घर या ऑफिस में काम करके थकान हो सकती है. दौड़भाग करके थकान होने लगती है, लेकिन क्या दवाओं से भी किसी को थकान हो सकती है? यह सुनकर थोड़ा अजीब लग सकता है, लेकिन अमेरिकी मीडिया हस्ती, सोशलाइट, मॉडल और सफल उद्यमी किम कार्दशियन (Kim Kardashian) को दवाओं से थकान होती है. आखिर ऐसा कैसे हो सकता है? दरअसल, किम ने हाल ही में Amy Poehler के पॉडकास्ट गुड हैंग विद एमी पोलर में इस बात का खुलासा किया कि वे प्रतिदिन लगभग 35 सप्लीमेंट्स का सेवन करती हैं. वे कहती हैं, मैं इन 35 सप्लीमेंट्स को तीन बार में बांटकर लेती हूं. साथ ही किम ने ये भी कहा कि ऐसा करना अब काफी थका देने वाला हो गया है. मुझे दवाइयां खाने से अब थकान होने लगी है. मुझे ये फिश ऑयल सप्लीमेंट्स अब बंद करने होंगे.
किम कार्दशियन की इस बात ने सबको हैरान कर दिया और ये सोचने पर मजबूर कर दिया कि क्या वाकई दवाइयां खाने से थकान होती है? हालांकि, काफी लोग इस दुनिया में ऐसे हैं, जिन हर दिन कई तरह की दवाओं का सेवन करना होता है. जिन्हें वे चाहकर भी मिस नहीं कर सकते हैं. कब, कौन सी, कितनी गोली ये सब याद करते हुए समय-समय पर टैबलेट खाते रहना, वाकई फिजिकली तो नहीं, बल्कि मेंटली थका देने वाला हो सकता है. आखिर क्या है पिल फटीग, जानते हैं यहां?
क्या है पिल फटीग? (What is pill Fatigue)
पिल फटीग कोई डॉक्टर्स द्वारा आधिकारिक तरीके से बताया गया रोग नहीं है, लेकिन कुछ हेल्थ एक्सपर्ट्स इसे मेंटल, इमोशनल और कभी-कभी फिजिकल थकान से जोड़कर देखते हैं. जब आप हर दिन ढेर सारी दवाइयां समय-समय पर याद करते हुए लेते रहते हैं, तो जाहिर सी बात है कि आपको मेंटली और शारीरिक रूप से
खीझ, थकान महसूस होने लगेगी. ऐसा उन लोगों के साथ हो सकता है, जो लंबे समय से हर दिन कई तरह की दवाइयों और सप्लीमेंट्स का सेवन करते हैं. जो लोग किसी ना किसी बीमारी का इलाज लंबे समय से करवा रहे हैं, उनमें पिल फटीग यानी दवाओं से थकान महसूस हो सकती है, क्योंकि उन्हें प्रतिदिन कई दवाइयां लेनी पड़ती हैं. इसके लिए समय का ध्यान रखना पड़ता है. लगातार स्वास्थ्य पर नजर रखनी पड़ती है. समय के साथ यह दिनचर्या बोझिल लगने लगती है. इलाज मददगार महसूस होने की बजाय तनावपूर्ण और थकाऊ लगने लगता है.
पिल फटीग क्यों होता है?
शुरू में एक पेशेंट खुद को स्वस्थ और जल्दी ठीक होने के लिए दवाएं टाइम टू टाइम लेता रहता है, लेकिन जब दवाइयों की संख्या बढ़कर दोगुनी हो जाती हैं और घंटे-घंटे दवाएं लेनी पड़ती हैं तो जाहिर सी बात है ये उबाऊ और थकाऊ लग सकता है.
पिल फटीग के कारण
एक दिन में ढेर सारी दवाइयों और सप्लीमेंट्स का सेवन करना.
इन दवाओं को लेने के लिए सुबह, दोपहर, रात की खुराक लेने का टाइम याद रखना.
कुछ दवाओं के सेवन से साइड एफेक्ट्स होना भी इसका कारण हो सकता है.
लंबे समय से चली आ रही बीमारी को ठीक करने का मेंटल और इमोशनल थकान होना.
कुछ लोगों के दिमाग में ये बात ही घूमने लगती है कि आपकी पूरी दिनचर्या दवाइयों के इर्द-गिर्द ही घूमने लगी है.
पिल फटीग का सेहत पर कैसे होता है असर?
इसमें कुछ लोग दवाएं लेना ही छोड़ने लगते हैं.
कोई ना कोई दवा समय पर नहीं लेते.
अपने डॉक्टर से पूछे बिना ही दवाई खाना बंद कर देते हैं.
डॉक्टर के पास इलाज कराने या फॉलो अप चेकअप के लिए नहीं जाते हैं.
यदि आपको कोई गंभीर बीमारी है, जिसके लिए दवाओं का सेवन हर दिन करना जरूरी है तो, दवाएं ना खाने से बीमारी बढ़ सकती है. इसमें डायबिटीज, हार्ट पेशेंट, थायरॉएड रोग से ग्रस्त लोगों को खास ख्याल रखना जरूरी है.
पिल फटीग के संकेत क्या हैं?
दवाओं के सेवन से बचना, डर, झुंझलाहट महसूस करना.
दवाएं लेना भूल जाना.
भावनात्मक रूप से थका हुआ महसूस करना.
सप्लीमेंट्स खाना बंद कर देना.
कोई भी दवा खाने का मन नहीं करना.
पिल फटीग से कैसे पाएं राहत?
एक बार अपने डॉक्टर से मिलकर चेक कराएं कि आप जो दवाइयां खा रहे हैं, उन्हें कब तक खाते रहना है. क्या सभी दवाइयां खाना अभी भी जरूरी हैं, ये कुछ बंद करने का समय आ गया है.कॉम्बिनेशन दवाइयों का इस्तेमाल कहां कर सकते हैं, ये देख सकते हैं. पिल ऑर्गेनाइजर या रिमाइंडर ऐप्स का उपयोग करना. किसी भी दवा के सेवन से कोई साइड एफेक्ट नजर आए तो अपने डॉक्टर से तुरंत बताएं.





