जानकारी के अनुसार, गेराल्ड फोर्ड एयरक्राफ्ट कैरियर के लॉन्ड्री एरिया में भीषण आग लग गई थी. आगजनी की इस घटना में व्यापक नुकसान होने की बात कही जा रही है. हालांकि, इस घटना को हादसा बताया जा रहा है, लेकिन साथ ही जांच कराने की बात भी कही जा रही है. संदेह यह भी है कि गेराल्ड फोर्ड ईरानी हमले का शिकार तो नहीं हो गया. बहरहाल इन सब किंतु-परंतु के बीच सच्चाई यह है कि दुनिया के सबसे विशाल और शक्तिशाली एयरक्राफ्ट कैरियर को ईरान युद्ध के मोर्चे से हटा लिया गया है और इसे अमेरिका के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है. ईरान के साथ जारी युद्ध के बीच अमेरिका को एक ऐसे मोर्चे पर झटका लगा है, जिसे सैन्य विश्लेषक मनोवैज्ञानिक और रणनीतिक नुकसान के तौर पर देख रहे हैं. दुनिया के सबसे बड़े और सबसे आधुनिक विमानवाहक पोत USS Gerald R. Ford पर लगी आग और उसके बाद मरम्मत के लिए बंदरगाह की ओर लौटने का फैसला इस संघर्ष में अमेरिका की पहली बड़ी कमजोरी के संकेत के रूप में सामने आया है.
क्या है मामला?
युद्ध के 18वें दिन यह घटना तब हुई जब अमेरिकी नेवी का यह अत्याधुनिक विमानवाहक पोत रेड सी में तैनात था और ईरान के खिलाफ ऑपरेशनों में सक्रिय भूमिका निभा रहा था. जहाज के अंदर लॉन्ड्री एरिया में लगी आग को काबू करने में घंटों लग गए. इस दौरान करीब 200 जवानों को धुएं से संबंधित दिक्कतों के चलते इलाज देना पड़ा, जबकि एक सैनिक को गंभीर हालत में एयरलिफ्ट करना पड़ा. आग के कारण जहाज के सैकड़ों सोने के स्थान प्रभावित हुए, जिससे इसके ऑपरेशन पर भी असर पड़ा. अमेरिका भले ही यह दावा कर रहा है कि जहाज पूरी तरह ऑपरेशनल है, लेकिन हकीकत यह है कि इतने अहम समय में उसका मरम्मत के लिए Souda Bay जाना एक बड़ा रणनीतिक झटका माना जा रहा है. खासतौर पर तब, जब यह पोत अमेरिकी हमलों का मुख्य केंद्र था और इसमें 75 से अधिक लड़ाकू विमान (जिनमें F/A-18 Super Hornet जैसे अत्याधुनिक जेट शामिल हैं) तैनात थे.
गेराल्ड फोर्ड: ताकत का दूसरा नाम
- मजबूत डिफेंस सिस्टम: एयरक्राफ्ट कैरियर पर उन्नत सुरक्षा के लिए Evolved SeaSparrow और Rolling Airframe Missile (RAM) लॉन्चर लगाए गए हैं, जो दुश्मन के एंटी-शिप मिसाइलों को रोकने में सक्षम हैं.
- करीबी खतरे से सुरक्षा (CIWS): जहाज पर तीन MK-15 Phalanx CIWS सिस्टम मौजूद हैं, जो 20 मिमी रडार-गाइडेड ऑटो कैनन के जरिए हवा और समुद्र से आने वाले खतरों को स्वतः नष्ट करते हैं.
- छोटे हमलों के खिलाफ सुरक्षा: चार MK-38 (25 मिमी) मशीन गन तेज गति वाली छोटी नौकाओं और हमलावर बोट्स से जहाज की रक्षा करती हैं.
- एयर विंग की ताकत: कैरियर पर दर्जनों फिक्स्ड और हेलीकॉप्टर एयरक्राफ्ट तैनात रहते हैं, जिनमें मुख्य रूप से तीन स्क्वाड्रन F/A-18E Super Hornet और एक स्क्वाड्रन F/A-18F Super Hornet शामिल हैं.
- इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर और सपोर्ट: EA-18G Growler इलेक्ट्रॉनिक अटैक एयरक्राफ्ट दुश्मन के रडार और कम्युनिकेशन सिस्टम को जाम करने में सक्षम है, जिससे युद्ध में बढ़त मिलती है.
- लॉजिस्टिक्स और कमांड कंट्रोल: C-2A Greyhound विमान समुद्र में रहते हुए भी जरूरी सप्लाई पहुंचाता है, जबकि E-2D Advanced Hawkeye पूरे स्ट्राइक ग्रुप को हवाई कमांड और कंट्रोल प्रदान करता है.
- मल्टी-रोल हेलीकॉप्टर: MH-60 Seahawk हेलीकॉप्टर एंटी-सबमरीन वारफेयर, स्पेशल ऑपरेशन और मानवतावादी मिशनों सहित कई भूमिकाएं निभाते हैं.
