उन्होंने हाल की अमेरिकी आर्थिक अस्थिरता की भी आलोचना की। उन्होंने कहा, “अमेरिका की एक भरोसेमंद आर्थिक साझेदार के तौर पर पहचान बेतरतीब टैरिफ रोलआउट और खुद से लगाई गई अस्थिरता से प्रभावित हुई है। ऐसे में यह जरूरी है कि कांग्रेस दिखाए कि ग्लोबल फाइनेंशियल सिस्टम में अमेरिका एक अहम हिस्सा बने रहने के लिए तैयार है।”
प्रस्ताव में बताया गया है कि सीनेटरों ने डॉलर के दबदबे को कमजोर करने और विकासशील दुनिया में बीजिंग का असर बढ़ाने के लिए चीन के लंबे समय के कैंपेन के बारे में क्या बताया।
इसमें अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के डेटा का जिक्र है, जिससे पता चलता है कि 1999 में ग्लोबल करेंसी रिजर्व में डॉलर का हिस्सा लगभग 71 फीसदी था, लेकिन 2025 की तीसरी तिमाही तक यह घटकर 56.82 फीसदी रह गया। इसी समय के दौरान चीनी युआन का हिस्सा 1.93 फीसदी था।
इस कदम में चीन पर नॉन-मार्केट, फिक्स्ड एक्सचेंज रेट बनाए रखने का भी आरोप लगाया गया है। इससे युआन की कीमत कम रहती है और व्यापार में असंतुलन पैदा होता है।
लॉमेकर्स ने आगे चीन के बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव की ओर इशारा किया, जिसके बारे में उन्होंने कहा कि इससे विकासशील देशों में चीनी कैपिटल पर निर्भरता बढ़ गई है। प्रस्ताव में कहा गया है कि बीजिंग ने 2013 से इस इनिशिएटिव के तहत दुनिया भर में 1 ट्रिलियन डॉलर से ज्यादा का निवेश किया है।





