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Kanakata Pass Trek Bageshwar: अगर आप पहाड़ों में असली रोमांच और एडवेंचर के शौकीन हैं, तो उत्तराखंड के बागेश्वर में स्थित कनाकटा पास ट्रेक आपको जरूर आजमाना चाहिए. करीब 4550 मीटर की ऊंचाई पर स्थित यह ट्रेक आपको हिमालय की बर्फीली चोटियों के इतने करीब ले जाता है, जहां से नजारे किसी जन्नत जैसे लगते हैं. सुंदरढूंगा घाटी के घने जंगलों, मखमली बुग्यालों और रहस्यमयी देवीकुंड-नागकुंड से होकर गुजरने वाला यह सफर रोमांच से भरा हुआ है.
Trekking in Uttarakhand: उत्तराखंड के बागेश्वर में स्थित कनाकटा पास ट्रेक इन दिनों एडवेंचर और ट्रेकिंग प्रेमियों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहा है. सुंदरढूंगा घाटी से होकर गुजरने वाला यह ट्रेक अपने प्राकृतिक सौंदर्य और रोमांचक रास्तों के लिए जाना जाता है. करीब 4550 मीटर की ऊंचाई पर स्थित यह ट्रेक हिमालय की शानदार चोटियों के बेहद करीब पहुंचने का मौका देता है. यहां आने वाले पर्यटक शांत वातावरण और बर्फ से ढके पहाड़ों का आनंद लेते हैं. ट्रेक के दौरान घने जंगल, ऊंचे पहाड़ और हरे-भरे बुग्याल यात्रियों को बेहद आकर्षित करते हैं. हर साल बड़ी संख्या में युवा और विदेशी पर्यटक भी इस ट्रेक की ओर रुख कर रहे हैं.

कनाकटा पास ट्रेक का सफर कपकोट क्षेत्र के खाती-जातोली गांव से शुरू होता है. यह गांव पिंडर और सुंदरढूंगा घाटी के खूबसूरत प्राकृतिक वातावरण के बीच बसा हुआ है. यहां से ट्रेकिंग शुरू करते ही पर्यटकों को पहाड़ों की असली खूबसूरती देखने को मिलती है. रास्ते में बहती नदियां, देवदार और बुरांश के जंगल यात्रियों का मन मोह लेते हैं. स्थानीय ग्रामीण भी ट्रेकर्स की मदद करते नजर आते हैं. कई पर्यटक गांवों में रुककर स्थानीय संस्कृति और खानपान का आनंद भी लेते हैं. पहाड़ों की शांति और ताजी हवा इस सफर को और खास बना देती है. यही कारण है कि यह ट्रेक प्रकृति प्रेमियों की पसंद बनता जा रहा है.

कनाकटा पास ट्रेक के दौरान पड़ने वाले देवीकुंड और नागकुंड पर्यटकों के लिए मुख्य आकर्षण माने जाते हैं. ऊंचे पहाड़ों के बीच स्थित ये प्राकृतिक कुंड बेहद सुंदर दिखाई देते हैं. साफ पानी और आसपास फैली हरियाली यहां आने वालों को मंत्रमुग्ध कर देती है. ट्रेकर्स यहां कुछ समय रुककर प्राकृतिक शांति का आनंद लेते हैं. स्थानीय लोगों के अनुसार इन स्थलों का धार्मिक महत्व भी माना जाता है. सूर्योदय और सूर्यास्त के समय यहां का दृश्य बेहद मनमोहक दिखाई देता है. कई फोटोग्राफर और नेचर लवर्स इन खूबसूरत स्थानों की तस्वीरें लेने यहां पहुंचते हैं. हिमालयी वादियों के बीच बसे ये स्थल ट्रेक को और यादगार बना देते हैं.
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कनाकटा पास ट्रेक को मध्यम से चुनौतीपूर्ण श्रेणी का ट्रेक माना जाता है. लगभग 35 से 45 किलोमीटर लंबे इस ट्रेक को पूरा करने में करीब 12 दिन का समय लगता है. रास्ते में कई जगह खड़ी चढ़ाई और पथरीले रास्ते यात्रियों की परीक्षा लेते हैं. ऊंचाई बढ़ने के साथ मौसम भी तेजी से बदलता है, जिससे ट्रेक और रोमांचक बन जाता है. यहां आने वाले लोगों को शारीरिक रूप से फिट होना जरूरी है. हालांकि कठिन रास्तों के बावजूद यहां की प्राकृतिक सुंदरता सारी थकान मिटा देती है. एडवेंचर पसंद करने वाले युवाओं के लिए यह ट्रेक किसी रोमांचक अनुभव से कम नहीं माना जाता है.