गेराल्ड फोर्ड 9 महीने से लगातार ऑपरेशनल
विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटना केवल तकनीकी खराबी नहीं, बल्कि लंबी तैनाती और थकान का भी नतीजा हो सकती है. USS Gerald R. Ford पिछले लगभग 9 महीनों से लगातार समुद्र में तैनात है और इससे पहले कैरेबियन में वेनेजुएला से जुड़े ऑपरेशनों में भी हिस्सा ले चुका है. इतनी लंबी तैनाती ने जहाज के क्रू के मनोबल और कार्यक्षमता पर सवाल खड़े कर दिए हैं. इससे पहले भी इस पोत को तकनीकी समस्याओं का सामना करना पड़ा था, जिसमें टॉयलेट सिस्टम की खराबी जैसी घटनाएं शामिल हैं. ऐसे में युद्ध के बीच आग लगने की घटना ने अमेरिकी नौसेना की तैयारियों और मेंटेनेंस सिस्टम पर भी सवाल उठाए हैं.
ईरान को बढ़त?
रणनीतिक दृष्टि से देखें तो यह घटना ऐसे समय पर हुई है जब अमेरिका ने 28 फरवरी से शुरू हुए इस युद्ध में 7000 से अधिक ठिकानों पर हमले किए हैं. इस आक्रामक अभियान के बीच उसके सबसे अहम युद्धपोत का अस्थायी रूप से हटना, ईरान के लिए एक मनोवैज्ञानिक बढ़त के रूप में देखा जा सकता है. हालांकि, अमेरिकी नेवी के पास अन्य युद्धपोत भी मौजूद हैं जैसे कि USS Normandy और USS Thomas Hudner, लेकिन USS Gerald R. Ford जैसी क्षमता और मारक ताकत किसी अन्य प्लेटफॉर्म में नहीं है. ऐसे में इसका अस्थायी रूप से हटना ऑपरेशनल गैप पैदा कर सकता है.
अमेरिकी सैन्य रणनीति पर गंभीर सवाल
इस पूरे घटनाक्रम ने अमेरिका की सैन्य रणनीति पर भी सवाल खड़े किए हैं. अमेरिकी सीनेट की इंटेलिजेंस कमेटी के उपाध्यक्ष मार्क वॉर्नर ने भी लंबी तैनाती और सैनिकों पर बढ़ते दबाव को लेकर चिंता जताई है. उन्होंने इसे नीतिगत चूक करार दिया. भले ही यह घटना सीधे तौर पर युद्ध के मैदान में हार नहीं है, लेकिन इसे पहली बड़ी रणनीतिक चूक के तौर पर देखा जा रहा है. इससे यह साफ संकेत मिलता है कि आधुनिकतम तकनीक और विशाल सैन्य ताकत के बावजूद, लंबी लड़ाई में मानव संसाधन, मेंटेनेंस और लॉजिस्टिक्स जैसे कारक निर्णायक भूमिका निभाते हैं. ईरान के साथ जारी इस संघर्ष में यह घटना अमेरिका के लिए एक चेतावनी भी है और उसकी युद्ध रणनीति की कमजोरियों को उजागर करने वाली पहली बड़ी दरार भी.
USS Gerald R. Ford क्या है और इसकी खासियत क्या है?
USS Gerald R. Ford अमेरिकी नौसेना का परमाणु ऊर्जा से संचालित एयरक्राफ्ट कैरियर है, जिसे 2017 में कमीशन किया गया. यह दुनिया का सबसे बड़ा युद्धपोत है, जिसकी लंबाई 1,106 फीट और वजन 1 लाख टन से ज्यादा है.
Ford क्लास और Nimitz क्लास कैरियर्स में क्या अंतर है?
Nimitz-class aircraft carrier की तुलना में Ford क्लास में उन्नत तकनीक का इस्तेमाल किया गया है, जिससे क्रू मेंबर की संख्या कम होकर लगभग 2,500 रह गई है, जबकि Nimitz में यह करीब 3,250 होती है.
EMALS तकनीक क्या है और इसका क्या फायदा है?
Ford क्लास में पारंपरिक स्टीम कैटापल्ट की जगह Electromagnetic Aircraft Launch System का उपयोग किया गया है. यह इलेक्ट्रोमैग्नेटिक सिस्टम विमान को लॉन्च करता है, जिससे विमान पर दबाव कम पड़ता है और अलग-अलग वजन के विमानों को आसानी से उड़ाया जा सकता है.
USS Gerald R. Ford की ऑपरेशनल हिस्ट्री क्या रही है?
2017 में डिलीवरी के बाद इस जहाज ने कई समुद्री परीक्षण और अपग्रेड पूरे किए. इसी साल F/A-18F Super Hornet की सफल लैंडिंग और लॉन्चिंग हुई. 2019 से लेकर 2022 तक शॉक ट्रायल और फ्लाइट डेक सर्टिफिकेशन जैसे अहम परीक्षण भी पूरे किए गए.
इस युद्धपोत की स्पीड और रणनीतिक अहमियत क्या है?
यह एयरक्राफ्ट कैरियर 30 नॉट (करीब 35 मील प्रति घंटा) से अधिक की रफ्तार पकड़ सकता है. उन्नत तकनीक, ज्यादा पावर जनरेशन और ड्रोन ऑपरेशन की क्षमता इसे भविष्य के युद्ध में बेहद महत्वपूर्ण बनाती है.





