Aaj Ka Mausam Live | Today Weather Live: अगले 5 दिन ‘रेनकोट’ रखें तैयार, मार्च में ही बादल, बरसा, बिजुली…15 राज्यों में आंधी-तूफान का IMD अलर्ट


Today Weather Live: मार्च महीने की शुरूआत वैसे तो सुहाने मौसम से होती है लेकिन इस बार भीषण गर्मी और तपिश से हुई थी. लेकिन महीने के बीच में जब मौसमस ने पलटी मारी तो लोगों को अब डर लगने लगा है. क्या दिल्ली-NCR, क्या पटना-भोपाल, कोलकाता तक में बारिश ने लोगों को मार्च में मानसून जैसा फील कर दिया है. आसमान में काले बादल छा रहे हैं. तेज हवाएं चलने लगी हैं. कहीं गरज, कहीं बिजली, कहीं ओलावृष्टि हो रही है. हालात ऐसे बन गए हैं कि लोगों को अब रेनकोट और छाता मार्च में ही निकालना पड़ रहा है. यही वजह है कि ‘अगले 5 दिन रेनकोट रखें तैयार’ वाली चेतावनी अब पूरी तरह सही साबित होती दिख रही है. मौसम विभाग (IMD) का अलर्ट साफ कहता है यह सिर्फ हल्की बारिश नहीं है. यह एक बड़ा वेदर सिस्टम है. जो देश के 15 राज्यों को अपनी चपेट में ले चुका है और आने वाले 5 दिन बेहद अहम हैं.

मौसम विभाग के अनुसार तापमान जरूर गिर रहा है, इससे गर्मी से राहत मिल रही है. लेकिन जोखिम कई गुना बढ़ गया है. खासकर किसानों के लिए यह समय चुनौतीपूर्ण है. खेतों में खड़ी फसलें दांव पर हैं. अचानक बदलते मौसम ने ग्रामीण और शहरी दोनों इलाकों में चिंता बढ़ा दी है. आम लोगों के लिए भी यह मौसम राहत के साथ जोखिम लेकर आया है. साफ है, यह बदलाव सिर्फ मौसम नहीं, बल्कि एक चेतावनी है सतर्क रहने की.

तमिलनाडु, केरल और कर्नाटक के तटीय इलाकों में बारिश. (फोटो: पीटीआई)

मौसम विभाग के मुताबिक उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में बर्फबारी की संभावना है, जबकि दक्षिण और पूर्वोत्तर भारत के लिए येलो अलर्ट जारी किया गया है. उत्तर भारत के कई हिस्सों में अगले दो दिनों तक आंधी और बारिश के आसार हैं. दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, यूपी और राजस्थान में बादलों की आवाजाही बढ़ेगी, जिससे हल्की बारिश, तेज हवाएं और धूल भरी आंधी चल सकती है. जम्मू-कश्मीर, हिमाचल और उत्तराखंड में बारिश के साथ बर्फबारी होगी. वहीं मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, बिहार और पश्चिम बंगाल में तापमान बढ़ने का सिलसिला जारी रहेगा, हालांकि कुछ इलाकों में हल्की प्री-मानसून बौछारें भी पड़ सकती हैं. मौसम विभाग का कहना है कि इस बार मौसम के सामान्य पैटर्न में बदलाव देखा जा रहा है, इसका असर अप्रैल तक रह सकता है. इसकी एक बड़ी वजह ‘मावठ’ का देर से होना बताया जा रहा है.

क्या होता है मावठ?

मावठ उत्तर भारत, खासकर राजस्थान, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सर्दियों के दौरान होने वाली विशेष बारिश होती है. यह आमतौर पर दिसंबर से जनवरी के बीच या कभी-कभी फरवरी के मध्य तक होती है. यह बारिश हल्की से मध्यम होती है और इसका मुख्य कारण पश्चिमी विक्षोभ होता है. कई बार इसके साथ ओले भी गिरते हैं. मावठ खेती के लिए काफी फायदेमंद मानी जाती है, लेकिन इसका समय पर न होना मौसम के पैटर्न को प्रभावित कर सकता है.

