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लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ औन इस हफ्ते अमेरिका का दौरा करेंगे. इसमें वो अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात करने वाले हैं. मीडिया रिपोर्ट में दावा है कि वो उनसे मिलकर ईरान के साथ हिजबुल्लाह को खत्म करने का प्लान रखेंगे.
ईरान जिस देश के लिए अपने लोगों की जान की परवाह नहीं कर रहा था, अब उसी देश का राष्ट्रपति अमेरिका जा रहा है. ये बात किसी और देश के लिए नहीं लेबनान के लिए हो रही है. लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ औन इस हफ्ते व्हाइट हाउस जा रहे हैं. वे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात करेंगे. करीब दो दशकों में यह पहला मौका है जब लेबनान का कोई राष्ट्रपति व्हाइट हाउस के दौरे पर जा रहा है.
दूसरी तरफ उनका दोस्त ईरान अभी भी अमेरिका के साथ युद्ध लड़ रहा है. वहीं जोसेफ औन के पास एक खास प्लान के साथ अमेरिकी राष्ट्रपति से मिलने जा रहे हैं. उनका मकसद ईरान के समर्थन वाले चरमपंथी संगठन हिजबुल्लाह के हथियारों को पूरी तरह खत्म करना. दक्षिणी लेबनान से इजरायली सेना को वापस भेजना है.
ईरान ने ट्रंप को लेबनान के लिए दिखाए थे तेवर
अमेरिका और ईरान की दुश्मनी के इतिहास में इस साल अप्रैल में एक बहुत बड़ा और ऐतिहासिक मोड़ आया था. दोनों देश किसी भी तीसरे देश में आमने-सामने बैठकर सीधे बातचीत के लिए राजी हुए थे. दोनों देशों के प्रतिनिधियों ने पाकिस्तान की धरती पर मुलाकात की.
लेकिन इस मुलाकात की मेज सजने से पहले ही ईरान ने अपने कड़े तेवर दिखा दिए थे. ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद बाक़िर क़ालिबाफ ने साफ कर दिया था कि तेहरान दो शर्तों पर रत्ती भर भी समझौता नहीं करेगा. इसमें ईरान की पहली मांग यह थी कि इजरायल को लेबनान में तुरंत सीजफायर करना होगा. दूसरी मांग यह थी कि विदेशों में सीज किए गए ईरान के अरबों डॉलर के एसेट्स अनफ्रीज किया जाए. यानी ईरान ने अमेरिका से सीजफायर के लिए पहली मांग लेबनान के साथ युद्धबंदी रखी थी.
ट्रंप से मुलाकात और मास्टरप्लान
अब राष्ट्रपति औन ट्रंप से गुहार लगाएंगे कि वे 26 जून को हुए अमेरिकी समझौते को लागू कराने के लिए इजरायल पर दबाव बनाएंगे. वे ट्रंप को एक लिखित रोडमैप सौंपने वाले हैं. इसमें यह बताया गया है कि हिजबुल्लाह के विशाल हथियारों के जखीरे को धीरे-धीरे कैसे खत्म किया जाएगा.
लेबनानी अधिकारियों का मानना है कि केवल ट्रंप ही इजरायल को अपनी सेना वापस बुलाने के लिए राजी कर सकते हैं. इससे लेबनान सरकार को अपने पूरे देश पर फिर से नियंत्रण मिल जाएगा.
कौन हैं राष्ट्रपति जोसेफ औन?
जोसेफ औन लेबनानी सेना के पूर्व प्रमुख रह चुके हैं. पिछले साल राष्ट्रपति बनने से पहले उन्होंने सिविल वॉर और आईएसआईएस के खिलाफ लड़ाइयों में अहम भूमिका निभाई थी. साल 2024 में इजरायल के साथ हुए युद्ध में हिजबुल्लाह को भारी नुकसान पहुंचा था. इसके अलावा सीरिया के राष्ट्रपति बशर अल-असद की सत्ता गिरने से भी हिजबुल्लाह कमजोर पड़ गया. राष्ट्रपति बनते ही औन ने कसम खाई थी कि देश में हथियार रखने का हक केवल सरकारी सेना को होगा. किसी चरमपंथी गुट को नहीं.
युद्ध और बढ़ता राजनीतिक तनाव
राष्ट्रपति पद के पहले साल में औन ने हिजबुल्लाह के ठिकाने ढूंढकर उनके हथियार जब्त करने का काम शुरू किया था. लेकिन इसी साल 2 मार्च को अमेरिका और ईरान के बीच छिड़ी जंग में हिजबुल्लाह ने ईरान के समर्थन में इजरायल पर हमला बोल दिया.
इसके जवाब में इजरायल की कार्रवाई से लेबनान में 4300 से ज्यादा लोग मारे गए. लाखों लोग बेघर हो गए है. हालांकि हिजबुल्लाह उनके इस कदम का कड़ा विरोध कर रहा है, लेकिन औन का साफ कहना है कि ईरान की जंग का हर्जाना लेबनान की जनता नहीं भरेगी.
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