बता दें कि जब से पिछले महीने ईरान और इजरायल-अमेरिका के बीच युद्ध शुरू हुआ है, तब से रुपया करीब 3.5% तक कमजोर हो चुका है। मिडिल-ईस्ट में जारी युद्ध और ईरान संकट ने भारतीय रुपये की कमर तोड़ दी है। निवेशकों को डर है कि अगर यह युद्ध लंबा खिंचा, तो तेल की सप्लाई और महंगी हो जाएगी। भारत अपनी जरूरत का ज्यादातर कच्चा तेल बाहर से खरीदता है, और जब डॉलर महंगा होता है, तो रुपये की वैल्यू कम हो जाती है।
उधर, शेयर बाजार और ग्लोबल मार्केट में मचे घमासान के बीच भारतीय रुपये में शुक्रवार, 27 मार्च को जोरदार गिरावट आई।