पर्वतारोही जीतू दानू ने बताया कि कनाकटा पास ट्रेक के लिए जून, सितंबर और अक्टूबर का समय सबसे बेहतर माना जाता है. इन महीनों में मौसम अपेक्षाकृत साफ रहता है और हिमालय की चोटियां साफ दिखाई देती हैं. मानसून के दौरान रास्तों में फिसलन बढ़ जाती है, इसलिए सावधानी जरूरी होती है. गर्मियों में यहां का मौसम सुहावना रहता है, जिससे ट्रेकिंग का अनुभव और बेहतर हो जाता है. सितंबर और अक्टूबर में आसपास के बुग्याल और घाटियां बेहद खूबसूरत दिखाई देती हैं. इसी समय बड़ी संख्या में पर्यटक और ट्रेकर्स यहां पहुंचते हैं. साफ आसमान और ठंडी हवाएं यात्रियों को अलग ही सुकून देती हैं.

कनाकटा पास ट्रेक के दौरान हिमालय की कई खूबसूरत चोटियों के अद्भुत दृश्य देखने को मिलते हैं. बर्फ से ढकी ऊंची पहाड़ियां और दूर तक फैली घाटियां यात्रियों को रोमांचित कर देती हैं. सुबह के समय सूरज की किरणें जब पहाड़ों पर पड़ती हैं तो पूरा क्षेत्र सुनहरा दिखाई देता है. ट्रेकिंग करने वाले लोग इन नजारों को कैमरे में कैद करने का मौका नहीं छोड़ते. यहां का शांत वातावरण शहरों की भागदौड़ से दूर सुकून का एहसास कराता है. कई पर्यटक ध्यान और योग के लिए भी यहां पहुंचते हैं. प्रकृति के करीब समय बिताने वालों के लिए यह ट्रेक किसी स्वर्ग से कम नहीं माना जाता है

कनाकटा पास ट्रेक की लोकप्रियता बढ़ने से स्थानीय पर्यटन और रोजगार को भी फायदा मिल रहा है. ट्रेकिंग सीजन में स्थानीय युवक गाइड और पोर्टर के रूप में काम करते हैं. गांवों में होमस्टे और खाने-पीने की सुविधाओं से ग्रामीणों की आय बढ़ रही है. बाहर से आने वाले पर्यटक स्थानीय उत्पादों की खरीदारी भी करते हैं. इससे गांवों की आर्थिक स्थिति मजबूत हो रही है. प्रशासन भी ट्रेकिंग रूट को बेहतर बनाने की दिशा में प्रयास कर रहा है. पर्यटन बढ़ने से पहाड़ी क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा हो रहे हैं. स्थानीय लोगों का मानना है कि आने वाले समय में यह ट्रेक देश-विदेश के पर्यटकों के बीच और लोकप्रिय होगा.

कनाकटा पास ट्रेक प्रकृति और रोमांच का शानदार संगम माना जाता है. यहां आने वाले लोगों को घने जंगल, बुग्याल, झरने और हिमालयी चोटियों का अद्भुत अनुभव मिलता है. ट्रेक के दौरान कई दुर्लभ पक्षी और वन्य जीव भी दिखाई देते हैं. शांत वातावरण और ठंडी हवाएं यात्रियों को मानसिक सुकून देती हैं. प्रकृति प्रेमियों और एडवेंचर पसंद लोगों के बीच इसकी लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है. ट्रेकिंग के दौरान लोग पहाड़ों की संस्कृति और सभ्यता जीवनशैली को भी करीब से समझते हैं. उत्तराखंड के छिपे हुए खूबसूरत ट्रेक्स में कनाकटा पास अब तेजी से अपनी खास पहचान बना रहा है.





