ छाई हरियाली पर्यटकों के बीच तेजी से अपनी एक अलग पहचान बना रही है. प्रकृति प्रेमियों के लिए यह क्षेत्र किसी वरदान से कम नहीं है, जहां हर रोज बड़ी संख्या में लोग घूमने और सुकून के पल बिताने पहुंच रहे हैं.

सीमा से ही दिखती हैं नेपाल के पहाड़ों की खूबसूरत वादियां
महराजगंज जिले का यह सीमावर्ती क्षेत्र प्राकृतिक आकर्षण का एक बहुत बड़ा केंद्र माना जाता है, जो पर्यटन के शौकीन लोगों के लिए बेहद खास है. नेपाल से बिल्कुल सटे होने की वजह से इस क्षेत्र से ही नेपाल के पहाड़ों की खूबसूरत वादियां और वहां के घने वनों का प्राकृतिक सौंदर्य साफ दिखाई देता है. विशेष रूप से बारिश होने के बाद जब मौसम पूरी तरह साफ हो जाता है, तो दूर-दूर तक फैली पहाड़ियों और वन क्षेत्रों का नजारा पर्यटकों को अपनी तरफ खींचता है. इस मनमोहक हरियाली और प्राकृतिक सुंदरता का आनंद लेने के लिए समय-समय पर लोग यहां खिंचे चले आते हैं.

‘दर्जनिया मगरमच्छ संरक्षण केंद्र’ है बेहद खास
इस इंडो-नेपाल बॉर्डर क्षेत्र की सबसे बड़ी खासियत यह है कि महराजगंज जिले के सबसे प्रमुख पर्यटन स्थलों में से एक ‘दर्जनिया मगरमच्छ संरक्षण केंद्र’ इसी इलाके में मौजूद है. इस केंद्र में सैकड़ों मगरमच्छों का प्राकृतिक रूप से संरक्षण किया जाता है. पानी के बीच और किनारों पर धूप सेकते इन विशालकाय मगरमच्छों को अपनी आंखों से सामने देखने के लिए बड़ी संख्या में वन्यजीव प्रेमी और पर्यटक यहां पहुंचते हैं, जो बच्चों और बड़ों दोनों के लिए रोमांच का केंद्र बना हुआ है.

गंडक नदी की लहरें और शांत वातावरण देता है सुकून
निचलौल से झूलनीपुर तक बेहतरीन और अच्छी सड़क बन जाने के बाद से इस पूरे बेल्ट में पर्यटकों का आवागमन बहुत तेजी से बढ़ा है. इस क्षेत्र में नेपाल के पहाड़ों से कल-कल करती हुई निकलकर आने वाली गंडक नदी बहती है, जो अपनी अद्‍भुत खूबसूरती के लिए जानी जाती है. बरसात के दिनों में जब इस नदी का जलस्तर बढ़ता है और पानी अपने पूरे उफान पर होता है, तो इसका नजारा देखने लायक होता है. सड़क के दोनों किनारों पर लगे घने हरे-भरे पेड़ और खुला प्राकृतिक वातावरण यहां आने वाले सैलानियों को मानसिक शांति और एक बेहद शांत माहौल का अनुभव कराता है. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भी लोग यहां की खूबसूरत तस्वीरें और वीडियो जमकर शेयर कर रहे हैं, जिससे यह छुपा हुआ पर्यटन स्थल अब दूर-दूर तक लोगों के बीच लोकप्रिय हो रहा है.

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Seema Nath

सीमा नाथ 6 साल से मीडिया के क्षेत्र में काम कर रही हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत शाह टाइम्स में रिपोर्टिंग के साथ की जिसके बाद कुछ समय उत्तरांचल दीप, न्यूज अपडेट भारत के साथ ही लोकल 18 (नेटवर्क18) में काम …और पढ़ें



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