AI की बढ़ती ताकत का बड़ा साइड इफेक्ट! iPhone, लैपटॉप, गेमिंग कंसोल और कारें क्यों हो सकती हैं महंगी?


Powered by :

Last Updated:

AI की बढ़ती डिमांड की वजह से दुनिया में मेमोरी चिप्स की कमी बढ़ रही है. इसका असर स्मार्टफोन, लैपटॉप, गेमिंग कंसोल, क्लाउड सर्विस और दूसरे इलेक्ट्रॉनिक प्रोडक्ट्स की कीमतों पर पड़ सकता है. जानिए पूरा मामला.

ख़बरें फटाफट

AI का साइड इफेक्ट! iPhone, लैपटॉप, गेमिंग कंसोल और कारें हो सकती हैं महंगी?Zoom

AI की बढ़ती ताकत का बड़ा साइड इफेक्ट! iPhone, लैपटॉप, गेमिंग कंसोल और कारें क्यों हो सकती हैं महंगी?

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की तेज़ी से बढ़ती डिमांड अब सिर्फ टेक कंपनियों तक सीमित नहीं रही. इसका असर आम ग्राहकों की जेब पर भी पड़ सकता है. हाल ही में ऐपल ने मेमोरी चिप्स की बढ़ती कीमतों का हवाला देते हुए कुछ मैकबुक और आईपैड मॉडल्स के दाम बढ़ाए हैं. अब एक्सपर्ट्स का मानना है कि आने वाले समय में स्मार्टफोन, लैपटॉप, गेमिंग कंसोल, क्लाउड सर्विस और यहां तक कि कारें भी महंगी हो सकती हैं.

दरअसल, OpenAI, गूगल, माइक्रोसॉफ्ट, मेटा, अमेज़न और Nvidia जैसी बड़ी कंपनियां AI इंफ्रास्ट्रक्चर पर अरबों डॉलर खर्च कर रही हैं. AI मॉडल्स को चलाने के लिए बड़ी मात्रा में हाई बैडविद मेमोरी (HBM) की जरूरत होती है. यही वजह है कि सैमसंग, SK Hynix और माइक्रोन जैसी कंपनियां अब HBM चिप्स के उत्पादन पर ज्यादा ध्यान दे रही हैं, जिससे सामान्य DRAM और NAND मेमोरी चिप्स की सप्लाई कम होती जा रही है.

HBM एक एडवांस मेमोरी टेक्नोलॉजी है, जो AI प्रोसेसर के साथ मिलकर बेहद तेज डेटा प्रोसेसिंग करती है. वहीं DRAM फोन और लैपटॉप की टेम्प्रेरी मेमोरी का काम करती है, जबकि NAND स्टोरेज के लिए इस्तेमाल होती है. AI की बढ़ती मांग के कारण इन पारंपरिक चिप्स की उपलब्धता प्रभावित हो रही है.

रिपोर्ट्स के मुताबिक, 2026 में दुनिया में बनने वाली करीब 70% मेमोरी चिप्स AI इंडस्ट्री इस्तेमाल कर रही है. Micron ने भी बताया है कि हालिया तिमाही में DRAM चिप्स की कीमतें 60% से ज्यादा और NAND चिप्स की कीमतें 80% से ज्यादा बढ़ चुकी हैं.

महंगे हो सकते हैं लैपटॉप, टैब, गेमिंग
अगर यही स्थिति बनी रही तो कंपनियां बढ़ी हुई लागत का बोझ ग्राहकों पर डाल सकती हैं. इसका असर स्मार्टफोन, लैपटॉप, टैबलेट, गेमिंग कंसोल और क्लाउड सर्विस की कीमतों पर दिखाई दे सकता है. ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री भी इससे छूटी हुई नहीं रहेगी, क्योंकि मॉडर्न कारों में हजारों सेमीकंडक्टर चिप्स का इस्तेमाल होता है.

भारत के लिए भी ये एक अहम मुद्दा है. देश दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा स्मार्टफोन बाजार है और इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग का बड़ा केंद्र बन रहा है. ऐसे में अगर ग्लोबल लेवल पर मेमोरी चिप्स की कीमतें बढ़ती हैं, तो भारत में बिकने वाले इलेक्ट्रॉनिक प्रोडक्ट्स भी महंगे हो सकते हैं. हालांकि, सरकार का सेमीकंडक्टर मिशन भविष्य में इस निर्भरता को कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है.

About the Author

authorimg

Afreen Afaq

Afreen Afaq has started her career with Network 18 as a Tech Journalist, and has more than six years experience in ‘Mobile-Technology’ beat. She is a high-performing professional with an established and proven …और पढ़ें



Source link

Nemish Agrawal
Nemish Agrawalhttps://tv1indianews.in
Tv Journalist • Editor • Writer Digital Creator • Photographer Travel Vlogger • Web-App Developer IT Cell • Social Worker

Latest articles

spot_imgspot_img

Related articles

Leave a reply

Please enter your comment!
Please enter your name here

spot_imgspot_img