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Kanakata Pass Trek : बागेश्वर का कनाकटा ट्रेक सितंबर और अक्टूबर में हिमालय की ऊंची चोटियों के शानदार दृश्यों के लिए जाना जाता है. यह ट्रेक रोमांचक होने के साथ-साथ चुनौतीपूर्ण भी है, जिसके लिए उचित तैयारी और गाइड की जरूरत होती है. लोकल 18 से पर्वतारोही जीतू दानू बताते हैं कि समुद्र तल से करीब 4,600 मीटर की ऊंचाई तक पहुंचने वाला यह ट्रेक मध्यम से कठिन श्रेणी में आता है. इस ट्रेक को पूरा करने में आठ से 10 दिन लग सकते हैं. ट्रेक के दौरान पर्याप्त पानी पीना, आराम करना और शरीर के संकेतों को नजरअंदाज नहीं करना जरूरी है. गर्म कपड़े, रेन जैकेट, टोपी, दस्ताने, पानी की बोतल, टॉर्च, प्राथमिक उपचार सामग्री और व्यक्तिगत दवाइयां साथ रखना जरूरी है.
बागेश्वर की सुंदरढूंगा घाटी में स्थित कनाकटा पास ट्रेक सितंबर और अक्टूबर में घूमने और रोमांच पसंद करने वालों के लिए शानदार विकल्प है. मानसून के बाद मौसम साफ रहने से हिमालय की ऊंची चोटियों के सुंदर और स्पष्ट नजारे दिखाई देते हैं. समुद्र तल से करीब 4,483 से 4,600 मीटर की ऊंचाई तक पहुंचने वाला यह ट्रेक मध्यम से कठिन श्रेणी में आता है. ट्रेक को पूरा करने में सामान्यतः आठ से दस दिन लग सकते हैं.
कनाकटा पास ट्रेक की यात्रा खाती या जातोली गांव से शुरू की जाती है. इन गांवों तक पहुंचने के बाद असली ट्रेकिंग अनुभव शुरू होता है. शुरुआती रास्तों में पहाड़ी पगडंडियां, जंगल और ग्रामीण क्षेत्र दिखाई देते हैं. धीरे-धीरे ऊंचाई बढ़ने के साथ वातावरण बदलने लगता है और हिमालयी क्षेत्र की खूबसूरती सामने आती है. सुंदरढूंगा घाटी की ओर बढ़ते हुए यात्रियों को प्राकृतिक नजारों के साथ कठिन चढ़ाई का सामना भी करना पड़ता है. इसलिए ट्रेक से पहले पैदल चलने और चढ़ाई का अभ्यास करना उपयोगी रहता है.
कनाकटा पास ट्रेक पर सुंदरढूंगा ग्लेशियर और बालूनी टॉप प्रमुख आकर्षणों में शामिल हैं. ऊंचाई वाले क्षेत्र में पहुंचने के बाद यात्रियों को बर्फ से ढके पहाड़, विशाल चट्टानें और खूबसूरत हिमालयी नजारे देखने को मिलते हैं. सुंदरढूंगा घाटी अपनी प्राकृतिक सुंदरता और शांत वातावरण के लिए खास पहचान रखती है. ट्रेक के दौरान अलग-अलग स्थानों पर रुककर आसपास की चोटियों और घाटी के नजारे देखे जा सकते हैं. ऊंचाई बढ़ने के साथ ऑक्सीजन की मात्रा कम होती जाती है.
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कनाकटा पास की यात्रा में देवी कुंड और नाग कुंड जैसे प्राकृतिक स्थल यात्रियों का ध्यान खींचते हैं. पहाड़ों के बीच स्थित ये कुंड ट्रेक की खूबसूरती को और बढ़ाते हैं. रास्ते में शांत वातावरण, ऊंचे पहाड़ और हरियाली यात्रियों को प्रकृति के करीब होने का अनुभव कराते हैं. सितंबर-अक्टूबर में मानसून समाप्त होने के बाद रास्तों पर हरियाली बनी रहती है. आसमान साफ होने पर दूर तक पर्वत दिखाई देते हैं. हालांकि ऊंचाई वाले क्षेत्रों में मौसम अचानक बदल सकता है.
कनाकटा पास ट्रेक की सबसे खास बात यहां से दिखाई देने वाले हिमालयी दृश्य हैं. साफ मौसम में यात्रियों को नंदा देवी, मैकटोली और पंवली द्वार जैसी ऊंची चोटियों के शानदार नजारे देखने को मिल सकते हैं. सितंबर और अक्टूबर में मानसून के बाद वातावरण अपेक्षाकृत साफ रहने से पर्वतों की दृश्यता बेहतर रहती है. सुबह के समय पहाड़ों पर पड़ती सूर्य की किरणें यहां के प्राकृतिक दृश्य को और आकर्षक बना देती हैं. यही कारण है कि यह ट्रेक फोटोग्राफी और प्रकृति प्रेमियों के लिए भी खास माना जाता है.
कनाकटा पास ट्रेक को पूरा करने में सामान्य तौर पर आठ से दस दिन का समय लग सकता है. समय मौसम, मार्ग की स्थिति, समूह की गति और यात्रियों की शारीरिक क्षमता पर निर्भर करता है. यह आसान ट्रेक नहीं है, इसलिए यात्रा से पहले नियमित पैदल चलने और चढ़ाई का अभ्यास करना बेहतर रहेगा. ऊंचाई लगभग 4,500 मीटर तक पहुंचने के कारण शरीर पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है. ट्रेक के दौरान पर्याप्त पानी पीना, आराम करना और शरीर के संकेतों को नजरअंदाज नहीं करना जरूरी है.
पर्वतारोही जीतू दानू बताते हैं कि कनाकटा पास जैसे ऊंचाई वाले और कठिन ट्रेक के लिए सही सामान बेहद जरूरी है. यात्रियों को मजबूत हाई-एंकल ट्रेकिंग जूते पहनने चाहिए, ताकि पथरीले और असमान रास्तों पर पैरों को बेहतर सहारा मिल सके. ट्रेकिंग पोल चढ़ाई और उतराई के दौरान संतुलन बनाने में मदद करते हैं. इसके अलावा गर्म कपड़े, रेन जैकेट, टोपी, दस्ताने, पानी की बोतल, टॉर्च, प्राथमिक उपचार सामग्री और व्यक्तिगत दवाइयां साथ रखना उपयोगी है.
कनाकटा पास ट्रेक रोमांचक होने के साथ चुनौतीपूर्ण भी है. करीब 4,500 मीटर तक की ऊंचाई और कठिन पहाड़ी रास्तों को देखते हुए, पहली बार ट्रेकिंग करने वालों के लिए अनुभवी गाइड या संगठित समूह के साथ यात्रा करना बेहतर विकल्प है. गाइड रास्ते की स्थिति, मौसम और सुरक्षित पड़ावों की जानकारी दे सकता है. ट्रेक पर निकलने से पहले अपनी फिटनेस का आकलन करना चाहिए और जरूरत के अनुसार चिकित्सकीय सलाह लेना उपयोगी रहेगा.




