उतार-चढ़ाव भरे सत्र के बाद शेयर बाजार मामूली बढ़त के साथ हरे निशान में बंद और रुपया हुआ मजबूत


भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा रेपो दर को अपरिवर्तित रखने और पश्चिम एशिया में तनाव के नए संकेतों के बाद तेल की कीमतों में वृद्धि के चलते हफ्ते के तीसरे कारोबारी दिन बुधवार को भारतीय शेयर बाजार दिन के उतार-चढ़ाव भरे सत्र के बाद मामूली बढ़त के साथ हरे निशान में बंद हुआ। इस दौरान प्रमुख बेंचमार्क सेंसेक्स और निफ्टी 50 ने अपने अधिकांश इंट्राडे लाभ को खो दिया और अपने दिन के उच्चतम स्तर से नीचे आ गए।

इस बीच, 30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 152 अंक यानी 0.19 प्रतिशत बढ़कर 78,581 पर बंद हुआ, तो वहीं एनएसई निफ्टी 50 करीब 10 अंक यानी 0.04 प्रतिशत की मामूली बढ़त के साथ 24,624.65 पर बंद हुआ।

दिन के कारोबार में सेंसेक्स अपने पिछले बंद 78,428.95 से 0.79 प्रतिशत की तेजी के साथ 79,055.38 पर खुला, जो इसका इंट्रा-डे हाई रहा और एक समय इसने 78,285.74 का दिन का निचला स्तर छुआ।

वहीं, निफ्टी 50 अपने पिछले बंद 24,614.90 से 0.22 प्रतिशत की मामूली बढ़त के साथ 24,669.20 पर खुला, और दिन के कारोबार में एक समय इसने 24,677.60 का इंट्रा-डे हाई तो एक समय 24,497.95 का इंट्रा-डे लो बनाया।

व्यापक बाजार में, निफ्टी मिडकैप और निफ्टी स्मॉलकैप क्रमशः 0.18 प्रतिशत और 0.76 प्रतिशत की बढ़त के साथ बंद हुए।

वहीं, सेक्टरवार देखें तो निफ्टी मेटल, निफ्टी रियल्टी और निफ्टी ऑटो ने बेहतर प्रदर्शन किया, जबकि निफ्टी प्राइवेट बैंक और निफ्टी बैंक का प्रदर्शन खराब रहा।

निफ्टी50 इंडेक्स में श्रीराम फाइनेंस, ग्रासिम इंडस्ट्रीज, जेएसडब्ल्यू स्टील, हिंडाल्को, एनटीपीसी और बजाज-ऑटो सबसे ज्यादा लाभ कमाने वाले शेयरों में शामिल रहे, जबकि टीसीएस, अपोलो हॉस्पिटल, एचसीएल टेक, सन फार्मा, जियो फाइनेंशियल सर्विसेज और एसबीआई लाइफ के शेयरों में सबसे ज्यादा कमजोरी देखने को मिली।

इस बीच, बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण (मार्केट कैप) पिछले सत्र के 489.5 लाख करोड़ रुपए से बढ़कर 492.2 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा हो गया, जिससे निवेशकों को एक ही सत्र में 2.5 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा का मुनाफा हुआ।

आरबीआई द्वारा किसी भी अप्रत्याशित बदलाव से बचने और ब्याज दरों में यथास्थिति बनाए रखने के बाद बाजार का माहौल काफी हद तक सकारात्मक बना रहा। एमपीसी ने अगस्त 2026 की नीति बैठक में नीतिगत रेपो दर को 5.25 प्रतिशत पर अपरिवर्तित रखा और ‘तटस्थ’ रुख बनाए रखा।

इसके अलावा, केंद्रीय बैंक ने इस बात पर जोर दिया कि वित्त वर्ष 2027 में भारत की आर्थिक वृद्धि 6.7 प्रतिशत पर स्वस्थ बनी रहेगी, जबकि सीपीआई मुद्रास्फीति 5 प्रतिशत रहने की उम्मीद है।



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