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Palamu News: पलामू टाइगर रिजर्व में तेंदुओं की संख्या में लगातार बढ़ोतरी के संकेत मिल रहे हैं. वर्ष 2018 की रिपोर्ट में पलामू टाइगर रिजर्व में तेंदुओं की संख्या 36 से 50 के बीच बताई गई थी. वहीं 2023-24 की रिपोर्ट में करीब 50 तेंदुओं की मौजूदगी दर्ज की गई.
झारखंड के जंगलों में तेंदुओं की बढ़ती मौजूदगी वन्यजीव प्रेमियों के लिए जहां उत्साह की खबर है, वहीं प्रशासन के लिए नई चुनौती भी बनती जा रही है. हालिया टाइगर एस्टिमेशन के दौरान जुटाए गए. आंकड़ों से संकेत मिले हैं कि राज्य में सबसे अधिक तेंदुए पलामू टाइगर रिजर्व क्षेत्र में पाए जा रहे हैं. शुरुआती आंकड़ों के अनुसार अकेले पीटीआर इलाके में करीब 100 तेंदुओं की मौजूदगी की संभावना जताई जा रही है. हालांकि वास्तविक संख्या का खुलासा भारत सरकार की अंतिम रिपोर्ट आने के बाद ही हो सकेगा.
पिछले कुछ वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो पलामू टाइगर रिजर्व में तेंदुओं की संख्या में लगातार बढ़ोतरी के संकेत मिल रहे हैं. वर्ष 2018 की रिपोर्ट में पलामू टाइगर रिजर्व में तेंदुओं की संख्या 36 से 50 के बीच बताई गई थी. वहीं 2023-24 की रिपोर्ट में करीब 50 तेंदुओं की मौजूदगी दर्ज की गई. अब टाइगर एस्टिमेशन के दौरान कैमरा ट्रैप, पग मार्क्स और अन्य साक्ष्यों के आधार पर संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि की संभावना जताई जा रही है. जहां की आठों रेंज में ट्रैकिंग जारी है.
झारखंड में बढ़ रहा तेंदुआ की संख्या
वन विभाग के डिप्टी डायरेक्टर प्रजेश कांत जेना ने लोकल18 को बताया कि टाइगर एस्टिमेशन से जुड़ा पूरा डाटा वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया को भेजा जा रहा है, जहां विस्तृत अध्ययन के बाद अंतिम आंकड़े जारी किए जाएंगे.आगे कहा कि पीटीआर क्षेत्र में शुरू से ही तेंदुओं की मौजूदगी रही है. हाल के वर्षों में इनकी संख्या बढ़ी है. कैमरा ट्रैप में लगातार तेंदुओं की तस्वीरें कैद हो रही हैं. इसके अलावा स्थानीय सूचनाओं और मानव-वन्यजीव संघर्ष के मामलों से भी बढ़ती संख्या के संकेत मिलते हैं. उन्होंने बताया कि पूरे झारखंड में टाइगर एस्टिमेशन का नोडल केंद्र भी पलामू टाइगर रिजर्व को बनाया गया है, जहां राज्य के विभिन्न जिलों से संबंधित डाटा एकत्र किया जा रहा है.
2023-24 की रिपोर्ट में करीब 50 तेंदुओं की मौजूदगी
टाइगर एस्टिमेशन के दौरान गोड्डा, जमशेदपुर, हजारीबाग, रांची, चतरा और कोल्हान क्षेत्र में भी तेंदुओं की मौजूदगी के प्रमाण मिले हैं. खास बात यह है कि आम तौर पर बाघों के इलाकों में तेंदुए और हायना जैसे मांसाहारी जीव कम पाए जाते हैं, लेकिन पीटीआर क्षेत्र में इनकी संख्या में बढ़ोतरी दर्ज की गई है. हालांकि इसके साथ ही मानव-तेंदुआ संघर्ष की घटनाएं भी चिंता बढ़ा रही हैं. दिसंबर 2022 से जनवरी 2023 के बीच गढ़वा और लातेहार क्षेत्र में तेंदुए के हमलों में पांच बच्चों की मौत हो गई थी, जिसके बाद उसे मैन ईटर घोषित कर कार्रवाई की गई थी.वन विभाग के लिए यह बढ़ती संख्या एक ओर जैव विविधता के लिहाज से सकारात्मक संकेत है, तो दूसरी ओर मानव-वन्यजीव संघर्ष को रोकना भी बड़ी चुनौती बनता जा रहा है. आने वाली अंतिम रिपोर्ट से झारखंड और पलामू टाइगर रिजर्व में तेंदुओं की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी.





