नई दिल्ली (Rishu Soni Success Story). प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले युवा अक्सर एक-दो बार असफल होने पर डिप्रेशन में चले जाते हैं या रास्ता बदल लेते हैं. लेकिन उत्तर प्रदेश के ऋषु सोनी की कहानी धैर्य और अटूट विश्वास की ऐसी मिसाल है, जिसे सुनकर किसी के भी रोंगटे खड़े हो सकते हैं. ऋषु की सफलता का रास्ता गुलाबों से नहीं, बल्कि कांटों से भरा था. वह 1-2 नहीं, बल्कि कुल 83 बार असफल हुए थे. इसमें 50 प्रीलिम्स परीक्षाएं, 27 मेन्स और 6 बार इंटरव्यू से बाहर होने का दर्द शामिल था.
शुरुआती संघर्ष और उम्मीदों का बोझ
ऋषु सोनी मिडिल क्लास परिवार से ताल्लुक रखते हैं. अन्य युवाओं की तरह उन्होंने भी सरकारी नौकरी का सपना देखा, लेकिन उन्हें अंदाजा नहीं था कि किस्मत उनकी इतनी कड़ी परीक्षा लेगी. तैयारी के शुरुआती सालों में जब दोस्त सफल हो रहे थे, तब ऋषु के हाथ सिर्फ रिजेक्शन लग रहा था. साल दर साल बीतते गए और असफलताओं का आंकड़ा बढ़ता गया. उन्होंने 2018 में परीक्षाएं देनी शुरू की थीं और सरकारी नौकरी 2024 में मिल पाई.
आंकड़ों में दर्द: 50 बार प्रीलिम्स में फेल
ऋषु सोनी के सफर का सबसे कठिन हिस्सा वह था जब वे लगातार 50 बार प्रीलिम्स परीक्षा भी पास नहीं कर पाए. इसके बाद उन्होंने वापसी की और मेन्स तक पहुंचे, लेकिन वहां भी 27 बार असफलता हाथ लगी. हद तो तब हो गई जब वे 6 बार इंटरव्यू तक पहुंचे और अंतिम लिस्ट में नाम न होने के कारण बाहर हो गए. कुल मिलाकर 83 बार मिली हार ने उन्हें समाज और अपनों के बीच सवालों के घेरे में खड़ा कर दिया था.
6.5 साल का धैर्य और एक साथ 6 सरकारी नौकरियों का ‘छक्का’
ऋषु सोनी की तपस्या का फल साल 2024 में मिला, जब उन्होंने एक-दो नहीं बल्कि लगातार 6 सरकारी भर्ती परीक्षाओं (RRB PO, RRB क्लर्क, IBPS क्लर्क, IDBI JAM, IDBI एग्जीक्यूटिव और SBI क्लर्क) में कामयाबी का परचम लहराया. हालांकि, इसी दौरान वे IBPS PO इंटरव्यू और SBI PO मेन्स में चूक गए थे, लेकिन उनके पास पहले से ही 6 नौकरियों के जॉइनिंग लेटर थे. 27 फरवरी 2025 को उत्तर प्रदेश ग्रामीण बैंक में असिस्टेंट मैनेजर का पद संभालने से पहले उन्होंने IDBI बैंक में 3 महीने बतौर हेड कैशियर भी सेवा दी.
ऋषु का मानना है कि असफलता अंत नहीं, बल्कि सीखने का हिस्सा है. वे कहते हैं कि अगर आपके पास ‘प्लान बी’ नहीं है तो आप ‘प्लान ए’ को सफल बनाने के लिए अपनी पूरी जान लगा देते हैं.





