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Hidden Health Clues: जब आपके शरीर में कोई अंदरूनी समस्या होती है, तब इससे जुड़े कुछ संकेत मुंह में नजर आते हैं. अगर आपको मसूड़ों से जुड़ी कोई बीमारी नहीं है, लेकिन फिर भी खून आ रहा है, तो यह हार्ट से जुड़ी समस्या का संकेत हो सकता है. दांतों में ढीलापन हड्डियों की कमजोरी का इशारा देता है. इन संकेतों को समझकर सही कदम उठाना जरूरी है.
दांतों की एनेमल डैमेज होना पेट से जुड़ी दिक्कत हो सकती है.
Link Between Your Teeth and Body: अधिकतर लोग दांतों की समस्याओं को केवल कैविटी या मसूड़ों की सूजन तक ही सीमित मानते हैं, लेकिन हमारा मुंह पूरे शरीर के स्वास्थ्य का आईना होता है. दांतों और मसूड़ों में होने वाले छोटे-छोटे बदलाव उन गंभीर बीमारियों के शुरुआती संकेत हो सकते हैं, जिनके लक्षण शरीर के अन्य हिस्सों में अभी दिखाई भी नहीं दिए हैं. दांतों की नियमित जांच न केवल आपकी मुस्कान बचाती है, बल्कि हार्ट डिजीज, डायबिटीज और ऑस्टियोपोरोसिस जैसी छिपी बीमारियों को पकड़ने में भी मदद करती है. आपकी ओरल हेल्थ ठीक नहीं है, तो यह शरीर में छिपी समस्याओं का संकेत हो सकता है.
अगर आपका मुंह बार-बार सूखता है, जिसे मेडिकल भाषा में जेरोस्टोमिया कहते हैं, तो यह केवल डिहाइड्रेशन नहीं है. लार के प्रवाह में कमी अनकंट्रोल डायबिटीज का एक प्रमुख लक्षण है. हाई ब्लड शुगर के कारण लार ग्रंथियां प्रभावित होती हैं, जिससे मुंह में संक्रमण, कैविटी और मसूड़ों की बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है. अक्सर डेंटिस्ट ही वे पहले व्यक्ति होते हैं जो इस लक्षण को पहचानकर मरीज को डायबिटीज टेस्ट की सलाह देते हैं. अगर आपके दांतों की ऊपरी परत एनेमल बिना किसी ठोस कारण के घिस रही है, तो यह एसिड रिफ्लक्स या जीईआरडी का संकेत हो सकता है. पेट का एसिड जब बार-बार मुंह तक पहुंचता है, तो वह इनेमल को कमजोर कर देता है, जिससे दांतों में सेंसिटिविटी और सड़न पैदा होती है.
मुंह में बार-बार होने वाले या जल्दी ठीक न होने वाले छाले शरीर में पोषण की कमी का संकेत हो सकते हैं. आयरन, विटामिन B12 या फोलिक एसिड की कमी से छालों की समस्या हो सकती है. ये छाले कमजोर इम्यूनिटी या ऑटोइम्यून कंडीशंस का भी संकेत हो सकते हैं. हालांकि आम छाले सामान्य हैं, लेकिन अगर कोई घाव लंबे समय तक बना रहे, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए, क्योंकि यह शरीर की आंतरिक कमजोरी या किसी गंभीर संक्रमण का अलार्म हो सकता है.
बिना किसी चोट या एक्सीडेंट के अगर दांत अचानक ढीले महसूस होने लगें, तो यह हड्डियों के घनत्व यानी बोन डेंसिटी में कमी का संकेत है. ऑस्टियोपोरोसिस जैसी बीमारियां न केवल शरीर की अन्य हड्डियों को, बल्कि जबड़े की हड्डी को भी प्रभावित करती हैं, जिससे वह दांतों को सहारा देने में असमर्थ हो जाती है. डेंटिस्ट अक्सर डेंटल एक्स-रे के माध्यम से जबड़े की हड्डी में आ रहे इन शुरुआती बदलावों को पकड़ लेते हैं, जिससे ऑस्टियोपोरोसिस का समय रहते इलाज संभव हो पाता है.
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अमित उपाध्याय News18 Hindi की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें





