Hormuz Blockade | Hormuz Crisis US Iran | होर्मुज की ये कैसी नाकेबंदी, जो ईरान की नाक के नीचे से गुजर गए 34 जहाज, ट्रंप के इस संदेश का सीक्रेट समझिये


अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को दावा किया कि होर्मुज स्ट्रेट से 34 जहाज गुजरे हैं, जो ईरान के साथ जंग शुरू होने के बाद का सबसे ऊंचा आंकड़ा है. ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर लिखा, ‘कल होर्मुज़ जलडमरूमध्य से 34 जहाज गुजरे, जो इस मूर्खतापूर्ण ब्लॉकेड की शुरुआत के बाद से अब तक की सबसे बड़ी संख्या है.’ हालांकि मैरिटाइम डेटा फर्म Kpler ने 14 जहाजों के होर्मुज से गुजरने की जानकारी दी है. यहां हैरान करने वाली बात यह है कि एक तरफ तो डोनाल्ड ट्रंप होर्मुज की नाकेबंदी की बात कह रहे हैं तो वहीं दूसरी तरफ वहां से जहाजों के गुजरने की भी जानकारी दे रहे हैं. ऐसे में सवाल उठता है कि ट्रंप के इस मैसेज का मकसद क्या है? क्या ट्रंप का यह मैसेज सिर्फ एक दावा है या इसमें कोई गहरा संदेश छिपा है? चलिये समझते हैं…

विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप का यह पोस्ट मनोवैज्ञानिक युद्ध का हिस्सा है. ईरान पर नाकेबंदी की घोषणा के बावजूद उन्होंने 34 जहाजों का आंकड़ा देकर दुनिया को यह संदेश दिया कि अमेरिकी नौसेना की मौजूदगी के बावजूद होर्मुज पूरी तरह बंद नहीं हुआ है और अमेरिका स्थिति पर नियंत्रण रखे हुए है.

नाकेबंदी के बीच कैसे निकले जहाज?

अमेरिका ने रविवार को इस्लामाबाद में 21 घंटे चली बातचीत के टूटने के बाद होर्मुज के ईरानी बंदरगाहों पर नाकेबंदी की घोषणा की थी. यूएस सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने कहा कि सोमवार दोपहर 2:30 बजे (1400 GMT) से नाकेबंदी प्रभावी हो गई. यह नाकेबंदी केवल ईरानी बंदरगाहों से आने-जाने वाले जहाजों पर लागू है, जबकि गैर-ईरानी बंदरगाहों वाले जहाजों को रोका नहीं जाएगा.
ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी नौसेना अब ईरानी तटों के आसपास किसी भी जहाज को रोक लेगी. उन्होंने चेतावनी दी कि अगर ईरानी ‘फास्ट अटैक बोट्स’ अमेरिकी बेड़े के करीब आएं तो उन्हें तुरंत नष्ट कर दिया जाएगा. USS त्रिपोली (LHA 7) जैसे अत्याधुनिक युद्धपोत अरब सागर में तैनात हैं, जिसमें F-35B स्टेल्थ फाइटर जेट्स और MV-22 ओस्प्रे विमान शामिल हैं.

लेकिन नाकेबंदी शुरू होने से ठीक पहले दो ईरानी तेल टैंकर ऑरोरा और न्यू फ्यूचर होर्मुज से गुजर गए. Kpler डेटा के मुताबिक रविवार को कुल 14 जहाज गुजरे, जबकि ट्रंप ने 34 का आंकड़ा दिया. कुछ विश्लेषक मानते हैं कि ट्रंप ने ईरानी जहाजों सहित कुल ट्रैफिक या संभावित जहाजों को शामिल करके आंकड़ा बढ़ा-चढ़ाकर बताया हो, ताकि ईरान को यह दिखाया जाए कि अमेरिका हर गतिविधि पर नजर रखे हुए है.

ट्रंप का क्या है मैसेज?

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को पत्रकारों से कहा, ‘हम सुबह ही सही लोगों से फोन पर बात कर चुके हैं. वे डील करना चाहते हैं, वे बहुत बुरी तरह डील करना चाहते हैं.’ इस्लामाबाद वार्ता में अमेरिका ने खास तौर से होर्मुज को पूरी तरह खोलना, कोई टोल न लेना, यूरेनियम संवर्धन पर पूर्ण प्रतिबंध की मांग थी.

वहीं ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता एस्माइल बघई ने कहा कि बातचीत ‘अच्छी चल रही’ थी, लेकिन अमेरिका होर्मुज और परमाणु कार्यक्रम जैसे मुद्दों पर अड़ा रहा. ईरान का दावा है कि वह अभी भी होर्मुज पर नियंत्रण रखता है और अमेरिकी नाकेबंदी से तेल की कीमतें बढ़ेंगी.

तेल की कीमतें सोमवार को 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गईं. ईरान के संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाकेर कालिबाफ ने अमेरिकियों को चिढ़ाते हुए कहा, ‘पेट्रोल पंप के आंकड़े का मजा लो… जल्द ही तुम 4-5 डॉलर प्रति गैलन के दिनों को याद करोगे.’ अमेरिका में फिलहाल औसत पेट्रोल की कीमत 4.13 डॉलर प्रति गैलन है, जो युद्ध से पहले 2.98 डॉलर थी.

नाकेबंदी का असर और ईरान की चेतावनी

विशेषज्ञों का अनुमान है कि यह नाकेबंदी ईरान को रोजाना लगभग 27.6 करोड़ डॉलर के निर्यात और 15.9 करोड़ डॉलर के आयात का नुकसान पहुंचाएगी… यानी महीने में 1.3 अरब डॉलर का आर्थिक झटका. ईरान ने चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका बमबारी फिर शुरू करता है तो तेहरान तैयार है. ईरानी सैन्य प्रवक्ता ने कहा, ‘अगर हमारे बंदरगाहों पर खतरा हुआ तो फारस की खाड़ी और ओमान सागर का कोई बंदरगाह सुरक्षित नहीं रहेगा.’

उधर ट्रंप ने कहा है कि अमेरिकी बल ‘लॉक एंड लोडेड’ हैं और जरूरत पड़ी तो बाकी काम पूरा कर देंगे. पाकिस्तान की मध्यस्थता में दो हफ्ते का युद्धविराम चल रहा है, लेकिन नाकेबंदी ने तनाव को नया मोड़ दे दिया है. यह युद्ध अब सिर्फ सैन्य नहीं, बल्कि आर्थिक सहनशक्ति की परीक्षा बन चुका है. समय बताएगा कि होर्मुज की इस ‘नाकेबंदी’ में आखिर कौन जीतता है.



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