भारत-ऑस्ट्रेलिया व्यापार समझौते से निर्यातकों को कितनी राहत? जानिए पूरा मामला
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कानपुर. भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच व्यापार समझौते से उत्तर प्रदेश के निर्यातकों को विदेशी बाजार में कारोबार बढ़ाने का अवसर मिल रहा है. फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गेनाइजेशन (फियो) की ओर से आयोजित पांच दिवसीय बीटूबी कॉन्फ्रेंस में देशभर की 48 कंपनियां हिस्सा ले रही हैं. मेलबर्न और सिडनी में होने वाली कारोबारी बैठकों के दौरान यूपी के निर्यातक अपने खाद्य और कृषि उत्पादों को ऑस्ट्रेलियाई खरीदारों के सामने पेश कर रहे हैं. इससे नए खरीदार और बड़े ऑर्डर मिलने की उम्मीद है.
भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच हुए व्यापार समझौते से उत्तर प्रदेश के निर्यातकों को विदेशी बाजार में कारोबार बढ़ाने का अवसर मिल रहा है. खाद्य और कृषि क्षेत्र से जुड़े कारोबारी अब अपने उत्पादों को ऑस्ट्रेलियाई खरीदारों तक पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं. फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गेनाइजेशन (फियो) की ओर से आयोजित बीटूबी कॉन्फ्रेंस इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है. इसके जरिए भारतीय कंपनियों को सीधे विदेशी कारोबारियों से मिलने, अपने उत्पादों की जानकारी देने और नए व्यापारिक संबंध बनाने का मौका मिल रहा है.
फियो की ओर से ऑस्ट्रेलिया में पांच से नौ अक्टूबर तक बीटूबी कॉन्फ्रेंस आयोजित की जा रही है. इसमें उत्तर प्रदेश समेत देशभर की 48 कंपनियों के कारोबारी हिस्सा ले रहे हैं. फियो के यूपी प्रमुख आलोक श्रीवास्तव के मुताबिक, सम्मेलन के शुरुआती दिन से ही भारतीय निर्यातकों को ऑस्ट्रेलियाई कारोबारियों की ओर से अच्छा रिस्पॉन्स मिल रहा है. इस कार्यक्रम का उद्देश्य भारतीय उत्पादों को विदेशी खरीदारों के सामने पेश करना और उनके साथ सीधे बातचीत के जरिए कारोबार की संभावनाएं तलाशना है. इससे यूपी के निर्यातकों को नए ग्राहक और भविष्य में कारोबार बढ़ाने के अवसर मिल सकते हैं.
इस कारोबारी सम्मेलन के तहत पांच और छह अक्टूबर को मेलबर्न में कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है. इसके बाद सात और आठ अक्टूबर को सिडनी में कारोबारियों के साथ बैठकें होनी हैं. इन बैठकों में भारतीय निर्यातक अपने उत्पादों की गुणवत्ता, कीमत और आपूर्ति क्षमता के बारे में ऑस्ट्रेलियाई खरीदारों को जानकारी दे रहे हैं. सीधे बातचीत होने से खरीदारों की जरूरतों को समझने और उनके अनुसार उत्पादों की पेशकश करने में मदद मिल सकती है. अगर खरीदारों को उत्पाद पसंद आते हैं और कीमत व आपूर्ति की शर्तें अनुकूल रहती हैं, तो भविष्य में कारोबारी ऑर्डर मिलने की संभावना बढ़ सकती है.
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भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच वर्ष 2022 में इकोनॉमिक कॉम्प्रिहेंसिव ट्रेड एग्रीमेंट (ECTA) हुआ था. इस समझौते के तहत कई भारतीय उत्पादों को ऑस्ट्रेलियाई बाजार में आयात शुल्क से जुड़ी रियायतें मिली हैं. आयात शुल्क कम होने या समाप्त होने से संबंधित उत्पादों की लागत और बाजार में उनकी प्रतिस्पर्धा पर सकारात्मक असर पड़ सकता है. फियो के अधिकारियों के मुताबिक, इससे भारतीय निर्यातकों को दूसरे देशों के उत्पादों के मुकाबले बेहतर कीमत पर सामान पेश करने का अवसर मिल सकता है. हालांकि, शुल्क में छूट हर उत्पाद के लिए समान नहीं होती. यह संबंधित उत्पाद की टैरिफ श्रेणी और समझौते की शर्तों पर निर्भर करती है.
बीटूबी कॉन्फ्रेंस में यूपी के निर्यातक कई तरह के खाद्य और कृषि उत्पादों के लिए खरीदार तलाश रहे हैं. इनमें चावल, अनाज, बाजरा, दालें, मसाले, चाय, कॉफी और अन्य पेय पदार्थ शामिल हैं. इसके अलावा नाश्ते के सामान, बेकरी और कन्फेक्शनरी उत्पाद, रेडी-टू-ईट और रेडी-टू-कुक फूड, फ्रोजन खाद्य पदार्थ, ताजे फल-सब्जियां, सूखे मेवे, शहद और ऑर्गेनिक उत्पाद भी प्रदर्शित किए जा रहे हैं. इन उत्पादों की गुणवत्ता, कीमत और नियमित आपूर्ति की क्षमता खरीदारों के फैसले में अहम भूमिका निभा सकती है. ऐसे आयोजनों से निर्यातकों को यह समझने में भी मदद मिलती है कि विदेशी बाजार में किन उत्पादों की मांग हो सकती है.
फियो के यूपी प्रमुख आलोक श्रीवास्तव के मुताबिक, ऑस्ट्रेलिया भारतीय उत्पादों के लिए एक महत्वपूर्ण बाजार है. व्यापारिक बैठकों के जरिए केवल तत्काल ऑर्डर हासिल करना ही नहीं, बल्कि लंबे समय तक कारोबारी संबंध बनाना भी उद्देश्य है. अगर ऑस्ट्रेलियाई खरीदारों को यूपी के उत्पाद पसंद आते हैं और निर्यातक गुणवत्ता, कीमत तथा समय पर आपूर्ति की शर्तें पूरी कर पाते हैं, तो आगे भी ऑर्डर मिलने की संभावनाएं बन सकती हैं. इससे प्रदेश की कंपनियों को अपना कारोबार बढ़ाने और नए बाजारों तक पहुंचने में मदद मिल सकती है. हालांकि, वास्तविक लाभ इस बात पर निर्भर करेगा कि बातचीत के बाद कितने ऑर्डर मिलते हैं और उनका नियमित कारोबार में कितना रूपांतरण होता है.




