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Best Fish Source of Omega 3 Fatty Acid: बिहार और बंगाल वालों के लिए मछली सबसे पसंदीदा नॉन-वेज आइटम है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि किस मछली में ओमेगा 3 फैटी एसिड की मात्रा सबसे ज्यादा होती है और कौन सी मछली में कितने पोषक तत्व होते हैं. साथ ही किस मछली के सेवन से हार्ट डिजीज, गठिया, लिवर डिजीज आदि से राहत मिलती है. यदि आपको नहीं पता तो आइए इसे जानते हैं.
Best Fish Source of Omega 3 Fatty Acid: मछलियां नॉन-वेज में सबसे बेस्ट मानी जाती है. रेड मीट की तरह मछलियों का सेवन किसी तरह का नुकसान नहीं पहुंचाता. दूसरी ओर मछली खाने के कई फायदे हैं. मछली में सबसे ज्यादा प्रोटीन होता है लेकिन इसमें अन्य माइक्रोन्यूट्रेंट्स की भी कोई कमी नहीं होती है. मछलियों में गुड फैट की मात्रा भी ज्यादा होती है. इसमें ओमेगा 3 फैटी एसिड हमारे लिए अत्यंत जरूरी है. इसकी बहुत कम जरूरत होती है लेकिन यह हार्ट और ब्रेन के लिए अमृत होता है.यहां हम यह बताएंगे कि किस मछली में ओमेगा 3 फैटी एसिड ज्यादा होता है.

बिहार और बंगाल में मछलियों का सबसे ज्यादा सेवन किया जाता है. यहां रूई, कटला, हिलसा, मृगल, पोना, सर्पुन्ती, पारशे, पाबदा, भेटकी से लेकर झींगा तक, सैकड़ों तरह की मछलियों का सेवन किया जाता है. लेकिन जब उनसे पूछा जाए कि सेहत के लिए पौष्टिक मछली कौन सी है तो कई लोग फिर से असमंजस में पड़ जाते हैं. आज इस रिपोर्ट में आपको ऐसी ही एक मछली के बारे में बताएंगे. भारत के विभिन्न भागों में अलग-अलग प्रकार की मछलियां पाई जाती हैं, जो उस क्षेत्र की विशेषता होती हैं. लेकिन आजकल ये मछलियाँ विशाल बाजार के कारण लगभग हर जगह उपलब्ध हैं. ऐसी ही एक मछली दक्षिण भारत में बहुत लोकप्रिय है, जो बहुत पौष्टिक भी है.

यहां जिस मछली का नाम बताया जा रहा है उसे बिहार में बहुत अच्छा नहीं माना जाता है लेकिन इसमें पौष्टिक तत्व का खजाना पाया जाता है. दक्षिण भारत में इस मछली का नाम पावलप्पराई है. इसे बिहार और बंगाल में तिलापिया के नाम से जाना जाता है. यह मछली मुख्य रूप से भारतीय तटीय जलक्षेत्र में पाई जाती है. आइए आज इस रिपोर्ट में पावलप्पराई मछली के फायदों के बारे में जानते हैं.
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तिलापिया या पावलप्पराई मछली का साइज 1 किलो के आसपास होता है. यह बेहद मुलायम मांस के लिए प्रसिद्ध है. इसे कभी-कभी मालाबार किंगफिश भी कहा जाता है. डॉ. बी.डी. पाठक बताते हैं, तिलापिया प्रोटीन का अच्छा स्रोत है और इसमें वसा बहुत कम होती है. यह मांस से भी अधिक पौष्टिक है. इसलिए इस मछली को श्रेष्ठ और स्वास्थ्यवर्धक मानी जाती है. तिलापिया में सोडियम और कैलोरी भी कम होती है और कुल वसा की मात्रा भी कम होती है. इसके अलावा जो इसकी सबसे ज्यादा पौष्टिकता वाली बात है वह यह है कि तिलापिया में ओमेगा-3 और ओमेगा-6 फैटी एसिड होते हैं, जो हमारे हार्ट, आंखों और जोड़ों की हेल्थ के लिए बहुत फायदेमंद है.

वैसे तो सबसे ज्यादा ओमेगा 3 फैटी एसिड सैल्मन मछली में पाई जाती है लेकिन तिलापिया में भी कम ओमेगा 3 फैटी एसिड नहीं पाया जाता है. तिलापिया ओमेगा 3 फैटी एसिड का शानदार स्रोत है. डॉक्टरों के मुताबिक तिलापिया मछली खाने से सूजन कम होती है. यह ओमेगा-3 फैटी एसिड से भरपूर होती है, जो ट्राइग्लिसराइड के स्तर को कम करने में सहायक होते हैं. इसके अलावा, यह मछली धमनियों में प्लाक जमने की प्रक्रिया को भी धीमा करती है.

अध्ययनों से पता चला है कि प्रतिदिन कम से कम 250 मिलीग्राम ओमेगा-3 का सेवन करने से हार्ट डिजीज से होने वाली मौत का खतरा 35 प्रतिशत तक कम हो जाता है. इसलिए तिलापिया मछली का नियमित सेवन आपके हार्ट को हेल्दी रखने में सहायक होता है. इतना ही नहीं, डॉक्टरों का कहना है कि इस मछली में मौजूद फैटी एसिड गठिया के लक्षणों को कम करते हैं और अवसाद व याददाश्त कमजोर होने जैसे लक्षणों से बचाव करते हैं. पावलप्पराई मछली संतृप्त और पॉलीअनसैचुरेटेड फैटी एसिड से भरपूर होती है, जो कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करने और हृदय स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में सहायक होती है. इस मछली का नियमित सेवन स्ट्रोक और दिल के दौरे के खतरे को कम करता है.

इससे भी दिलचस्प बात यह है कि यह मछली बहुत स्वादिष्ट होती है. बिहार के लोगों में यह धारणा होती है कि तिलापिया मछली का स्वाद अच्छा नहीं होता जबकि यह एक मिथ है. स्थानीय बाजार में तिलापिया या पावलप्पराई मछली लगभग 100 रुपये प्रति किलो बिकती है. वहीं रोहू या कतला की कीमत 250-300 से कम नहीं होती जबकि तिलापिया में ज्यादा पौष्टिक तत्व होाता है. इसलिए यह सस्ती मछली आपके बजट में आसानी से फिट हो सकती है.

डिस्क्लेमेर: यह रिपोर्ट केवल आपकी जानकारी के लिए लिखी गई है. हमने इस लेख में केवल सामान्य ज्ञान और दैनिक जीवन से संबंधित जानकारी साझा की है. यदि आप अपने स्वास्थ्य, जीवन या विज्ञान से संबंधित कोई जानकारी पढ़ते हैं, तो उसे स्वीकार करने से पहले किसी विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य लें.





