CPT vs OPT Visa Meaning: सीपीटी और ओपीटी में क्या अंतर है? पढ़ाई या नौकरी के लिए अमेरिका जा रहे हैं तो समझ लें नियम


नई दिल्ली (CPT vs OPT Visa). लाखों भारतीय अमेरिका जाकर पढ़ाई करने और वहां किसी बड़ी कंपनी में काम करने का सपना देखते हैं. अगर आप भी F-1 स्टूडेंट वीजा पर अमेरिका में पढ़ाई कर रहे हैं या जाने की योजना बना रहे हैं तो सीपीटी (Curricular Practical Training) और ओपीटी (Optional Practical Training) के बारे में जरूर सुना होगा. ये दोनों अमेरिकी सरकार की तरफ से विदेशी स्टूडेंट्स को दिए जाने वाले ऐसे अधिकार हैं, जिनके जरिए पढ़ाई के साथ-साथ वर्क एक्सपीरियंस भी हासिल कर सकते हैं.

हालांकि, कई स्टूडेंट्स CPT और OPT को एक ही समझ लेते हैं या इनके नियमों को लेकर कंफ्यूजन में रहते हैं. सही जानकारी न होने की वजह से कई बार स्टूडेंट्स का वीजा स्टेटस तक खतरे में पड़ जाता है. आसान भाषा में समझें तो सीपीटी पढ़ाई के दौरान की जाने वाली ट्रेनिंग या इंटर्नशिप के लिए होता है, जबकि ओपीटी पढ़ाई खत्म होने के बाद अमेरिका में नौकरी करने का जरिया है. अगर आप अमेरिका जाकर पढ़ाई या नौकरी करना चाहते हैं तो जानिए सीपीटी और ओपीटी के बीच अंतर.

सीपीटी और ओपीटी में क्या अंतर है?

सीपीटी पढ़ाई के दौरान मिलने वाली इंटर्नशिप है, जो आपके कॉलेज कोर्स का हिस्सा होती है. वहीं, ओपीटी डिग्री पूरी होने के बाद अमेरिका में 1 से 3 साल तक नौकरी करने का वर्क परमिट है. आसान शब्दों में कहें तो सीपीटी डिग्री के साथ की जाने वाली इंटर्नशिप है और ओपीटी डिग्री के बाद मिलने वाला जॉब एक्सपीरियंस.

सीपीटी का मतलब क्या है?

सीपीटी (करिकुलम प्रैक्टिकल ट्रेनिंग) ऐसा वर्क ऑथराइजेशन है जो F-1 वीजा स्टूडेंट्स को उनकी डिग्री की पढ़ाई के दौरान ही काम करने की अनुमति देता है. यह काम या इंटर्नशिप सीधे तौर पर स्टूडेंट के मुख्य विषय (Major) से जुड़ा होना चाहिए और उनकी पढ़ाई के सिलेबस या कोर्स वर्क का हिस्सा होना अनिवार्य है. सीपीटी पार्ट-टाइम (हफ्ते में 20 घंटे तक) या फुल-टाइम (हफ्ते में 20 घंटे से ज्यादा) हो सकती है. इसे शुरू करने के लिए यूनिवर्सिटी के DSO (Designated School Official) की मंजूरी जरूरी होती है.

ओपीटी का मतलब क्या है?

ओपीटी (ऑप्शनल प्रैक्टिकल ट्रेनिंग) स्टूडेंट्स को अपनी डिग्री से संबंधित क्षेत्र में अमेरिका में काम करने का मौका देता है. CPT के उलट, OPT का इस्तेमाल आमतौर पर पढ़ाई पूरी होने के बाद (Post-Completion OPT) किया जाता है. इसके तहत स्टूडेंट्स को 12 महीने तक अमेरिका में रहकर काम करने की अनुमति मिलती है. अगर स्टूडेंट साइंस, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग या मैथ्स यानी STEM बैकग्राउंड से है तो वह इसे 24 महीने और बढ़ा सकता है, जिससे कुल 3 साल तक काम करने का मौका मिल जाता है.

सीपीटी और ओपीटी के बीच 4 मुख्य अंतर

सीपीटी और ओपीटी के बीच का अंतर आप नीचे लिखे पॉइंट्स से ज्यादा बेहतर तरीके से समझ सकते हैं-

1. काम करने की टाइमिंग: CPT का इस्तेमाल डिग्री पूरी करने से पहले (पढ़ाई के दौरान) ही कर सकते हैं. वहीं, OPT का मुख्य रूप से इस्तेमाल ग्रेजुएशन या डिग्री पूरी करने के बाद किया जाता है.

2. अप्रूवल की प्रक्रिया: CPT को मंजूरी यूनिवर्सिटी या कॉलेज का अंतर्राष्ट्रीय कार्यालय (DSO) देता है. इसके लिए यूएस सिटीजनशिप एंड इमिग्रेशन सर्विसेज (USCIS) से अलग से अनुमति या कार्ड की जरूरत नहीं होती. इसके विपरीत, OPT के लिए USCIS में अप्लाई करना होता है और बाकायदा EAD (Employment Authorization Document) कार्ड हासिल करना पड़ता है.

3. पढ़ाई से संबंध: सीपीटी के लिए जरूरी है कि नौकरी आपके क्रेडिट आवर्स या एकेडमिक करिकुलम का अनिवार्य हिस्सा हो. लेकिन ओपीटी के लिए केवल यह जरूरी है कि नौकरी आपके स्टडी फील्ड से जुड़ी हो, वह कोर्स का हिस्सा हो, यह आवश्यक नहीं है.

4. 12 महीने का सीक्रेट नियम: अगर कोई स्टूडेंट अपनी पढ़ाई के दौरान 12 महीने या उससे अधिक समय के लिए ‘फुल-टाइम CPT’ कर लेता है तो वह ग्रेजुएशन के बाद OPT के लिए एलिजिबल नहीं रहता. इसलिए CPT का इस्तेमाल बहुत सावधानी से करना चाहिए.

इन बातों का ध्यान रखें स्टूडेंट्स

अमेरिका में पढ़ाई की शुरुआत में ही अपने यूनिवर्सिटी काउंसलर या DSO से CPT और OPT के नियमों की पूरी जानकारी ले लें. अगर आप पढ़ाई के दौरान इंटर्नशिप कर रहे हैं तो ध्यान रखें कि आपका फुल-टाइम CPT 12 महीने से कम का ही रहे, जिससे पढ़ाई पूरी होने के बाद OPT पाने का रास्ता बंद न हो. सही प्लानिंग के साथ आप इन दोनों अवसरों का पूरा फायदा उठा सकते हैं.



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