  • देशभर में मौसम का यह बदला हुआ मिजाज एक मजबूत पश्चिमी विक्षोभ और साइक्लोनिक सर्कुलेशन के संयुक्त असर से बना है. यही वजह है कि उत्तर भारत से लेकर पूर्वी और दक्षिण भारत तक एक साथ बारिश, आंधी और गरज-चमक देखने को मिल रही है. वातावरण में नमी की मात्रा बढ़ गई है, जिससे बादल तेजी से विकसित हो रहे हैं और अचानक मौसम पलट रहा है. कई राज्यों में 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने का अनुमान है, जबकि कुछ संवेदनशील इलाकों में यह रफ्तार 70 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है.
  • मौसम विभाग के मुताबिक यह सिस्टम अगले 4 से 5 दिनों तक सक्रिय रहेगा. इस दौरान अलग-अलग क्षेत्रों में अलग-अलग तीव्रता से असर दिखेगा. कहीं भारी बारिश होगी, तो कहीं तेज हवाएं और कहीं बिजली गिरने का खतरा ज्यादा रहेगा. तापमान में 4 से 5 डिग्री तक की गिरावट दर्ज की जा सकती है, इससे लोगों को अस्थायी राहत तो मिलेगी, लेकिन यह राहत लंबे समय तक टिकने वाली नहीं है. मौसम की यह अस्थिरता आने वाले दिनों में और चुनौतीपूर्ण हो सकती है.

दिल्ली-NCR में बदला मौसम

दिल्ली-एनसीआर में फिलहाल मौसम राहत देने वाला जरूर दिख रहा है, लेकिन पूरी तरह स्थिर नहीं है. 23 मार्च को हल्की हवा और बादलों की आवाजाही बनी रहेगी. बीच-बीच में तेज झोंकों के साथ आंधी के संकेत भी हैं, जिससे दिनभर मौसम बदलता रहेगा. अधिकतम तापमान 28 से 30 डिग्री सेल्सियस के बीच रह सकता है, जबकि न्यूनतम तापमान 18 डिग्री के आसपास रहेगा. बारिश के कारण वायु गुणवत्ता में सुधार हुआ है और AQI मध्यम स्तर पर पहुंच गया है. लेकिन तेज हवाएं ट्रैफिक और रोजमर्रा की गतिविधियों को प्रभावित कर सकती हैं.

यूपी में मौसम का बदलता मिजाज

  • उत्तर प्रदेश में मौसम का असर सबसे ज्यादा व्यापक रूप से देखने को मिल रहा है. पिछले कुछ दिनों में आंधी, बारिश और ओलावृष्टि ने कई जिलों में भारी असर डाला है. पश्चिमी और पूर्वी दोनों हिस्सों में अलग-अलग तरह की मौसमी गतिविधियां दर्ज की जा रही हैं. मौसम विभाग के मुताबिक आने वाले दिनों में तेज हवाओं का सिलसिला जारी रहेगा और 60 किलोमीटर प्रति घंटे तक की रफ्तार से आंधी चल सकती है.
  • पूर्वांचल और तराई क्षेत्रों में बिजली गिरने का खतरा ज्यादा बना हुआ है. गोरखपुर, देवरिया, आजमगढ़, मऊ, बलिया और बस्ती जैसे जिलों में भारी बारिश के साथ चेतावनी जारी की गई है. वहीं लखनऊ, कानपुर, आगरा और मेरठ जैसे शहरों में भी मौसम अस्थिर बना रहेगा. किसानों के लिए यह समय बेहद संवेदनशील है, क्योंकि गेहूं की कटाई से पहले ओलावृष्टि फसलों को बर्बाद कर सकती है.

उत्तराखंड-हिमाचल में बिगड़ते हालात

  • पहाड़ी राज्यों में मौसम का असर और ज्यादा खतरनाक होता दिख रहा है. उत्तराखंड में चमोली, पिथौरागढ़, बागेश्वर और रुद्रप्रयाग में तेज बारिश और आंधी का अलर्ट है. 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं. ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी जारी है, जिससे ठंड बढ़ गई है और जनजीवन प्रभावित हो रहा है.
  • हिमाचल प्रदेश में भी हालात चुनौतीपूर्ण बने हुए हैं. शिमला, कुल्लू, कांगड़ा और मंडी में बारिश और बर्फबारी का सिलसिला जारी है. कई इलाकों में तापमान माइनस में पहुंच गया है. मौसम विभाग ने ऑरेंज अलर्ट जारी किया है. पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन और हिमस्खलन का खतरा भी बना हुआ है, जिससे यात्रियों और स्थानीय लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है.

बिहार में मौसम का अलर्ट

  • बिहार में 24 से 28 मार्च के बीच फिर से बारिश और आंधी का दौर शुरू होने वाला है. पटना, दरभंगा, मुजफ्फरपुर, पूर्णिया और सहरसा जैसे जिलों में तेज हवाओं के साथ बारिश का अलर्ट जारी किया गया है. 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से आंधी चल सकती है, जिससे जनजीवन प्रभावित हो सकता है.
  • इसके अलावा कई जिलों में बिजली गिरने और ओलावृष्टि की भी चेतावनी दी गई है. मौसम विभाग ने लोगों को खुले में न जाने और सुरक्षित स्थान पर रहने की सलाह दी है. किसानों को विशेष रूप से सावधानी बरतने की जरूरत है, क्योंकि फसलों को भारी नुकसान होने की आशंका है.

