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रीवा संजय गांधी अस्पताल के वरिष्ठ डॉ राहुल मिश्रा के अनुसार हमारे समाज में बहुत दिनों से यह मिथ चलता आ रहा है कि डिलीवरी के बाद महिलाओं को सिर और कान ढककर रखना चाहिए. इससे सिर और कान में हवा भर जाती है. यह एक प्रकार से जानकारी के आभाव में चलती आ रही बात हो सकती है.
डिलीवरी के बाद हर महिला को ढेरों सलाहें दी जाती हैं. सिर ढक लो, कान में हवा मत लगने दो, ठंडी चीज़ मत खाओ, लेकिन क्या वाकई इन सलाहों के पीछे कोई मेडिकल कारण है. क्या सच में सिर और कान ढकना जरूरी है या ये सिर्फ परंपरा है आइए जानते हैं डॉक्टर की राय.
विंध्य क्षेत्र में डिलीवरी के बाद महिलाओं को किस तरह अपना ख्याल रखना चाहिए यह बताने के लिए हर घर में अनुभवी और बड़ी महिलाएं मौजूद होती हैं. डॉक्टर के सुझाव के अलावा हर घर में कुछ परम्पराएं चलती आ रही होती हैं जिन्हें आम बोलचाल में आप दादी/नानी माँ के नुस्खे कह सकते हैं. इसी में उनका एक सुझाव सिर और कान ढकने का भी होता है.
महिलाओं को सिर और कान ढककर रखना चाहिए
रीवा संजय गांधी अस्पताल के वरिष्ठ डॉ राहुल मिश्रा के अनुसार हमारे समाज में बहुत दिनों से यह मिथ चलता आ रहा है कि डिलीवरी के बाद महिलाओं को सिर और कान ढककर रखना चाहिए. इससे सिर और कान में हवा भर जाती है. यह एक प्रकार से जानकारी के आभाव में चलती आ रही बात हो सकती है. डिलीवरी के बाद जब किसी भी महिला को सबसे ज्यादा देखभाल की जरुरत होती है तब ऐसी बड़ी- बुजुर्ग महिलाएं सुझाव देती रहती हैं. पुराने समय में जब लोगों को डिलीवरी के बाद होने वाले हार्मोनल बदलावों के बारे में नहीं पता था. जिसकी वजह से कई बार महिलाओं को डिप्रेशन भी हो जाता है. ऐसे में लोगों को लगता था कि सिर में इसलिए दर्द होता है. हवा भर जाती है, जिसे स्कार्फ की मदद से कान और सिर ढककर ठीक किया जा सकता है.
सिर और कान में ना जएं हवा
आपको यह जानकार हैरानी हो सकती है कि प्रेगनेंसी के बाद महिलाओं के सिर में दर्द होना, एंग्जायटी होना, आदि सामान्य लक्षण हैं जो धीरे धीरे अपने आप ठीक भी हो जाता है. लेकिन पुराने लोग या कहें जानकारी के अभाव वाले लोग इसे ही सिर और कान में हवा भरने का लक्षण मान लेते थे. यह परंपरा असल में पुराने समय की सोच पर आधारित है. यह सब सिर और कान में हवा भरने की वजह से हो रहा है. इसलिए उनसे कहा जाता था कि वे स्कार्फ या दुपट्टे से सिर और कान ढककर रखें.डिलीवरी के बाद महिलाओं के शरीर में बड़े पैमाने पर हार्मोनल बदलाव होते हैं. इसी कारण सिरदर्द, थकान, एंग्जायटी या मूड स्विंग जैसी परेशानियां हो सकती हैं. ये सामान्य लक्षण हैं. लेकिन जानकारी के अभाव में इन्हें गलत कारणों से जोड़ दिया गया. असलियत ये है कि सिर और कान ढकने से न तो हार्मोनल बदलाव रुकते हैं और न ही डिप्रेशन या सिरदर्द का इलाज होता है.





