SEMICON में भारत की डीप-टेक कंपनी RayVector Technologies की तकनीक भी ध्यान खींच रही है. कंपनी की ओर से Multi Sensor Module के ज़रिए Wafer Handling Technology को प्रदर्शित किया गया है. अब इसे आसान भाषा में समझिए. RayVector Technologies के CTO चक्रवर्ती एलुमलाई ने न्यूज़ 18 इंडिया से बातचीत में बताया कि सेमीकंडक्टर बनाने में वेफर बेहद महत्वपूर्ण होता है.
इसमें कई चिप्स होते हैं . एक वेफर की कीमत करीब 2,000 डॉलर से शुरू होकर हजारों डॉलर तक जा सकती है. ऐसे में अगर निर्माण के दौरान वेफर में कोई छोटी सी गड़बड़ी समय पर पकड़ में नहीं आती तो नुकसान बहुत बड़ा हो सकता है. RayVector की तकनीक का दावा है कि उसके सेंसर सिस्टम वेफर में होने वाली छोटी से छोटी गड़बड़ी को तेजी से पहचानने में मदद करते हैं और पहले ही चेतावनी दे सकते हैं.
बचेंगे करोड़ों के संभावित नुकसान
कंपनी के मुताबिक, किसी बड़ी समस्या का समय पर पता नहीं चलने पर पूरी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट को बंद करना पड़ सकता है और कई दिनों तक उत्पादन प्रभावित हो सकता है. ऐसे में नुकसान करोड़ों रुपये तक पहुंच सकता है. यानी यहां एक छोटा सेंसर मॉड्यूल करोड़ों के संभावित नुकसान को रोकने में भूमिका निभा सकता है.
बड़ी-बड़ी कंपनियों ने जताया भरोसा
चक्रवर्ती एलुमलाई का दावा है कि Samsung, Intel और TSMC जैसी कंपनियां उसकी तकनीक का इस्तेमाल कर रही हैं. भारत की ताकत सिर्फ चिप बनाने में नहीं, चिप डिजाइन में भी है. RayVector जैसी कंपनियों की मौजूदगी ये संकेत देती है कि भारत की सेमीकंडक्टर कहानी सिर्फ चिप फैक्ट्री लगाने तक सीमित नहीं है. चिप डिजाइन, सेंसर, इमेजिंग, एआई, टेस्टिंग, उपकरण और सॉफ्टवेयर इन सभी क्षेत्रों को जोड़कर एक पूरा इकोसिस्टम तैयार करने की कोशिश हो रही है.
प्रधानमंत्री मोदी ने भी अपने भाषण में कहा कि भारत का लक्ष्य फैबलेस कंपनियों को बढ़ाना और चिप से जुड़ी बौद्धिक संपदा भारत में तैयार करना है. कंपाउंड सेमीकंडक्टर, सिलिकॉन फोटोनिक्स और एआई के लिए जरूरी तकनीक पर भी काम बढ़ाया जा रहा है.
AI आएगा तो चिप की जरूरत और बढ़ेगी
एआई के बढ़ते इस्तेमाल ने सेमीकंडक्टर की अहमियत और बढ़ा दी है. एआई डेटा सेंटर में हजारों हाई-परफॉर्मेंस प्रोसेसर एक साथ काम करते हैं. जितना ज्यादा एआई का इस्तेमाल होगा, उतनी ज्यादा कंप्यूटिंग पावर की जरूरत होगी. ज्यादा कंप्यूटिंग का मतलब है ज्यादा चिप, ज्यादा डेटा और ज्यादा बिजली.
यही वजह है कि अब चिप की दौड़ सिर्फ छोटे और तेज ट्रांजिस्टर तक सीमित नहीं है. मेमोरी को प्रोसेसर के करीब लाना, कई चिप को एक साथ काम कराना, डेटा को तेजी से ट्रांसफर करना और गर्मी तथा बिजली की खपत को नियंत्रित करना भी बड़ी चुनौती है.
भारत के पास सबसे बड़ी ताकत युवा इंजीनियर
इस पूरी चिप क्रांति में भारत की सबसे बड़ी ताकत उसकी युवा प्रतिभा है. प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि सरकार ने सेमीकंडक्टर उद्योग के लिए 1 लाख इंजीनियरिंग छात्रों को प्रशिक्षित करने का लक्ष्य रखा है और 70 हजार से ज्यादा युवाओं को पहले ही प्रशिक्षण दिया जा चुका है.
यानी भारत सिर्फ फैक्ट्री लगाने की तैयारी नहीं कर रहा, बल्कि उन लोगों की नई पीढ़ी तैयार करने पर भी जोर दे रहा है जो भविष्य में इन चिप और तकनीकों को डिजाइन और विकसित करेंगे.