पंजाब-हरियाणा में बदला मौसम

  • पंजाब और हरियाणा में पिछले कुछ दिनों से मौसम पूरी तरह बदला हुआ है. आंधी, बारिश और ओलावृष्टि ने तापमान को नीचे ला दिया है. सुबह और रात में ठंडक महसूस हो रही है, इससे लोगों को फिर से हल्की सर्दी का एहसास हो रहा है.
  • मौसम विभाग के अनुसार अगले 2 से 3 दिन तक यही स्थिति बनी रह सकती है. किसानों के लिए यह समय चुनौतीपूर्ण है, क्योंकि गेहूं की फसल तैयार खड़ी है और तेज हवाएं व ओले उसे गिरा सकते हैं. इससे उत्पादन पर असर पड़ सकता है.

राजस्थान में मौसम का असर

राजस्थान में जयपुर, बीकानेर, जैसलमेर और जोधपुर में आंधी और हल्की बारिश का अलर्ट है. पश्चिमी विक्षोभ के कारण मौसम में बदलाव देखने को मिल रहा है. 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं. रेगिस्तानी इलाकों में धूल भरी आंधी भी परेशानी बढ़ा सकती है.

तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में कुछ जगहों पर हीटवेव की स्थिति. (फाइल फोटो PTI)

दक्षिण भारत में भी असर

दक्षिण भारत में साइक्लोनिक सर्कुलेशन के कारण तमिलनाडु, केरल और कर्नाटक के तटीय इलाकों में बारिश और तेज हवाओं का असर दिखेगा. वहीं तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में कुछ जगहों पर हीटवेव की स्थिति बन सकती है. यानी दक्षिण भारत में मौसम दो चरम स्थितियों के बीच झूलता नजर आएगा.

नॉर्थ ईस्ट में बड़ा खतरा

पूर्वोत्तर भारत में 24 मार्च से मौसम और खराब हो सकता है. असम, मेघालय, मिजोरम और त्रिपुरा में तेज आंधी और भारी बारिश का अलर्ट है. 70 से 80 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं, जिससे पेड़ गिरने और बिजली बाधित होने की आशंका है.

पश्चिम बंगाल में भारी बारिश

पश्चिम बंगाल में अगले 5 दिन तक भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है. कोलकाता समेत कई जिलों में तापमान में भारी गिरावट दर्ज की गई है. ओलावृष्टि और बिजली गिरने का खतरा भी बना हुआ है, जिससे लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है.

इस मौसम बदलाव की मुख्य वजह क्या है?

इस बदलाव की मुख्य वजह पश्चिमी विक्षोभ और साइक्लोनिक सर्कुलेशन का एक साथ सक्रिय होना है. ये दोनों सिस्टम जब आपस में टकराते हैं तो वातावरण में अस्थिरता तेजी से बढ़ जाती है. इससे तेज हवाएं, भारी बारिश, गरज-चमक और ओलावृष्टि जैसी घटनाएं एक साथ देखने को मिलती हैं.

किन राज्यों में सबसे ज्यादा असर देखने को मिलेगा?

उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, राजस्थान और उत्तराखंड जैसे राज्यों में सबसे ज्यादा असर रहेगा. इन इलाकों में तेज आंधी, बिजली और ओलावृष्टि का खतरा अधिक है. इसके अलावा पूर्वोत्तर राज्यों में भी तेज हवाओं का असर ज्यादा होगा.

क्या किसानों को ज्यादा नुकसान होगा?

हां, किसानों के लिए यह समय बेहद चुनौतीपूर्ण है. ओलावृष्टि और तेज हवाओं से गेहूं और अन्य फसलों को नुकसान हो सकता है. खेतों में खड़ी फसल गिर सकती है, जिससे उत्पादन घटने का खतरा है और आर्थिक नुकसान भी हो सकता है.

क्या इससे गर्मी से राहत मिलेगी?

तापमान में 4 से 5 डिग्री तक की गिरावट हो सकती है, इससे कुछ समय के लिए राहत जरूर मिलेगी. लेकिन यह राहत स्थायी नहीं होगी. जैसे ही यह सिस्टम कमजोर होगा, तापमान फिर से बढ़ सकता है.

लोगों को क्या सावधानी बरतनी चाहिए?

खराब मौसम के दौरान घर से बाहर निकलने से बचें. खुले मैदान और पेड़ों के नीचे न खड़े हों. बिजली गिरने के दौरान सुरक्षित स्थान पर रहें. वाहन चलाते समय सावधानी बरतें और मौसम विभाग के अपडेट पर नजर बनाए रखें.



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