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Excess Toothpaste Affect Child’s IQ : जब आपका बच्चा ब्रश करने वाला हो जाता है तो आप बहुत खुश होते हैं. टूथपेस्ट से ब्रश करना हर किसी की आदत है लेकिन जब बच्चा इसे टूथपेस्ट को ज्यादा देर मुंह में रखें तो इसे गंभीरता से लेनी चाहिए. एक नई रिसर्च में यह बात सामने आई है कि अगर बच्चा फ्लोराइड वाले टूथपेस्ट को देर तक करता है और फ्लोराइड की मात्रा पेट में चली जाती है तो इससे बच्चे का आईक्यू कम हो जाता है. यह बच्चों के मस्तिष्क पर असर करता है.
ज्यादा टूथपेस्ट खतरनाक!
Excess Toothpaste Affect Child’s IQ : जामा पेडिएट्रिक्स में प्रकाशित एक बड़े अध्ययन में कहा गया है कि अगर बच्चा देर तक टूथपेस्ट को मुंह में रखता है या टूथपेस्ट को निगल जाता है तो इससे बच्चे का आईक्यू कमजोर हो सकता है. रिपोर्ट के मुताबिक जिस टूथपेस्ट में फ्लोराइड की मात्रा होती है अगर वह ज्यादा देर तक बच्चे के मुंह में रहता है तो इससे नुकसान हो सकता है. इस चौंकाने वाली वैज्ञानिक रिसर्च में दावा किया गया है कि टूथपेस्ट में मौजूद फ्लोराइड की अधिक मात्रा बच्चों के विकसित हो रहे मस्तिष्क के लिए घातक साबित हो सकती है.
फायदे के बजाय नुकसान
टाइम्स नाउ की रिपोर्ट के मुताबिक शोधकर्ताओं ने बताया कि छोटे बच्चे अक्सर ब्रश करते समय टूथपेस्ट को पूरी तरह थूक नहीं पाते और अनजाने में उसे निगल लेते हैं या लंबे समय तक मुंह में जमा रखते हैं.अगर ऐसा लगातार करते हैं तो शरीर में फ्लोराइड स्तर बढ़ने लगता है. इस कारण दांतों पर सफेद धब्बे यानी फ्लोरोसिस तो होता ही है साथ ही यह न्यूरोटॉक्सिन की तरह काम करता है जो बच्चों की सीखने की क्षमता और उनके आईक्यू लेवल को कम कर सकता है.वास्तव में फ्लोराइड वाला टूथपेस्ट दांतों की सुरक्षा के लिए बहुत प्रभावी माना जाता है. लेकिन अगर फ्लोराइड शरीर में जरूरत से ज्यादा जमा होने लगे तो इसका उल्टा असर होता है.
ज्यादा फ्लोराइड का नुकसान
जब जरूरत से ज्यादा फ्लोराइड शरीर में चला जाता है तो डेंटल फ्लोरोसिस (दांतों पर दाग और कमजोरी) या गंभीर स्केलेटल फ्लोरोसिस हो सकता है. इसमें हड्डियां असामान्य रूप से सख्त हो जाती हैं. इसे ऑस्टियोस्क्लेरोसिस कहा जाता है. इसके साथ ही इसमें टेंडन और लिगामेंट्स में कैल्सियम जमने लगता है. यह एक तरह से हड्डियों की विकृति है. ज्यादा फ्लोराइड बड़ों को भी नुकसान पहुंचा सकता है. फ्लोराइड कई चीजों में पाया जाता है. डब्ल्यूएचओ के मुताबिक दुनिया भर में करीब 2.4 अरब लोग स्थायी दांतों में कैविटी से प्रभावित हैं जबकि लगभग 48.6 करोड़ बच्चों के दूध के दांतों में भी सड़न की समस्या पाई जाती है.
आईक्यू क्यों हो जाता है कमजोर
नेशनल टेक्सिकोलॉजी प्रोग्राम के अनुसार अगर फ्लोराइड का स्तर ज्यादा हो, जैसे कि पानी में 1.5 mg/L से अधिक हो तो यह बच्चों के कम आईक्यू से जुड़ा पाया गया है. जामा पेडिएट्रिक्स में प्रकाशित अध्ययन में 74 शोधों का विश्लेषण किया गया. इसमें पाया गया कि पेशाब में फ्लोराइड 1 mg/L बढ़ने पर बच्चों का आईक्यू लगभग 1.63 अंक तक कम हो सकता है. सुनने में यह कम लगता है लेकिन आईक्यू में छोटी गिरावट भी लंबे समय में बड़ा असर डाल सकती है. यूएस नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसीन ने फ्लोराइड को एक ऐसे पदार्थ के रूप में भी वर्गीकृत किया है, जो बच्चों के दिमाग के विकास को प्रभावित कर सकता है.
बच्चों में समस्या क्यों
दरअसल, सिर्फ टूथपेस्ट का इस्तेमाल आमतौर पर बच्चों में फ्लोराइड का स्तर खतरनाक सीमा तक नहीं पहुंचाता लेकिन जब बच्चा उसे बार-बार निगलने की आदत बना लेता है तो यह खतरनाक हो सकता है. 6 साल से कम उम्र के बच्चों को फ्लोराइड वाला माउथवॉश बिना दंत चिकित्सक की सलाह के नहीं देना चाहिए. ब्रश करते समय बड़ों की निगरानी जरूरी है. असल चिंता कुल मिलाकर होने वाले संपर्क की है. यानी टूथपेस्ट, फ्लोराइड मिला नल का पानी, कुछ खाद्य पदार्थ और खासकर पानी में पाए जाने वाला फ्लोराइड आदि को मिलाकर इसकी मात्रा शरीर में बढ़ जाती है.
माता-पिता क्या करें?
वैज्ञानिकों के अनुसार खतरा ज्यादा मात्रा में फ्लोराइड लेने से होता है, न कि सही तरीके से इस्तेमाल करने से. दंत विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि 3 साल से छोटे बच्चों के लिए चावल के दाने जितना और 3 से 6 साल के बच्चों के लिए मटर के दाने जितना टूथपेस्ट इस्तेमाल करें. बच्चों को सिखाएं कि वे टूथपेस्ट निगलें नहीं, बल्कि थूक दें. अपने इलाके के पानी में फ्लोराइड की मात्रा भी जांचें, क्योंकि Rajasthan जैसे कई राज्यों में यह ज्यादा हो सकता है. विशेषज्ञ मानते हैं कि सही मात्रा में फ्लोराइड दांतों के लिए फायदेमंद है. इसलिए डरने की नहीं, संतुलन बनाए रखने की जरूरत है.
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18 साल से ज्यादा के लंबे करियर में लक्ष्मी नारायण ने डीडी न्यूज, आउटलुक, नई दुनिया, दैनिक जागरण, हिन्दुस्तान जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। समसामयिक विषयों के विभिन्न मुद्दों, राजनीति, समाज, …और पढ़ें





