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Ramdevra Yatra 2026: रामदेवरा जाने वाले जातरुओं के लिए पाली-जोधपुर हाईवे पर स्थित सिद्ध मंदिर आस्था के खास पड़ाव हैं. लंबी पैदल यात्रा के दौरान श्रद्धालु इन मंदिरों में रुककर दर्शन और पूजा कर सकते हैं. हाईवे के आसपास मौजूद धार्मिक स्थलों की जानकारी यात्रियों के लिए उपयोगी साबित हो सकती है. बाबा रामदेवरा के दर्शन के लिए निकलने वाले जातरू इन मंदिरों को अपनी यात्रा में शामिल कर धार्मिक अनुभव को और खास बना सकते हैं.
पाली-जोधपुर राष्ट्रीय राजमार्ग पर पाली से लगभग 20 किलोमीटर दूर चोटिला गांव के पास प्रसिद्ध ‘ॐ बन्ना धाम’ स्थित है. यहां किसी पारंपरिक मूर्ति के बजाय 350cc रॉयल एनफील्ड बुलेट बाइक की पूजा की जाती है. मान्यता है कि ओम बन्ना (ओम सिंह राठौड़) की आत्मा आज भी हाईवे पर यात्रियों की रक्षा करती है और इस स्थान पर मन्नत मांगने से यात्रा सुरक्षित और मंगलमय संपन्न होती है.
पाली जिले के देसूरी-सारंगवास क्षेत्र के पास स्थित श्री सोनाणा खेतलाजी का धाम क्षेत्रपाल देव के रूप में पूजा जाता है. पाली-जोधपुर मार्ग पर यात्रा करने वाले जातरू और स्थानीय निवासी किसी भी नए कार्य या धार्मिक यात्रा की शुरुआत में खेतलाजी का आशीर्वाद अवश्य लेते हैं. भाद्रपद और चैत्र माह में यहां श्रद्धालुओं का विशाल मेला भरता है और माना जाता है कि यहां आने से सभी बाधाएं दूर होती हैं.
पाली से जोधपुर मार्ग पर बिहाड़ा-कापरड़ा के पास स्थित कापरड़ा जैन तीर्थ अपनी अलौकिक वास्तुकला और शांतिपूर्ण वातावरण के लिए जाना जाता है. हाईवे के बिल्कुल पास होने के कारण रामदेवरा जाने वाले पदयात्री और वाहन चालक यहां कुछ देर विश्राम करने और भगवान पार्श्वनाथ के दर्शन के लिए रुकते हैं. मंदिर परिसर का शांत माहौल लंबी यात्रा की थकान को दूर कर मन को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर देता है.
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जोधपुर से आगे रामदेवरा मार्ग पर थोड़ा सा मार्ग बदलकर ओसियां स्थित सुप्रसिद्ध सच्चियाय माता मंदिर और प्राचीन जैन मंदिरों के दर्शन किए जा सकते हैं. थार मरुस्थल के प्रवेश द्वार पर बसा ओसियां अपने आठवीं से बारहवीं शताब्दी के भव्य नक्काशीदार मंदिरों के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है. बाबा रामदेवरा जाने वाले कई जातरू यात्रा को पूर्ण और सफल बनाने के लिए मां सच्चियाय के दरबार में धोक लगाने पहुंचते हैं.
जोधपुर शहर में प्रवेश करते ही मसूरिया पहाड़ी पर बाबा रामदेव जी के गुरु, स्वामी बालीनाथ जी का ऐतिहासिक मंदिर स्थित है. रामदेवरा की मुख्य यात्रा से पहले मसूरिया मंदिर में गुरु बालीनाथ के दर्शन करने की परंपरा सदियों पुरानी है. मान्यता है कि गुरु के दर्शन किए बिना रामदेवरा की यात्रा अधूरी मानी जाती है, इसीलिए देश भर से आ रहे लाखों श्रद्धालु पहले मसूरिया धाम पहुंचकर शीश नवाते हैं.




